
इंदौर। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति से हुई मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने का मामला अब पूरी तरह न्यायिक दायरे में आ गया है। इस गंभीर लापरवाही को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में लगातार जनहित याचिकाएं दायर की जा रही हैं। शुक्रवार को नगर निगम की ओर से इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश की, वहीं एक नई जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को नोटिस जारी किए।
गौरतलब है कि 31 दिसंबर को इस प्रकरण में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। पहली याचिका हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी ने दायर की थी, जबकि दूसरी पूर्व पार्षद महेश गर्ग और कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी की ओर से दायर की गई थी। इसमें पैरवी अधिवक्ता मनीष यादव ने की। उस दिन सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नगर निगम को प्रभावित नागरिकों का मुफ्त इलाज कराने और क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के अंतरिम आदेश दिए थे।
इन्हीं आदेशों के पालन में 2 जनवरी को नगर निगम ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की। हालांकि, अधिवक्ता मनीष यादव ने अदालत में आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि रिपोर्ट में केवल चार मौतों का उल्लेख है, जबकि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाने और विस्तृत, तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की भी मांग की।
तीसरी जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी, जबकि पहले से दायर दो याचिकाओं पर 6 जनवरी को सुनवाई तय की गई है। हाईकोर्ट पूरे मामले पर कड़ी नजर बनाए हुए है।