
भोपाल। सिंगरौली से जुड़ा कोल ब्लॉक और हाथी कॉरिडोर विवाद अब सियासी रंग लेता जा रहा है। कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए सीधे तौर पर सिस्टम की मंशा पर सवाल खड़े किए। सिंगरौली जिले के बासी बेरदहा क्षेत्र में कोयला उत्पादन के मद्देनजर जंगल की बड़े पैमाने पर कटाई की जा रही है, जिससे पर्यावरण संतुलन को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
पहले के दस्तावेजों में हाथी गालियारे की पुष्टि
कांग्रेस नेता ने कहा कि देश को ऊर्जा देने वाले सिंगरौली में जंगल, वन्यजीव और आदिवासी हितों की अनदेखी कर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले के दस्तावेज हाथी गालियारे की पुष्टि करते हैं, तो बाद की रिपोर्ट किस आधार पर बदली गई ?
नियमों का उल्लंघन किया गया
विक्रांत भूरिया ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि अगर हाथी कॉरिडोर में खनन की अनुमति दी गई, तो यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और पर्यावरणीय नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस मामले में सिंगरौली वन विभाग के एसडीओ ने कहा कि खदान से हाथी कॉरिडोर प्रभावित नहीं हुआ है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोल ब्लॉक के लिए हाथी कॉरिडोर बदला गया और क्या इस कथित हेरफेर के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
खनन को मंजूरी देने के उद्देश्य से बदलाव किया
कांग्रेस नेता विक्रांत भूरिया का कहना है कि जहां पहले सरकारी दस्तावेजों और आईएफएस अधिकारियों की रिपोर्ट में साफ लिखा गया था कि कोल ब्लॉक क्षेत्र हाथी कॉरिडोर का हिस्सा है। वहीं बाद में वीकली प्लान और रिपोर्ट में बदलाव कर हाथी कॉरिडोर को कोल ब्लॉक से बाहर दिखाया गया। उनका आरोप है कि यह बदलाव खनन को मंजूरी देने के उद्देश्य से किया गया। कांग्रेस नेता ने कहा कि देश को ऊर्जा देने वाले सिंगरौली में जंगल, वन्यजीव और आदिवासी हितों की अनदेखी कर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले के दस्तावेज हाथी गालियारे की पुष्टि करते हैं, तो बाद की रिपोर्ट किस आधार पर बदली गई।