
मंडला। उत्पादन वनमंडल में उस समय हड़कंप की स्थिति बन गई, जब वन विभाग के कर्मचारी, रेंजर और एसडीओ एकजुट होकर डीएफओ के विरोध में सड़क पर उतर आए। उत्पादन वन मंडल कार्यालय के सामने हुए इस प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी हुई और ‘डीएफओ हटाओ’ के नारों से परिसर गूंज उठा। प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए कार्यालयीन कार्य भी प्रभावित रहा।
वनकर्मियों ने उत्पादन वनमंडल अधिकारी पूजा नागले पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके द्वारा लगातार कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। आरोप है कि समीक्षा बैठकों में अपशब्दों का प्रयोग कर कर्मचारियों की कार्यक्षमता और योग्यता पर सवाल उठाए जाते हैं। इतना ही नहीं, मानसिक दबाव बनाकर नौकरी छोड़ने तक के लिए उकसाया जाता है, जिससे कर्मचारी गहरे तनाव में हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिना किसी ठोस कारण के बैठकों के दौरान कर्मचारियों के मोबाइल फोन की जांच कराई जाती है, जिससे उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित होना पड़ता है। इसके अलावा कुशल और अकुशल कर्मचारियों को एक साथ जोखिम भरे कार्यों में लगाने के निर्देश दिए जाते हैं, जो किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। वनकर्मियों के अनुसार इस तरह के आदेशों से उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
वनकर्मियों ने सामूहिक रूप से उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए सात दिनों के भीतर डीएफओ को हटाने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे कलमबंद आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब सभी की निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं।