
इंदौर। दूषित जल कांड की पुनरावृत्ति रोकने और स्थानीय लोगों को शुद्ध पानी देने निगम लगातार काम कर रहा है। इस क्रम में नर्मदा पानी में जहां लीकेज होने पर ड्रेनेज का पानी मिला है, उसे ढूंढा जा रहा है। छह दिन होने के बाद भी निगम और जल यंत्रालय विभाग को लीकेज नहीं मिल पाया।
पहले जहां भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास शौचालय का गंदा पानी नर्मदा लाइन से आने की बात कही थी, वहां भी निगम ने खुदाई की, मगर सफलता हाथ नहीं लगी। लीकेज को तलाशने में निगम के पसीने छूट गए हैं। कई सारे पाइंट खंगालने के बाद अब पुरानी लाइन को खोलने का काम शुरू किया गया है। इस लाइन के स्थान पर नई लाइन बिछा दी जाएगी।
उधर, ड्रेनेज और सीवरेज के चेम्बरों की वृहद पैमाने पर सफाई की जा रही है। रहवासियों प्रभा यादव ने बताया कि कई दिनों से गंदा पानी आ रहा था। अब टैंकरों से पानी मिल रहा है। कुछ लोगों ने बोरिंग लगाए हुए हैं, वे आसपास के लोगों को बांट देते हैं। हालांकि, शनिवार से बोरिंग के पानी को शुद्ध करने क्लोरीन डाला जा रहा है। इसके चलते बोरिंगों को सुबह 8 से शाम 4 बजे तक बंद किया जा गया। 4 बजे बाद दोबारा बोरिंग से सप्लाय प्रारंभ किया।
5 अपर आयुक्त, 32 उपयंत्री
इंदौर नगर निगम ने भागीरथपुरा में दूषित पानी के लीकेज को खोजने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। शनिवार से लीकेज खोजने, पानी की सैंपलिंग व जांच के लिए इंदौर नगर निगम में आए तीनों नए अपर आयुक्तों के साथ पहले से मौजूद 5 अपर आयुक्तों को निरीक्षण व निगरानी का जिम्मा सौंपा गया। भागीरथपुरा की 32 गलियों में 32 उपयंत्री व सहायक यंत्री भी बीट अनुसार सफाई, सैंपलिंग, लीकेज खोजने में जुटे हैं।
हैजा और डायरिया के जीवाणु
हालात यह है कि नर्मदा टंकी से सप्लाई हो रहे पानी के नमूनों में अब भी हैजा और डायरिया जैसी घातक बीमारियों के जीवाणु पाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम द्वारा अब तक भेजे गए सभी पानी के सैंपल लैब जांच में फेल बताए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र के लोगों में भय और आक्रोश दोनों व्याप्त हैं। रहवासियों का कहना है कि जब तक यह पूरी तरह सिद्ध नहीं हो जाता कि नर्मदा का पानी शुद्ध और सुरक्षित है, तब तक वे नलों से आ रहे पानी का उपयोग पीने के लिए नहीं करेंगे।
नेताओं से लोगों को नाराजी
स्थानीय निवासियों ने बताया कि गंदे पानी की समस्या नई नहीं है। वर्षों से इस इलाके में दूषित जल की शिकायत की जाती रही हैं, लेकिन हर बार केवल अस्थायी उपाय कर मामले को टाल दिया जाता है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान आज तक नहीं निकाला गया। इधर, क्षेत्र में बाहर से लगातार नेताओं के आने को लेकर भी नाराजगी देखी जा रही है। कुछ रहवासियों ने कहा कि नेता सिर्फ राजनीति करने आ रहे हैं, लेकिन किसी ने भी पीड़ित परिवारों का दुख बांटने या स्थायी समाधान देने की पहल नहीं की। लोगों ने प्रशासन से जल्द लीकेज खोज कर शुद्ध जल आपूर्ति बहाल करने की मांग की है।
अग्रवाल समाज ने कैम्पर बांटे
रेडवाल कॉलोनी और भागीरथपुरा रोड नंबर 1 पर अग्रवाल चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से पानी के 50 कैम्पर बांटे गए। आसपास के रहवासी भी कैम्परों से पानी दे रहे हैं। निगम के टैंकर भी 24 घंटे मुख्य मार्ग पर खड़े रहते हैं। जिन गलियों तक टैंकर नहीं पहुंच रहा, वहां निगम कर्मचारी अपने वाहन से पानी पहुंचा रहे हैं। नगर निगम के प्रभारी जलकार्य समिति अभिषेक शर्मा पांच दिन बीत गए हैं, लीकेज नहीं मिल सका। लीकेज मिलते ही उसे सुधारा जाएगा। इसके साथ ही अमृत योजना 2 की मद से पूरे क्षेत्र की पुरानी लाइनों को बदलकर वहां नर्मदा की नई लाइन बिछाई जाएगी। एक दो दिन में लीकेज मिल सकता है। लीकेज ढूंढने में 20 से अधिक कर्मचारी लगाए गए हैं।
