
इंदौर। बीते साल भी भ्रष्टाचार करने वाले सरकारी अफसरों और कर्मचारियों की कारगुजारियां कम नहीं है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, बैंक फ्रॉड, गबन और पद के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई की। शिकायतों की जांच के बाद धोखाधड़ी, गबन, बैंक फ्रॉड, पद के दुरुपयोग और राजस्व हानि पहुंचाने के मामलों में कई लोगों व कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किए गए।
साल भर के दौरान ईओडब्लयू को 84 शिकायतें मिली। इनमें 20 में आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। ईओडब्ल्यू की जांच के बाद 8 मामलों में चालान पेश हुए। 3 में छापे मारे गए और 4 मामलों में ट्रैप की कार्रवाई कर रिश्वतखोर अधिकारियों-कर्मचारियों को पकड़ा। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के एसपी रामेश्वर सिंह यादव के मुताबिक ईओडब्ल्यू ने अनुपातहीन संपत्ति के मामलों में तीन अधिकारियों के यहां छापे मारे।
पद का दुरुपयोग करने, रिश्वत मांगने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जिन अधिकारियों के यहां छापे मारे गए, उनके यहां 8 करोड़ की काली कमाई जब्त की गई। ईओडब्ल्यू ने आय से अधिक संपत्ति के मामलों में नंदकिशोर सोलंकी, प्रबंधक, सेवा सहकारी संस्था मर्यादित, रिंगनोद (धार) के यहां छापा मारा। उसके यहां से अनुमानित करीब चार करोड़ रुपए की संपत्ति का पता चला है। नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार के यहां भी करीब दो करोड़ रुपए की काली कमाई का खुलासा हुआ है। नगर निगम के ही उद्यान अधिकारी चेतन पाटिल के यहां दो करोड़ रुपए आय से अधिक अर्जित किए जाने के प्रमाण मिले।
रिश्वतखोरों को पकड़ा
रिश्वत लेते हुए 4 अधिकारियों-कर्मचारियों को ईओडब्ल्यू ने ट्रैप किया। इनमें विक्रम सिंह चौहान मंडी प्रभारी महू को 1 लाख रुपए, किशोर नाविक, सहायक ग्रेड-3, कृषि विभाग को 25 हजार रुपए लेते पकड़ा गया। ओम गुप्ता पंचायत सचिव, ग्राम पंचायत उपज मंडी समिति को 10 हजार रुपए। पुनीत अग्रवाल (सहायक राजस्व अधिकारी) एवं रोहित साबले को भी घूस मांगने के आरोप में पकड़ा था।