
भोपाल। नेशनल हाईवे-12 वाइल्डलाइफ प्रोटक्शन के लिए की गई रेड कलर की टेबल टॉप रेड मार्किंग की वजह से चर्चा में है। देश के कई इलाकों से इस तरह की सड़क बनाने के लिए जबलपुर नेशनल हाईवे अथॉरिटी के पास इंक्वायरी भी आई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी का कहना है कि, उनका यह प्रयोग सफल रहा, लेकिन वे अब चोरों से परेशान हैं। क्योंकि, चोर सड़क पर लगे एलईडी साइन बोर्ड चुरा रहे हैं। सड़क किनारे लगी लोहे की जाली को भी कई जगह चुरा लिया गया है।
जबलपुर से भोपाल तक के लिए नेशनल हाईवे-12 बनाया गया है। यह सड़क लगभग 300 किलोमीटर लंबी है। इस हाईवे का लगभग 12 किलोमीटर का क्षेत्र नौरादेही टाइगर रिजर्व से होकर गुजरता है। इसी में से लगभग 2 किलोमीटर इलाके में टेबल टॉप रेड मार्किंग की गई है, जिसकी वजह से यह सड़क चर्चा में बनी हुई है। इस 2 किलोमीटर इलाके में लाल कलर के बड़े-बड़े निशाना बनाए गए हैं। यह लगभग 2 मिलीमीटर मोटे हैं।
देशभर में इस प्रयोग को सराहना
नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी अमृतलाल साहू का कहना है कि हमारा यह प्रयोग पूरे भारत में सराहा जा रहा है। इस सड़क के बनने के बाद देश के कई इलाकों से इसी तरह की सड़क बनाने के लिए जानकारियां मांगी गई हैं। चेन्नई और पंजाब के सड़क निर्माण से जुड़े अधिकारियों ने इस निर्माण कार्य की जानकारी ली है। अमृतलाल साहू ने बताया कि यह आइडिया पूरी दुनिया में नया है। हालांकि, सड़कों पर लाल कलर कई जगह पर लगाया जाता है। दुबई में कुछ सड़कें ऐसी हैं, जहां वाहनों की गति धीमी करने के लिए पूरी सड़क को ही लाल कर दिया जाता है। हालांकि, यह लंबाई मात्र 100 मीटर तक होती है। इसी तरह साइकिल ट्रैक बनाने के लिए भी सड़क लाल की जाती है, लेकिन वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सड़क पर टेबल टॉप रेड मार्किंग पहली बार की गई।
सड़क लाल और तार फेंसिंग
अमृतलाल साहू ने बताया कि हमारा यह प्रयोग सफल रहा है। सड़क पर केवल लाल कलर के निशान ही नहीं बनाए गए हैं, बल्कि इस सड़क में जंगल के पूरे इलाके में तार की फेंसिंग भी की गई है। 25 जगह पर जानवरों को सड़क पार करने के लिए अंडरपास भी बनाए गए हैं। जब इस सड़क पर यह सभी सुविधाएं नहीं थी, तो 2 साल में लगभग 300 जानवरों की एक्सीडेंट से मौत हुई थी, लेकिन इस कार्य के पूरे हो जाने के बाद बीते 1 साल में कोई भी जानवर सड़क दुर्घटना से इस क्षेत्र में नहीं मरा है।