
धार। आज 23 दिसंबर को धार में जन‑निजी भागीदारी आधारित चिकित्सा महाविद्यालय का भूमिपूजन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में होना है। आमंत्रण पत्र में कार्यक्रम स्थल के रूप में पीजी कॉलेज/पुलिस ग्राउंड, धार और आयोजक के रूप में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, मप्र का उल्लेख है। लेकिन, धार जिले के किसी भी विधायक का नाम नहीं है।
मेडिकल कॉलेज के भूमि पूजन के आमंत्रण पत्र से स्थानीय विधायकों के नाम गायब हैं, जबकि बैतूल के विधायक व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल का नाम प्रमुखता से होना, सरकारी कार्यक्रम में राजनीतिक प्राथमिकताओं और प्रोटोकॉल की अनदेखी दोनों की तरफ संकेत करता है।
इससे स्थानीय प्रतिनिधित्व की अनदेखी और जिले की जनता के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को साइड‑लाइन करने का आरोप लग रहा है। धार विधानसभा की वर्तमान विधायक भाजपा की नीना विक्रम वर्मा हैं, जिन्होंने 2023 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को हराया था। जिले में धार के अलावा सरदारपुर, गंधवानी, बदनावर, मनावर, कुक्षी जैसी विधानसभा सीटें हैं, जहां से कांग्रेस के विधायक चुने गए। सामान्यतः ऐसे जिला स्तरीय सरकारी कार्यक्रमों में क्षेत्र के सभी विधायकों के नाम सम्माननीय अतिथि या विशिष्ट अतिथि के रूप में छपते हैं, इसलिए उनका नाम न होना प्रोटोकॉल का स्पष्ट उल्लंघन माना जा रहा है।
आमंत्रण पत्र में हेमन्त खण्डेलवाल” को विशिष्ट अतिथि की तरह स्थान दिया गया, जबकि वे बैतूल विधानसभा से विधायक हैं, धार से उनका प्रत्यक्ष निर्वाचन क्षेत्रीय संबंध नहीं है। खंडेलवाल 2025 में मध्य प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए हैं। उन्हें संगठन में नंबर‑वन पद मिलने के बाद अब राज्य‑स्तरीय सरकारी आयोजनों में प्रमुख चेहरा बनाकर प्रोजेक्ट किया जा रहा है। इस वजह से धार और बैतूल, दोनों मेडिकल कॉलेज भूमिपूजन कार्यक्रमों के प्रचार‑सामग्री तथा आमंत्रण पत्रों में उनका नाम जोड़ा गया, ताकि संगठन की नई नेतृत्व टीम को सरकार के साथ मंच साझा करने का अवसर मिल सके।
तकनीकी रूप से ऐसे शासकीय कार्यक्रम राज्य सरकार और संबंधित विभाग आयोजित करते हैं, अतिथियों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय और विभागीय मंत्री के साथ‑साथ सत्तारूढ़ दल के संगठन से समन्वय करके तय की जाती है।नाम तय करते समय प्रदेश अध्यक्ष, संगठन के अन्य पदाधिकारियों या ‘स्टार चेहरे’ को मंच पर जगह देना अक्सर राजनीतिक प्राथमिकता होती है, जबकि स्थानीय विधायकों का प्रतिनिधित्व पीछे छूट जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब सरकारी खर्च से होने वाले कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों को तरजीह देकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को नज़रअंदाज किया जाता है तो राज्य संसाधनों के दलगत उपयोग और ‘प्रोटोकॉल के राजनीतिकरण’ की आशंका बढ़ जाती है।
प्रमुख सवाल यह है कि धार की जनता के चुने हुए विधायकों को आमंत्रण पत्र में जगह क्यों नहीं! जबकि, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल के विधायक हेमन्त खंडेलवाल को विशिष्ट अतिथि बनाया गया? क्या धार के विधायकों से सहमति या परामर्श लिया गया, या पूरा कार्यक्रम सिर्फ सरकार‑संगठन की आंतरिक राजनीति के अनुसार डिजाइन किया गया? यह सवाल विपक्ष के साथ‑साथ सत्तापक्ष के स्थानीय नेताओं में भी असंतोष पैदा कर सकता है।
यह प्रकरण इस बहस को भी हवा देता है कि क्या मेडिकल कॉलेज जैसे जनहित के बड़े प्रोजेक्ट पर सरकार संगठनात्मक शक्ति‑प्रदर्शन ज्यादा कर रही है, जबकि स्थानीय प्रतिनिधियों और जनता की सहभागिता औपचारिकता भर रह गई है।
