
इंदौर। काशी के विश्वविख्यात एवं अत्यंत पावन मणिकर्णिका घाट को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने को लेकर धनगर समाज में भारी आक्रोश और असंतोष व्याप्त है। समाज ने इस कार्रवाई को आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत पर सीधा प्रहार बताया है।
उल्लेखनीय है कि मणिकर्णिका घाट का निर्माण लोकमाता अहिल्याबाई होलकर द्वारा वर्ष 1771 में कराया गया था, जो लगभग 250 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में स्थापित रहा है। धनगर समाज के सुधीर देडगे ने कहा कि विकास के नाम पर इस तरह किसी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की धरोहर को बिना ठोस योजना, बिना सावधानी और पुरातत्व अधिनियमों का पालन किए ध्वस्त करना अत्यंत निंदनीय है।
घाट परिसर में स्थित मंदिरों और प्राचीन संरचनाओं को गिराए जाने से समाज सहित अहिल्याबाई भक्तों की भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं। इस निर्णय के खिलाफ धनगर, गड़रिया, पाल, बघेल समाज सहित धनगर समाज की समस्त उपजातियों में तीव्र आक्रोश देखने को मिल रहा है।
समाज की बैठक में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई, मणिकर्णिका घाट एवं देवस्थानों के पुनर्निर्माण तथा लोकमाता अहिल्याबाई की प्रतिमाओं को पुनः स्थापित करने की मांग सर्वसम्मति से उठाई गई। निर्णय लिया गया कि आंदोलन की अगली कड़ी में 19 जनवरी को इंदौर कलेक्टर को प्रधानमंत्री एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही राजवाड़ा पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा तथा वाराणसी प्रशासन को ज्ञापन देने के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा।
समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो विधिक कार्रवाई और व्यापक आंदोलन किया जाएगा। सुधीर देडगे, हरीश बारगल, संजय कड़, श्रीमती सरयू वाघमारे, सुनील मतकर, सुभाष चौधरी, दीपक वालेकर, अविनाश भांड, जतिन थोरात, लक्ष्मण दातीर, श्रीमती ज्योत्सना होल्कर सहित अन्य समाजसेवी बैठक में मौजूद रहे।