
दमोह। जिले की प्रशासनिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक कलेक्टर बंगला 1 जनवरी 2026 को अपने 100 साल पूरे कर शताब्दी में प्रवेश कर गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर कलेक्टर बंगले को भव्य रोशनी और विशेष सजावट से सुसज्जित किया गया, जिससे पूरा परिसर आकर्षक और गौरवशाली नजर आया। शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में विशेष डाक टिकट जारी किए जाने की भी तैयारी है, जिससे इस विरासत को राष्ट्रीय पहचान मिल सके।
वर्ष 1926 में निर्मित यह भवन अंग्रेजी शासनकाल की स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। प्रारंभ में यह कलेक्टर आवास नहीं था, बल्कि ब्रिटिश शासन के दौरान ब्रिगेडियर स्तर के वरिष्ठ अंग्रेज अधिकारी का निवास हुआ करता था। उस समय यह भवन शासन और प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा।
स्वतंत्र भारत में दमोह जिले के गठन के बाद वर्ष 1956 में पहली बार इसे कलेक्टर का आधिकारिक आवास बनाया गया, जब एसएन राबरा ने जिले के पहले कलेक्टर के रूप में यहां निवास प्रारंभ किया।
पिछले एक शताब्दी के दौरान यह कलेक्टर बंगला जिले के प्रशासनिक निर्णयों, विकास योजनाओं और ऐतिहासिक बदलावों का साक्षी रहा है।
अभी तक कुल 44 कलेक्टरों ने इस भवन में रहते हुए दमोह जिले की प्रशासनिक कमान संभाली है। वर्तमान में कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर (11 मार्च 2024 से वर्तमान) यहां पदस्थ हैं। शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में इस भवन के गौरवशाली इतिहास को याद किया गया। आज भी कलेक्टर बंगला केवल एक प्रशासनिक आवास नहीं, बल्कि दमोह जिले की विरासत, परंपरा और प्रशासनिक गौरव का जीवंत प्रतीक बना है।
