
नई दिल्ली। जाति जनगणना के मुद्दे पर कांग्रेस ने मोदी सरकार की घेरेबंदी की कोशिश की है। पार्टी ने कहा कि जनगणना के पहले चरण यानी मकानों की सूची बनाने (हाउस लिस्टिंग) के लिए जो सवाल तैयार किए गए, वे सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि जाति जनगणना की प्रक्रिया तय करने से पहले सरकार को राजनीतिक दलों, राज्यों और सामाजिक संगठनों के साथ बातचीत करनी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जनगणना 2027 का काम काफी देरी से चल रहा है। इसका पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा। दूसरा चरण, जिसमें जनसंख्या की गिनती होगी, वह फरवरी 2027 में होगा। हालांकि, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर जैसे बर्फीले इलाकों में यह सितंबर 2026 में ही हो जाएगा।
‘शहरी नक्सली सोच’ कहने वाले इसलिए बदले
जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार ने पहले जाति जनगणना का विरोध किया था। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने इसे ‘शहरी नक्सली सोच’ बताया था। लेकिन’ बाद में राहुल गांधी और कांग्रेस के दबाव में सरकार को झुकना पड़ा और उन्होंने इसे जनगणना 2027 में शामिल करने की बात मानी।
घर के मुखिया की जानकारी का फॉर्मेट गलत
रमेश ने बताया कि सरकार ने मकानों की सूची बनाने के लिए जो फॉर्म जारी किया है, उसमें सवाल नंबर 12 चिंताजनक है। इसमें पूछा गया है कि क्या घर का मुखिया अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) या ‘अन्य’ श्रेणी से है। इसमें ओबीसी और सामान्य वर्ग के बारे में साफ तौर पर नहीं पूछा गया। रमेश ने कहा कि यह तरीका बताता है कि सरकार निष्पक्ष जाति जनगणना के लिए गंभीर नहीं है।
कांग्रेस नेता ने सुझाव दिया कि सरकार को तेलंगाना सरकार के 2025 के सर्वे (एसईईईपीसी) से सीखना चाहिए। वहां शिक्षा, रोजगार और आय पर जाति-वार जानकारी जुटाई गई थी। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए ऐसी जानकारी जरूरी है।
33 सवालों की अधिसूचना जारी
जनगणना के पहले सरकार ने चरण के लिए 33 सवालों की अधिसूचना जारी की है। यह चरण 1 अप्रैल से शुरू होगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि अधिकारियों को लोगों से कई तरह की जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है।