
शहडोल/भोपाल। जिले के दक्षिण वन मंडल में अवैध कोयला खनन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची। वन विभाग की इस टीम पर कोयला माफिया ने प्राणघातक हमला किया। इससे प्रदेशभर में सनसनी फैल गई है। डीएफओ, रेंजर और वन कर्मचारियों को निशाना बनाए जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच (वन विभाग) ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम की एसआईटी से उच्च स्तरीय जांच कराने और आरोपियों पर रासुका लगाने की मांग की है। मंच का आरोप है कि कोयला माफिया और स्थानीय तंत्र की कथित मिलीभगत के कारण पहले भी कई हमले हुए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सुरक्षा के लिए प्रभावी नीति नहीं
मंच के अध्यक्ष अशोक पांडे के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में वन कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी नीति नहीं बनी। वर्ष 2025 में 57 प्राणघातक हमले दर्ज हुए। वनकर्मियों का कहना है कि वे जंगल, वन्यजीव और वनभूमि की रक्षा के लिए जान जोखिम में डालते हैं। लेकिन, न आधुनिक सुरक्षा तंत्र उपलब्ध है और न पर्याप्त संसाधन।
मंच ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा और न्याय के लिए सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ी जाएगी।
थाने में डीएफओ 6 घंटे बैठी, एफआईआर नहीं
शहडोल में हुए इस हमले के बाद घायल वन अमला रात 10 बजे सोहागपुर थाने पहुंचा। लेकिन, 22 घंटे बाद तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई। डीएफओ श्रद्धा पन्द्रे करीब 6 घंटे तक थाने में बैठी रहीं। घटना के अनुसार, बड़खेरा गांव के पास 30-40 लोगों ने रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा से मारपीट कर उनकी वर्दी फाड़ दी और डीएफओ को गोली मारने की धमकी दी। कमिश्नर सुरभि गुप्ता और आईजी एन चैत्रा ने जांच के निर्देश दिए, पर ठोस कार्रवाई का अभी इंतजार है। घटना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया, जब एक क्लास-1 महिला अधिकारी सुरक्षित नहीं, तो आम जनता का क्या होगा?