
नई दिल्ली। बिहार चुनावों से जुड़ी एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का समय बर्बाद करने वाली तुच्छ याचिकाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि ये याचिका केवल पब्लिसिटी के लिए हैं। उन्होंने याचिकाकर्ता के इरादों पर सवाल उठाते हुए उनसे पिछले पांच वर्षों का इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) का ब्यौरा मांग लिया है।
जुर्माना लगाया तो कितनी कीमत चुकाएंगे
सुनवाई के दौरान ‘साबू स्टीफन बनाम भारत संघ’ मामले में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत याचिकाकर्ता के तर्कों से असंतुष्ट नजर आए। उन्होंने कहा कि यदि आपने तुच्छ याचिकाएं दायर करने की कला में महारत हासिल कर ली है, तो हमें यह भी पता होना चाहिए कि जुर्माना लगाए जाने पर आप कितनी कीमत चुका सकते हैं। अदालत ने आगे कहा कि इस तरह की याचिकाएं अक्सर केवल बाहर पब्लिसिटी बटोरने के लिए दायर की जाती हैं, न कि किसी वास्तविक सार्वजनिक हित के लिए। पीठ ने कहा कि चुनाव जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में इस तरह का हस्तक्षेप अनावश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश
सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की फाइनेंसियल क्षमता की जांच करने का निर्णय लिया ताकि भविष्य में जुर्माना लगाने की स्थिति में उसकी वसूली सुनिश्चित की जा सके। अपने आदेश में पीठ ने निर्देश दिया कि हम याचिकाकर्ता को पिछले 5 वर्षों का अपना आयकर रिटर्न (आईटीआर) रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश देते हैं।
यह रुख इसलिए अहम
लीगल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो लोकप्रियता हासिल करने या राजनीतिक एजेंडा चलाने के लिए जनहित याचिका (पीआईएल) का दुरुपयोग करते हैं। सीजेआई सूर्यकांत के इस सख्त कदम से यह साफ हो गया है कि भविष्य में बिना किसी ठोस आधार के अदालत का दरवाजा खटखटाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।