
संपादक : विक्रम सेन की रिपोर्ट
चंडीगढ़ / पटियाला। भ्रष्टाचार और न्यायिक प्रभाव के गंभीर आरोपों में निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर पर सीबीआई ने शिकंजा कस दिया है। पूछताछ के बाद एजेंसी ने पटियाला स्थित एक रियल एस्टेट कारोबारी के घर और ऑफिस पर देर रात छापेमारी की। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़, वित्तीय रिकॉर्ड और दो लग्जरी गाड़ियां जब्त की गईं। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने एक व्यक्ति को हिरासत में भी लिया है, हालांकि उसकी पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
देर रात तक चली कार्रवाई
छापेमारी मंगलवार रात दो बजे तक चली। सीबीआई टीम ने कारोबारी के पोलो ग्राउंड के समीप स्थित ऑफिस में भी लगभग दो घंटे तलाशी अभियान चलाया। यहां से वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज़ और कई फाइलें बरामद की गईं।
यह कार्रवाई भुल्लर से पूछताछ के दौरान सामने आए नए सुरागों के आधार पर की गई है।
वित्तीय संबंधों की पड़ताल
सीबीआई को शक है कि निलंबित डीआईजी और उक्त कारोबारी के बीच संपत्ति निवेश और धन हस्तांतरण के गुप्त लेन-देन हुए हैं। एजेंसी अब इन कड़ियों की जांच कर रही है कि कहीं यह अवैध रिश्वत या धन शोधन का हिस्सा तो नहीं।
साथ ही, पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने भी इस प्रकरण में सक्रियता दिखाई है। सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस विभाग मोहाली कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट के लिए आवेदन तैयार कर रहा है, ताकि भुल्लर से राज्य स्तर पर जुड़े मामलों में भी पूछताछ की जा सके।
डीआईजी भुल्लर की रिमांड अवधि पूरी, बढ़ सकती है जांच
भुल्लर का सीबीआई रिमांड बुधवार को समाप्त हो रहा है। एजेंसी उन्हें वीरवार को कोर्ट में पेश कर रिमांड बढ़ाने की मांग कर सकती है, जिससे नए सिरे से मिले साक्ष्यों पर विस्तृत पूछताछ संभव हो सके।
जजों से सांठगांठ की दिशा में जांच
इस केस ने नया मोड़ तब लिया जब सीबीआई को भुल्लर और एक बिचौलिये कृष्णु शारदा के बीच हुई मोबाइल चैट्स में न्यायिक फैसलों पर प्रभाव डालने की बातचीत मिली।
चैट्स से पता चला है कि दोनों कुछ न्यायिक अधिकारियों को विदेश यात्राओं पर ले जाते थे और कोर्ट के आदेशों को प्रभावित करने की साजिश रचते थे।
सीबीआई ने अब इस संबंध में दो न्यायिक अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लिया है। एजेंसी ने भुल्लर और कृष्णु शारदा को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ शुरू की है।
रिश्वतखोरी मामले से शुरू हुई थी कार्रवाई
सीबीआई ने 16 अक्टूबर को भुल्लर और कृष्णु शारदा को मंडी गोबिंदगढ़ के स्क्रैप डीलर आकाश बत्ता की शिकायत पर गिरफ्तार किया था। आरोप था कि दोनों एक आपराधिक केस में फेवर देने के लिए मंथली रिश्वत मांग रहे थे।
सीबीआई ने कृष्णु शारदा को ₹5 लाख की रिश्वत की राशि के साथ रंगे हाथों पकड़ा था।
आगे की कार्रवाई की तैयारी
एजेंसी आने वाले दिनों में अन्य संभावित सहयोगियों और न्यायिक अधिकारियों पर भी कार्रवाई कर सकती है।
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी और जांच भ्रष्टाचार व न्यायिक सांठगांठ के संगठित नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में एक अहम कदम है।
सीबीआई की यह कार्रवाई पंजाब पुलिस और न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता की नई परीक्षा बन गई है। जहां एक ओर यह अभियान सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें खोल रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा करता है कि कितने स्तर तक सत्ता और न्यायिक तंत्र पर प्रभाव डाला जा सकता है।