
भोपाल। मध्यप्रदेश के भाजपा संगठन में लंबे समय से चर्चा में चल रहा प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार अब अंतिम चरण में पहुंच गया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की नई टीम में निगम-मंडल के आगे-पीछे बड़े स्तर पर बदलाव और विस्तार होने की संभावना है। प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्यों के साथ विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति भी होगी।
खास बात यह है कि लंबे समय से जिम्मेदारी से दूर चल रहे कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को फिर से मौका मिल सकता है। साथ ही संगठन में पीढ़ी परिवर्तन की झलक भी साफ दिखेगी, यानी युवा चेहरों को प्रमुखता दी जाएगी। नियुक्तियों से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, संगठन महामंत्री और वरिष्ठ नेताओं की सहमति अनिवार्य होगी। इस बार विंध्य, महाकौशल और बुंदेलखंड अंचल से कई नए-पुराने चेहरों को कार्यकारिणी में जगह मिलने की प्रबल संभावना है।
अप्रैल महीने में बैठक प्रस्तावित
नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा के बाद अप्रैल महीने में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के कार्यकाल की पहली कार्यसमिति बैठक होना प्रस्तावित है। पार्टी कार्यकर्ताओं को सत्ता और संगठन दोनों में नियुक्तियों का लंबे समय से इंतजार है। सत्ता में निगम, मंडल और प्रकोष्ठों में नियुक्ति की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में हैं। इसके कारण भी प्रदेश कार्यसमिति का गठन टलता आ रहा था। प्रदेश पदाधिकारियों के अलावा सभी जिला अध्यक्ष भी प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य होते हैं।
भाजपा में वर्तमान में 65 संगठनात्मक जिले हैं। प्रदेश कार्यसमिति की में 25 सदस्यीय स्थाई आमंत्रित सदस्यों की सूची भी जारी होगी। सूची में पार्टी के प्रदेश के सभी प्रमुख व बड़े नेताओं को शामिल किया जाता है। पूर्व में 23 सदस्यीय स्थाई आमंत्रित सदस्य रहे प्रभात झा व भगवत शरण का निधन हो चुका है। इनके स्थान पर नए नेताओं की एंट्री सूची में होगी।
कार्यसमिति छोटी, लेकिन प्रभावी होगी
भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति इस बार अपेक्षाकृत छोटी, लेकिन प्रभावी होगी। कार्यसमिति में एक तिहाई सदस्य महिलाएं होंगी। 26 प्रदेश पदाधिकारियों के अतिरिक्त इस बार कार्यसमिति में 106 सदस्यों को जगह मिलने का अनुमान है, इस हिसाब से कार्यसमिति में 35 महिला सदस्य होंगी, इनमें 9 महिलाएं अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग की होंगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संकेत दिया है कि नई प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों की सूची तैयार है, जिसकी घोषणा इसी माह चैत्र नवरात्रि के बीच में की जा सकती है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक इस बार प्रदेश कार्यसमिति के गठन में पार्टी संविधान का कड़ाई से पालन किया जाएगा।