
इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई से हुई मौतों के बाद शासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। गुरुवार सुबह नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे अफसरों के दल के साथ भागीरथपुरा पहुंचे और पूरे क्षेत्र का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने कई घरों में नलों से आ रहे पानी की स्वयं जांच की, पानी को हाथ में लेकर सूंघकर देखा और रहवासियों से सीधे बातचीत कर हालात की जानकारी ली।
घटना के बाद आज पहली बार भागीरथपुरा की पानी की टंकी से जल प्रदाय किया गया, जिसे लेकर प्रशासन पूरी तरह चौकस रहा। करीब डेढ़ से दो घंटे तक संजय दुबे निगम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ गलियों में घूमते रहे और स्थिति का जायजा लेते रहे। निरीक्षण के दौरान निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव, अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, सीएमएचओ डॉ माधव हसानी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
रहवासियों ने अफसरों को बताया कि पिछले कई दिनों से नलों में गंदा पानी आ रहा था और इसकी शिकायत पहले भी की गई थीं, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं होने से यह गंभीर हादसा हुआ। अफसरों ने नर्मदा जल की सप्लाई वाली लाइनों की स्थिति देखी और संभावित लीकेज को लेकर जानकारी ली।
पांच बार जांच के बाद सप्लाई
पानी सप्लाई शुरू करने से पहले टंकी और आसपास की लाइनों की पांच बार जांच की गई। नर्मदा प्रोजेक्ट के सहायक यंत्रियों और उपयंत्रियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर पानी की गुणवत्ता परखी, इसके बाद ही जलप्रदाय को हरी झंडी दी गई।
स्वास्थ्य केंद्रों की भी जांच
अपर मुख्य सचिव दुबे ने क्षेत्र के संजीवनी क्लिनिक का निरीक्षण कर पिछले 15 दिनों के मरीजों के रजिस्टर देखे। उन्होंने उल्टी-दस्त से जुड़े मामलों, रेफर किए गए मरीजों और उपचार व्यवस्था की जानकारी ली। साथ ही निगम द्वारा पिछले दो दिनों में किए गए लीकेज सुधार और नई लाइन बिछाने के कार्यों की भी समीक्षा की।
