
नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में भारत के रूस से तेल आयात में कमी पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते थे कि वह भारत के रूसी तेल खरीद से खुश नहीं थे, और इसे “मुझे खुश करने” के लिए किया गया। ट्रम्प ने 4 जनवरी, 2026 को एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में कहा, “वे (भारत) मुझे खुश करना चाहते थे। मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं, अच्छे आदमी हैं। वह जानते थे कि मैं खुश नहीं था, और मुझे खुश करना महत्वपूर्ण था। वे व्यापार करते हैं, और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं।”
यह बयान यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान भारत के रूसी तेल आयात पर अमेरिकी दबाव के संदर्भ में आया है। भारत ने 2025 में रूस से तेल आयात को कुछ हद तक कम किया है, और अब इसे 1 मिलियन बैरल प्रति दिन से नीचे लाने की कोशिश कर रहा है। भारत सरकार ने रिफाइनरियों से रूसी और अमेरिकी तेल आयात की साप्ताहिक रिपोर्ट मांगी है, ताकि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को मजबूत किया जा सके। हालांकि, ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर भारत रूसी तेल आयात नहीं रोकेगा, तो अमेरिका मौजूदा 50% टैरिफ (जिसमें 25% पेनल्टी शामिल है) को और बढ़ा सकता है, जो भारत के लिए हानिकारक होगा। भारत का कहना है कि रूसी तेल आयात उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन अमेरिकी दबाव के कारण आयात में कमी आई है। यह स्थिति वैश्विक तेल बाजार में अमेरिका की बढ़ती भूमिका से जुड़ी है, जहां ट्रम्प वेनेजुएला के तेल पर कब्जे के बाद वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित करने की योजना बना रहे हैं।
ट्रम्प के पास अब सबसे बड़ा ऑयल रिजर्व: क्या बेचेंगे वेनेजुएला का तेल?
ट्रम्प ने 3 जनवरी, 2026 को घोषणा की कि अमेरिका अब वेनेजुएला को “चलाएगा” और उसके तेल रिजर्व का उपयोग करेगा। वेनेजुएला में दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार हैं, लगभग 303 बिलियन बैरल, जो वैश्विक भंडार का 17% है। यह सऊदी अरब, ईरान या कनाडा से भी ज्यादा है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी तेल कंपनियां (जैसे शेवरॉन) अरबों डॉलर निवेश करेंगी, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को ठीक करेंगी और तेल उत्पादन बढ़ाएंगी।
ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को बताया कि अमेरिका वेनेजुएला का तेल अन्य देशों को बेचेगा, जिसमें चीन, रूस और ईरान भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “हम वेनेजुएला के तेल उद्योग को फिर से बनाएंगे, जिसे हमने अमेरिकी प्रतिभा से बनाया था, लेकिन समाजवादी सरकार ने हमसे चुरा लिया।” हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन बढ़ाने में सालों लगेंगे, क्योंकि बुनियादी ढांचा खराब है और दसकों से निवेश की कमी है। वर्तमान में वेनेजुएला का उत्पादन 1 मिलियन बैरल प्रति दिन से कम है, जबकि क्षमता 2.5 मिलियन से ज्यादा थी। ट्रम्प का दावा है कि इससे अमेरिका को आर्थिक लाभ होगा, लेकिन वैश्विक तेल कीमतों पर तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भारत में कब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन वैश्विक कच्चे तेल की गिरावट के बावजूद कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। 5 जनवरी, 2026 को प्रमुख शहरों में कीमतें इस प्रकार हैं:
– दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77/लीटर, डीजल ₹87.67/लीटर
– मुंबई: पेट्रोल ₹103.54/लीटर, डीजल ₹90.03/लीटर
– कोलकाता: पेट्रोल ₹105.41/लीटर, डीजल ₹92.02/लीटर
– चेन्नई: पेट्रोल ₹100.80/लीटर, डीजल ₹92.39/लीटर
1 जनवरी, 2026 को पेट्रोल में मामूली बढ़ोतरी हुई थी (₹103.50 से ₹103.54 तक कुछ शहरों में), लेकिन डीजल स्थिर रहा। पिछले 12 महीनों से कीमतें अपरिवर्तित हैं, मई 2022 से कोई बड़ा बदलाव नहीं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें गिर रही हैं (वर्तमान में $60.40/बैरल), लेकिन भारत में एक्साइज ड्यूटी, आधार मूल्य और अनौपचारिक कैप के कारण कीमतें प्रभावित नहीं हो रही।
वेनेजुएला के तेल उत्पादन बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति बढ़ सकती है, जो लंबे समय में कीमतें कम कर सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह प्रभाव 2026 के अंत या 2027 तक दिखेगा, क्योंकि उत्पादन बहाली में समय लगेगा। भारत में कीमतें ओएमसी (ऑयल मार्केटिंग कंपनियां) द्वारा दैनिक अपडेट होती हैं, लेकिन सरकारी नीतियां भी प्रभावित करती हैं। यदि रूस से आयात और कम होता है या वेनेजुएला से नई आपूर्ति आती है, तो 2026 की दूसरी छमाही में कमी संभव है। फिलहाल कोई निश्चित तारीख नहीं।
₹1,557 लाख करोड़ के तेल पर ट्रम्प का कब्जा!
ट्रम्प ने दावा किया है कि वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹1,557 लाख करोड़ (लगभग $17.3 ट्रिलियन) है। यह मूल्य 303 बिलियन बैरल भंडार पर आधारित है, जो भारी और सल्फर युक्त क्रूड है, जिसे प्रोसेस करने के लिए उन्नत तकनीक चाहिए। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां निवेश करेंगी और तेल निकालेंगी, जिससे अमेरिका और वेनेजुएला दोनों को लाभ होगा।
यह कब्जा निकोलस मदुरो की गिरफ्तारी के बाद हुआ, और ट्रम्प इसे “अमेरिकी संपत्ति की चोरी” का बदला मानते हैं। वैश्विक स्तर पर यह अमेरिका की ऊर्जा नीति को मजबूत करेगा, लेकिन कानूनी और बुनियादी चुनौतियां हैं। भारत के लिए, यह रूस पर निर्भरता कम करने और नई आपूर्ति स्रोतों का अवसर दे सकता है, जो अंततः ईंधन कीमतों को प्रभावित करेगा।
ये सभी घटनाएं वैश्विक तेल बाजार में अमेरिका की बढ़ती भूमिका दिखाती हैं, जहां भारत जैसे देशों को व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा संतुलित करनी होगी।