
विक्रम सेन
नई दिल्ली। सीबीआई ने सत्यपाल मलिक समेत 6 अन्य लोगों के खिलाफ एक भ्रष्टाचार के मामले में चार्जशीट दाखिल की है. ये मामला 2200 करोड़ रुपए की लागत वाले किरू जलविद्युत परियोजना के सिविल वर्क्स के ठेकों में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है.
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, परियोजना से संबंधित टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और जानबूझकर कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप है. यह प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर में विकास के लिहाज़ से अहम माना जाता है.
इसी कथित भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई ने इस साल जनवरी में पांच लोगों के ठिकानों पर भी तलाशी ली थी.
इससे पहले फरवरी 2024 में
सीबीआई ने जम्मू, श्रीनगर, दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई, बागपत, नोएडा, पटना, जयपुर, जोधपुर, बाड़मेर, नागपुर और चंडीगढ़ में छापेमारी की थी.
सीबीआई ने चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (CVPPPL) के पूर्व चेयरमैन नवीन कुमार चौधरी और पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड के अधिकारियों के ठिकानों पर भी छापा मारा था.
पिछले साल मई में भी सीबीआई ने मलिक के मीडिया एडवाइजर रहे सुनक बाली के घर पर छापेमारी की थी.
इस छापेमारी के बाद सीबीआई ने दावा किया है कि छापेमारी के दौरान कैश डिपॉजिट, एफडी में निवेश, अलग-अलग शहरों में प्रॉपर्टी में निवेश के साथ-साथ डिजिटल और डॉक्यूमेंट्री एविडेंस बरामद किए गए हैं.
ये प्रोजेक्ट क्या है?
इस प्रोजेक्ट को चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड (CVPPPL) नाम की कंपनी बना रही है. इस कंपनी में केंद्र सरकार की नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHPC) की 51% और जम्मू-कश्मीर की जम्मू-कश्मीर पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (JKSPDC) की 49% हिस्सेदारी है.
ये प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर बन रहा है. ये एक रन ऑफ रिवर प्रोजेक्ट है. यानी, नदी के पानी के बहाव की ऊर्जा का इस्तेमाल कर बिजली पैदा की जाएगी.
इसके तहत, चिनाब नदी पर एक बांध बनाया जा रहा है जिसकी ऊंचाई 135 मीटर है. चार पावरहाउस होंगे और हर एक से 156 मेगावॉट की बिजली पैदा की जाएगी. यानी, कुल मिलाकर 624 मेगावॉट बिजली.
इसका शिलान्यास फरवरी 2019 में किया गया था. इस प्रोजेक्ट की लागत 4,287 करोड़ रुपये है. 2025 तक इसे पूरा करने का टारगेट है.
करप्शन का क्या है मामला?
ये पूरा मामला टेंडर से जुड़ा हुआ है. 2019 में इस प्रोजेक्ट से जुड़े सिविल वर्क का कॉन्ट्रैक्ट पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड को दिया गया. ये कॉन्ट्रैक्ट 2,200 करोड़ रुपये का था.
दर्ज एफआईआर में आरोप है कि 2,200 करोड़ रुपये का ये टेंडर जारी करते वक्त गाइडलाइंस का पालन नहीं किया गया.
CVPPPL की 47वीं बोर्ड मीटिंग में इस टेंडर को रद्द करने का फैसला लिया गया. लेकिन अगली ही मीटिंग में ये टेंडर फिर से पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड को दे दिया गया.
सत्यपाल मलिक कैसे फंसे?
सत्यपाल मलिक 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे थे. मलिक ने दावा किया था कि उन्हें दो फाइलें क्लियर करने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी. इनमें से एक फाइल कीरू प्रोजेक्ट से जुड़ी थी.
सत्यपाल मलिक ने जब रिश्वत का ऑफर मिलने का दावा किया था, तब वो मेघालय के राज्यपाल थे. उनके दावे के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सीबीआई से इस प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार की जांच करने की मांग की थी.
सीबीआई की चार्ज शीट में नाम आने के बाद सत्यपाल मलिक ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘मेरे बहुत से शुभचिंतकों के फ़ोन आ रहे हैं जिन्हें उठाने में मैं असमर्थ हूं. अभी मेरी हालत बहुत खराब है. मैं किसी से भी बात करने की हालत में नहीं हूं. 11 मई से राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती हूं. संक्रमण की शिकायत के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया था. अब स्थिति बहुत गंभीर है और पिछले तीन दिनों से किडनी डायलिसिस की जा रही है.’
राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती सत्यपाल मलिक ने एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, ‘मेरे बहुत से शुभचिंतकों के फ़ोन आ रहे हैं जिन्हें उठाने में मैं असमर्थ हूं.अभी मेरी हालत बहुत खराब है. मैं किसी से भी बात करने की हालत में नहीं हूं. ‘
बता दें कि इससे पहले गुरुवार की पुनः छापेमारी पर मलिक ने एक्स पर लिखा था, ‘मैं 3-4 दिन से बीमार हूं और अस्पताल में भर्ती हूं. इसके बावजूद तानशाह सरकारी एजेंसियों के माध्यम से मेरे घर पर रेड डलवा रहे हैं. मेरे ड्राइवर और असिस्टेंट के घर भी छापा मारा गया और जबरन परेशान किया गया. मैं किसान का बेटा हूं. मैं इन सबसे नहीं डरूंगा. मैं किसानों के साथ हूं.’
उन्होंने कहा कि ‘जो लोग भ्रष्टाचार में शामिल हैं, उनकी जांच करने की बजाय मेरे घर पर छापा मारा गया. उन्होंने 4-5 कुर्ता-पायजामा के अलावा और कुछ नहीं मिलेगा. तानाशाह मुझे डराने की कोशिश कर रहा है. मैं न ही डरूंगा और न ही झुकूंगा.