
नई दिल्ली। बिहार के नवादा जिले के एक छोटे से गांव महुली से निकलकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था। लेकिन, जब इरादे फौलादी हों और साथ में मां का आशीर्वाद हो, तो दुनिया की कोई भी बाधा छोटी पड़ जाती है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद रविराज ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 20वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया।
संघर्ष की अनोखी जुगलबंदी, मां पढ़ती थी, बेटा गढ़ता था
रविराज की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे एक भावुक कर देने वाली तपस्या छिपी है। उनकी सफलता की असली सूत्रधार उनकी मां, विभा सिन्हा हैं।
– श्रवण शक्ति का सहारा : रविराज देख नहीं सकते थे, इसलिए उनकी मां घंटों बैठकर उन्हें किताबें पढ़कर सुनाती थीं।
– लिपि बनी ममता : मां न सिर्फ पढ़ती थीं, बल्कि बेटे के लिए जरूरी नोट्स भी खुद अपने हाथों से तैयार करती थीं।
– अद्भुत स्मृति : मां की आवाज को रविराज ने अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया और सुनकर ही पूरे पाठ्यक्रम को कंठस्थ कर लिया।
राजस्व अधिकारी से IAS की दहलीज तक
यह रविराज की पहली सफलता नहीं है। वे पहले भी साबित कर चुके हैं कि प्रतिभा किसी बाधा की मोहताज नहीं होती। रविराज ने बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और राजस्व अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे थे। वे अपने जिले के टॉपर रहे थे। यूपीएससी 2024 में उन्होंने 182वीं रैंक हासिल की थी। लेकिन, उनका लक्ष्य और ऊंचा था। अपनी कमियों को सुधारते हुए इस बार उन्होंने सीधे टॉप 20 में जगह बनाकर सबको हैरान कर दिया।
सफलता का गणित, 10 घंटे की तपस्या
एक किसान परिवार से आने वाले रविराज ने साबित किया कि संसाधन नहीं, समर्पण मायने रखता है। उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान के बजाय घर पर रहकर ही तैयारी की। रोजाना 8 से 10 घंटे की कड़ी मेहनत उनके जीवन का हिस्सा रही। उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातक किया और इसी विषय की गहराई ने उन्हें यूपीएससी में मदद की। रविराज के पिता रंजन कुमार सिन्हा कहते हैं ‘बेटे की लगन और परिश्रम ने आज पूरे परिवार का सपना साकार कर दिया है। यह जीत उन सभी के लिए है जो मुश्किलों के आगे घुटने टेक देते हैं।’
नवादा में जश्न का माहौल
नवादा के नवीन नगर में फिलहाल रविराज किराए के मकान में रहकर अपनी तैयारी को मुकाम दे रहे थे। जैसे ही उनकी 20वीं रैंक की खबर आई, पूरे नवादा जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके से पहली बार किसी ने यूपीएससी में इतनी ऊंची रैंक हासिल की है।
