
नई दिल्ली / इंदौर। शहर की पुलिस किस तरह काम कर रही है, ये बात सुप्रीम कोर्ट में भी उजागर हो गई। इंदौर पुलिस की इस बड़ी करतूत में एक साल में दर्ज 165 केसों में दो ही लोगों को गवाह बनाया गया। यह सच्चाई सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानतुल्लाह ने थाना प्रभारी (टीआई) इंद्रमणि पटेल को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि तुम दुर्भाग्य से उस कुर्सी पर बैठे हो, तुम्हें वहां नहीं होना चाहिए। यह हमारी आत्मा की पीड़ा है।’ सिर झुकाए खड़े टीआई पर तल्ख टिप्पणियों से पूरा कोर्ट रूम सन्न रह गया।
यह मामला तब सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट में इंदौर के चंदूवाला रोड़ (चंदन नगर) निवासी अनवर हुसैन की याचिका पर सुनवाई चल रही थी। टीआई ने इस प्रकरण में भी गलत जानकारी दी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान उपस्थित हुए कानून के छात्र असद अली वारसी ने टीआई की ‘गवाह फैक्ट्री’ की असलियत सामने ला दी। सुप्रीम कोर्ट को असद के वकील ने बताया कि टीआई बेगुनाहों को फंसाने के लिए फर्जी मुकदमे लादते हैं। असद अली ने 23 अक्टूबर 2023 से 23 अक्टूबर 2024 में दर्ज किए गए 165 आपराधिक मुकदमों की सूची दी, जिसमें सलमान कुरैशी और आमिर रंगरेज को गवाह बनाया गया। इनका नाम हर केस में गवाह के रूप में दर्ज किया गया।
साथ होते हैं क्या दोनों गवाह
थाने में फर्जी मामलों का ऐसा तरीका देखकर न्यायमूर्ति ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। इससे कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया और टीआई ने माफ़ी मांगते हुए अपना सिर झुका लिया। न्यायमूर्ति ने कहा कि क्या ये दोनों गवाह 24 घंटे आपके साथ ही रहते हैं! क्या इनकी थाने के सामने दुकान है! ऐसा लगता है कि मौका-ए-वारदात पर ये दोनों बैठे रहते हैं। आप किसी की जिंदगी से खेल रहे हैं। ऐसे लोग बदकिस्मती से उस पोजिशन पर हैं, जहां उन्हें नहीं होना चाहिए। एक पुलिस वाला लोगों की सुरक्षा के लिए होता है, जबकि आप ऐसा काम कर रहे हैं। ऐसे सिर झुकाने से कुछ नहीं होगा। शरीफ बनने से कोई फायदा नहीं, लोग आपका आतंक समझते हैं।
ऐसे हैं ये दर्ज मामले
वकील ने सुप्रीम कोर्ट में अपराध क्रमांक, धारा, कायमीकर्ता और थाना प्रभारी की सूची सौंपी। दर्ज प्रकरण में प्रधान आरक्षक से लेकर एसआई (कायमीकर्ता) तक का नाम दर्ज है। ये शराब तस्करी, हथियार जब्ती, रासुका और जुआ खेलने जैसे मामले हैं, जिनमें सलमान पिता जुल्फिकार कुरैशी, निवासी नाला पार, चंदननगर और आमिर पिता उस्मान रंगरेज, निवासी आमवाला रोड़, चंदन नगर का नाम गवाह के रूप में दर्ज है। इनमें कई मामले ऐसे हैं, जिनमें गवाह के रूप में दोनों के नाम हैं। कुछ मामलों में कुछ अलग नाम भी लिखे गए। अब सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद जोन-4 के डीसीपी आनंद कलादगी मामले को देख रहे हैं।