
लखनऊ। भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने सेंट्रल जीएसटी (CGST) झांसी की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी और उनके सहयोगियों को 70 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई करीब आठ दिन की सुनियोजित निगरानी और जाल बिछाने के बाद अंजाम दी गई, जिससे पूरे जीएसटी विभाग में हड़कंप मच गया है।
डेढ़ करोड़ की डील, 70 लाख की पहली किस्त
सीबीआई लखनऊ एंटी करप्शन ब्रांच को शिकायत मिली थी कि करोड़ों रुपये की कर चोरी के मामले में एक हार्डवेयर कारोबारी को राहत देने के बदले डेढ़ करोड़ रुपये की डील तय की गई है। इसी सौदे के तहत 70 लाख रुपये बतौर पहली किस्त ली जा रही थी। शिकायत के सत्यापन के बाद सीबीआई ने बेहद गोपनीय तरीके से जाल बिछाया और जैसे ही रकम का लेन-देन हुआ, टीम ने कार्रवाई कर दी।
एक कॉल जिसने खेल बिगाड़ दिया
इस पूरी साजिश का पर्दाफाश एक कॉल रिकॉर्डिंग के जरिए हुआ। दरअसल, सीबीआई पिछले काफी समय से इस सिंडिकेट पर नजर रख रही थी। एक फर्म मालिक से टैक्स चोरी और केस रफा-दफा करने के एवज में 1.5 करोड़ रुपये की डिमांड की गई थी. डील के मुताबिक, पहली किश्त के रूप में 70 लाख रुपये पहुंचाए जाने थे।
सीबीआई द्वारा जाल बिछाए जाने के दौरान, एक सुपरिटेंडेंट ने प्रभा भंडारी को फोन किया और कहा, ‘मैडम, पैसा मिल गया है।’ इस पर डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी का जवाब बेहद चौंकाने वाला था। उन्होंने निर्देश दिया, ‘ठीक है, इसे अभी गोल्ड (सोने) में बदल दो और फिर मुझे दे देना।’ उन्हें लगा कि कैश के मुकाबले सोने को ठिकाने लगाना और छिपाना आसान होगा, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि सीबीआई की टीम उनकी हर बात को रिकॉर्ड कर रही है। जैसे ही रिश्वत की रकम सोने में तब्दील करने की कोशिश हुई, सीबीआई ने दबिश देकर सबको दबोच लिया।
पूरी बातचीत रिकॉर्ड हो गई, जिससे रिश्वत लेने का एक सामान्य मामला निर्णायक सबूत में बदल गया। सीबीआई का कहना है कि उस कॉल के साथ ही कथित साजिश का पर्दाफाश हो गया।
जिस समय फोन किया गया, प्रभा भंडारी दिल्ली में थीं। सीबीआई की एक टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें वहीं गिरफ्तार कर लिया, वहीं दूसरी ओर एक अन्य टीम ने बुधवार देर रात झांसी स्थित उनके बंद फ्लैट का ताला तोड़कर लगभग चार घंटे तक तलाशी ली। छापेमारी में नकदी, सोना, आभूषण और संपत्ति संबंधी दस्तावेज बरामद हुए, जिससे एजेंसी का मामला और मजबूत हो गया। अधिकारियों ने पुष्टि की कि भंडारी के पति सेना में कर्नल हैं।
यह मामला 19 दिसंबर का है, जब भंडारी के नेतृत्व में केंद्रीय जीएसटी टीम ने कथित कर अनियमितताओं के आरोप में झांसी के झोकेन बाग स्थित जय दुर्गा हार्डवेयर पर छापा मारा था। अधिकारियों ने संकेत दिया कि कंपनी के खिलाफ लगभग 13 करोड़ रुपये का कर बकाया हो सकता है और दस्तावेजों से भरी कई बोरियां जब्त की गईं।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि इसके तुरंत बाद, 1.5 करोड़ रुपये के भुगतान के बदले एक गुप्त समझौता पेश किया गया और मामले को “सुलझाने” का वादा किया गया। आरोप है कि फर्म के मालिक राजू मंगतानी के साथ वकील नरेश कुमार गुप्ता के माध्यम से बातचीत हुई। आरोपियों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि सीबीआई पहले से ही उन पर नजर रख रही थी।
दो जीएसटी अधीक्षकों के अलावा, सीबीआई ने राजू मंगतानी और अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है। आगे की तलाशी में 90 लाख रुपये और बरामद हुए , जिससे कुल जब्त की गई राशि 1.6 करोड़ रुपये हो गई है। इसके साथ ही सोना, चांदी और संपत्ति के कागजात भी बरामद हुए हैं। सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है और कहा है कि व्यापक संलिप्तताओं और अन्य अधिकारियों की भूमिका का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
दिल्ली से डिप्टी कमिश्नर गिरफ्तार
सीबीआई के अनुसार, डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को दिल्ली स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया, जबकि अन्य चार आरोपियों को झांसी से पकड़ा गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में;
अधीक्षक अनिल तिवारी
अधीक्षक अजय कुमार शर्मा
जीएसटी मामलों में सक्रिय अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता
जय दुर्गा हार्डवेयर के प्रोपराइटर राजू मंगनानी
शामिल हैं।
सभी आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर Lucknow लाया जा रहा है, जहां गुरुवार को उन्हें विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा।
अधिवक्ता था पूरे खेल का सूत्रधार
सूत्रों के मुताबिक, करीब आठ दिन पहले जय दुर्गा हार्डवेयर पर सेंट्रल जीएसटी टीम का छापा पड़ा था। उसी कार्रवाई को कमजोर करने और मामले को ‘सेटल’ कराने के लिए रिश्वत की मांग की गई।
इस पूरे सौदेबाजी का मुख्य सूत्रधार जीएसटी मामलों का अधिवक्ता बताया जा रहा है, जो अफसरों और व्यापारी के बीच संपर्क कड़ी बना हुआ था। जब सीबीआई ने व्यापारी और अधिवक्ता को दबोचा, तो भागने की कोशिश में व्यापारी को चोट भी आई है।
सुबह-सुबह कई ठिकानों पर छापे
बुधवार तड़के सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने झांसी में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।
सीपरी बाजार, नमो होम्स डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी
सेवाराम मिल कंपाउंड अधीक्षक अनिल तिवारी और अजय कुमार शर्मा
आरएनएस वर्ल्ड स्कूल के पास हार्डवेयर कारोबारी राजू मंगनानी
इलाहाबाद बैंक तिराहा क्षेत्र – अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता
बिना स्थानीय मदद के रची गई सटीक कार्रवाई
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि स्थानीय इनपुट पहले ही जुटा लिए गए थे, लेकिन कार्रवाई के दौरान किसी भी स्थानीय अधिकारी या कर्मचारी को शामिल नहीं किया गया, ताकि सूचना लीक न हो। इसी रणनीति के कारण पूरा रिश्वतखोरी नेटवर्क एक साथ बेनकाब हो सका।
भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार
यह कार्रवाई न केवल जीएसटी विभाग में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि कर चोरी के मामलों में ‘सेटिंग’ के सहारे राहत दिलाने का खेल अब आसान नहीं रहा। सीबीआई की इस कार्रवाई को कर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
