
विक्रम सेन | संपादकीय
भूमिका : युद्ध के साए में प्रवेश करता 2026
वर्ष 2026 की शुरुआत ही यह संकेत दे चुकी है कि दुनिया एक अस्थिर, बहुध्रुवीय और टकरावपूर्ण दौर में प्रवेश कर चुकी है। महाशक्तियों के बीच शक्ति-संतुलन अब कूटनीति से अधिक सैन्य दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और प्रत्यक्ष कार्रवाई के जरिए साधा जा रहा है।
3 जनवरी से 4 जनवरी 2026 के मात्र 24 घंटों में घटित घटनाएँ इस बदलती वैश्विक वास्तविकता का संक्षिप्त लेकिन तीव्र प्रतिबिंब हैं।
1. अमेरिका–वेनेजुएला टकराव : “नार्को-स्टेट” से सत्ता परिवर्तन तक
क्या हुआ?
3 जनवरी 2026 की तड़के, संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास और आसपास के रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए।
अमेरिकी विशेष बलों ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क पहुँचाया।
क्यों?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “नार्को-टेररिज्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई” बताया।
आरोप है कि मादुरो शासन ने ड्रग गिरोहों को संरक्षण देकर अमेरिकी समाज को अस्थिर किया।
यहां के उत्तेजित भू-राजनीतिक हालात दर्शाते हैं कि यह कार्रवाई केवल कानून-प्रवर्तन नहीं, बल्कि तेल-राजनीति, चीन के प्रभाव को सीमित करने और लैटिन अमेरिका में शक्ति पुनर्संतुलन का प्रयास भी प्रतीत होती है।
रूस और चीन ने इसे संप्रभुता का घोर उल्लंघन करार दिया है।
2. उत्तर कोरिया की मिसाइलें : वार्ता से पहले दबाव की रणनीति
क्या हुआ?
4 जनवरी 2026 की सुबह उत्तर कोरिया ने जापान सागर की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनकी रेंज लगभग 900 किमी थी।
क्यों?
यह प्रक्षेपण दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की चीन यात्रा से ठीक पहले हुआ।
उत्तर कोरिया इसे अमेरिका–दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यासों के जवाब और “रणनीतिक चेतावनी” के रूप में देखता है।
माना जा सकता हैं कि यह मिसाइलें भले समुद्र में गिरी हों, लेकिन यह परमाणु ब्लैकमेल कूटनीति का स्पष्ट उदाहरण है पहले डर, फिर बातचीत।
3. यूक्रेन पर रूस की निरंतर आक्रामकता : थकाऊ युद्ध का नया चरण
क्या हुआ?
पिछले 24 घंटों में रूस ने यूक्रेन के कई क्षेत्रों पर 500 से अधिक ड्रोन और आर्टिलरी हमले किए।
क्यों?
रूस इसे NATO विस्तार के खिलाफ “सुरक्षात्मक विशेष सैन्य अभियान” कहता है।
विश्लेषण
यह युद्ध अब संसाधन-क्षय (war of attrition) की अवस्था में है।
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई कार्रवाई, रूस को अपनी आक्रामक नीति को वैचारिक समर्थन देने का नया अवसर देती है।
4. सीरिया में ISIS पर ब्रिटेन–फ्रांस का हमला : सीमित लेकिन प्रतीकात्मक
क्या हुआ?
ब्रिटेन और फ्रांस के लड़ाकू विमानों ने सीरिया में ISIS के एक भूमिगत हथियार डिपो को नष्ट किया।
बहरहाल यह परिदृश्य बताता है कि;
यह आतंकवाद विरोधी कार्रवाई है, किंतु पश्चिमी शक्तियों की “चयनात्मक संप्रभुता नीति” की आलोचना को भी बल देती है।
समग्र भू-राजनीतिक निष्कर्ष : क्या 2026 ‘युद्ध का वर्ष’ बनेगा?
इन 24 घंटों की घटनाएँ स्पष्ट करती हैं कि
अमेरिका प्रत्यक्ष हस्तक्षेप से नहीं हिचक रहा
रूस लंबा युद्ध झेलने को तैयार है
उत्तर कोरिया परमाणु दबाव की राजनीति पर कायम है
पश्चिमी गठबंधन सीमित लेकिन निर्णायक सैन्य कार्रवाइयों में विश्वास रखता है
इसका परिणाम हो सकता है;
नए सैन्य गठबंधन
ऊर्जा और खाद्य संकट
वैश्विक बाजारों में अस्थिरता
भारत जैसे देशों के लिए यह समय संतुलित कूटनीति, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता को और मजबूत करने का है।
यदि संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो इतिहास 2026 को “संघर्षों के त्वरण का वर्ष” कह सकता है।
विश्व शांति का भविष्य अब कूटनीति की दृढ़ता पर निर्भर है, युद्ध की नहीं।
