विक्रम सेन
नई दिल्ली : लोकसभा ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 लंबी और गरमा गरम चर्चा के बाद पारित हो गया। इस विधेयक के पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े।
बिल को केंद्र की सरकार में शामिल TDP, JDU और LJP ने समर्थन दिया।
कोल्लम के सांसद एन. के. प्रेमचंद्रन द्वारा प्रस्तावित संशोधन को सदन में पढ़कर सुनाया गया, इस पर आधी रात तक लगभग 12 घंटे तक चर्चा हुई। जिस पर पहले ध्वनिमत से मतदान हुआ। हालांकि, स्पीकर ने इसके बाद विभाजन मतदान कराने का निर्णय लिया।
पश्चात लोकसभा में इलेक्ट्रॉनिक ऑटोमैटिक वोट रिकॉर्डिंग सिस्टम के जरिए इस संशोधन पर मतदान हुआ।
गौरतलब है कि लोकसभा में संख्याबल के हिसाब से एनडीए की स्थिति मजबूत है, जिसके पास 293 सांसद हैं, जबकि बिल पास करने के लिए सिर्फ 272 वोटों की जरूरत थी।
हालांकि इससे पहले इस विधेयक में अलग-अलग संशोधन पर ध्वनिमत से वोटिंग हुई। गौरव गोगोई, इमरान मसूद, केसी वेणुगोपाल, ओवैसी समेत तमाम सांसदों के संशोधन पर वोट डाले गए और ये संशोधन खारिज हो गए।
गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान तथ्यों के साथ जमकर अपनी बात रखी जबकि विपक्ष ने इस विधेयक में संशोधन हेतु अपने तथ्य रखते हुए सरकार को घेरा तथा उसकी मंशा पर लगातार सवाल उठाए।
विपक्ष ने इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया। बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। विपक्षी दलों ने बिल के प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए इसे जल्दबाजी में लाया गया कानून बताया, जबकि सरकार ने कहा कि यह कदम वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और न्यायसंगत व्यवस्था बनाने के लिए जरूरी है।
बिल पेश करते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि “पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने वक्फ कानून में बदलावों के जरिए इसे अन्य कानूनों से ऊपर कर दिया था, इसलिए इसमें नए संशोधनों की जरूरत पड़ी।”
किरेन रिजिजू ने कहा कि “जेपीसी को भौतिक और ऑनलाइन प्रारूपों के माध्यम से 97.27 लाख से अधिक याचिकाएं, ज्ञापन प्राप्त हुए और जेपीसी ने अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले उनमें से प्रत्येक का अध्ययन किया। मंत्री ने कहा कि 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों के अलावा 284 प्रतिनिधिमंडलों ने बिल पर अपने विचार प्रस्तुत किए।” उन्होंने कहा कि “कानूनविदों, धर्मार्थ संगठनों, शिक्षाविदों और धार्मिक नेताओं सहित अन्य ने भी अपनी राय प्रस्तुत की है।”
वक्फ बिल पर बहस के दौरान रिजिजू ने कानून की सीमा के मुद्दे पर राम लला का उदाहरण दिया और स्पष्ट किया कि “सरकार की मंशा किसी समुदाय के अधिकारों को कम करने की नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार की है।”
उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की पहले की गई बातों को दोहराते हुए कहा कि “वक्फ और वक्फ बोर्ड में अंतर को समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि यह धारणा कि गैर-मुसलमान वक्फ बोर्ड के मामलों में दखल देंगे, पूरी तरह गलत है।”
किरेन रिजिजू ने कहा कि “कुछ नेता लोकतंत्र के खत्म होने जैसी बातें कर रहे हैं, लेकिन सांसदों को ऐसे शब्दों का हल्के में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।”
रिजिजू ने साफ किया कि “सरकार ने पारदर्शिता और न्यायसंगत प्रशासन के लिए यह संशोधन लाया है और इसमें संविधान के खिलाफ कुछ भी नहीं है।”
उन्होंने कहा कि “कुछ लोग इस बिल को असंवैधानिक बता रहे हैं, लेकिन वे इसके पीछे कोई ठोस कारण नहीं दे पा रहे।” रिजिजू ने तंज कसते हुए कहा, “अगर ये बिल असंवैधानिक होता, तो अब तक किसी अदालत ने इसे खारिज क्यों नहीं किया?”
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ बिल पर बहस के दौरान कहा, “इस बिल का असली मकसद मुसलमानों को जलील करना है। सरकार हमारे वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा जमाना चाहती है और हमारे धार्मिक अधिकार छीनना चाहती है। यह संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करता है।” अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने सदन में कहा कि मैं इस बिल को फाड़ता हूं।
संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने असदुद्दीन ओवैसी द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को फाड़ने की बात को असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि ओवैसी इस बिल को असंवैधानिक बता रहे हैं, लेकिन असली असंवैधानिक हरकत तो उन्होंने खुद की है। पाल ने लोकसभा में कहा कि संसद में इस तरह से विधेयक को फाड़ना लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का अपमान है और यह संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ है।
जगदंबिका पाल ने कहा कि यदि बीजेपी चाहती तो इस विधेयक को सीधे संसद में पास करा सकती थी, लेकिन सरकार ने इसे जेपीसी को भेजने का फैसला किया ताकि अन्य दलों के साथ विस्तृत चर्चा हो सके। उन्होंने कहा कि यह सरकार की लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता को दिखाता है कि उसने बिना किसी जल्दबाजी के इस विषय पर व्यापक विमर्श किया।
राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने और उनके निजी कानूनों और संपत्ति के अधिकारों को हड़पने के उद्देश्य से बनाया गया एक हथियार है। आरएसएस, भाजपा और उनके सहयोगियों द्वारा संविधान पर यह हमला आज मुसलमानों पर लक्षित है, लेकिन भविष्य में अन्य समुदायों को निशाना बनाने के लिए एक मिसाल कायम करता है। कांग्रेस पार्टी इस कानून का कड़ा विरोध करती है क्योंकि यह भारत के मूल विचार पर हमला करता है और अनुच्छेद 25, धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
संसद में वक्फ बिल पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी पूरी मजबूती के साथ इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा, “मैं अपने मंत्री साथी द्वारा पेश किए गए बिल का समर्थन करता हूं। मैं दोपहर 12 बजे से चल रही चर्चा को ध्यान से सुन रहा हूं… मुझे लगता है कि कई सदस्यों के मन में या तो वास्तविक रूप से या फिर राजनीतिक कारणों से कई गलतफहमियां हैं।”
संसद में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान बोलते हुए गृहमंत्री ने कहा, “अब वक्फ संपत्ति घोषित करने का अधिकार समाप्त कर दिया गया है और इसे कलेक्टर से प्रमाणित कराना अनिवार्य होगा।” उन्होंने कहा, “देश में कई मुस्लिम समुदाय के लोग वक्फ के दायरे में नहीं आना चाहते, उनके लिए भी समाधान दिया गया है।” उन्होंने बताया कि “अब कोई भी मुस्लिम अपना ट्रस्ट रजिस्टर कर सकता है और वक्फ भूमि का पूरा रिकॉर्ड रखने के लिए एक पृथक कार्यालय बनाया जाएगा।”
गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान बोलते हुए कहा, “इस बिल के जरिए हम संपत्तियों को सुरक्षा देने का काम कर रहे हैं।” उन्होंने साफ किया कि अब किसी भी जमीन को सिर्फ घोषणा मात्र से वक्फ संपत्ति नहीं बनाया जा सकता। इस कानून के तहत पुरातत्व विभाग, आदिवासी समुदायों और आम नागरिकों की संपत्तियों को सुरक्षित किया जाएगा।
गृहमंत्री अमित शाह ने चर्चा के दौरान कहा कि यह सरकार वक्फ के धार्मिक मामलों में कोई दखल नहीं देना चाहती। उन्होंने साफ किया कि वक्फ बोर्ड की लाखों करोड़ों की संपत्तियों और उनकी 126 करोड़ रुपये की वार्षिक आय को पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि वे पारदर्शिता से क्यों डर रहे हैं?
गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान बोलते हुए कहा, मणिपट्टी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 1.38 लाख एकड़ जमीन को किराए पर दिया गया, सैकड़ों एकड़ भूमि सौ साल की लीज पर निजी संस्थानों को सौंप दी गई, विजयपुर गांव की 1500 एकड़ भूमि पर विवाद खड़ा किया गया और फाइव-स्टार होटल को मात्र 12,000 रुपये महीने के किराए पर दे दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यह पैसा गरीब मुसलमानों का है, फिर इसे धन्नासेठों की जेब में क्यों जाने दिया जा रहा है?
बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह ने अपने जवाब की शुरुआत में वक्फ के मतलब और उसके इतिहास को संसद में समझाया और कहा कि वक्फ एक अरबी शब्द है, जिसका जिक्र कुछ हदीसों में मिलता है। उन्होंने बताया कि वक्फ का मतलब किसी संपत्ति को अल्लाह के नाम पर दान करना होता है और इसका प्रचलन इस्लाम के दूसरे खलीफा उमर के समय शुरू हुआ था।
संसद में मदनी वक्फ संशोधन बिल पेश किए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असअद मदनी ने कहा कि संसद में पेश किया गया वक्फ से संबंधित यह बिल असंवैधानिक है और मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है। सरकार अपनी संख्यात्मक बहुमत के बल पर इसे पारित कराने की कोशिश कर रही है। यह रवैया बहुसंख्यकवादी मानसिकता पर आधारित है और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। इस बिल को जबरन संसद में लाया गया है, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों के अधिकारों को छीनना है, जो किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। जिस तरह से यह बिल तैयार किया गया है और जिस मंशा व रवैये के साथ इसे पेश किया जा रहा है, वह मुसलमानों के खिलाफ एक नकारात्मक रुख को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “हम पहले ही कह चुके हैं कि पुराने कानून में सुधार की जरूरत थी, लेकिन इसके बजाय सरकार ने ऐसी संशोधन पेश किए हैं, जो समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें और जटिल बना रहे हैं। अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य के रूप में, मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि यह बिल पूरी तरह अस्वीकार्य है और हम इसे पूरी तरह खारिज करते हैं। इसके खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी और हम हर संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से इस अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे।”
वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यह बिल करोड़ों लोगों से मकान-दुकान छीनने की साजिश है। इस दौरान उन्होंने बिल पेश करने वाले मंत्री किरेन रिजिजू से पूछा कि “वक्फ की जमीन से जरूरी हमारी वो जमीन है, जिस पर चीन ने अपने कई गांव बसा लिए हैं। रिजिजू अरुणाचल प्रदेश से आते हैं।”
अखिलेश यादव ने आगे कहा “यह विधेयक सुधारों के लिए नहीं, बल्कि इस शासन की कमियों और विफलताओं को छिपाने के लिए लाया गया है”
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ बिल पर विपक्ष के लगाए आरोपों पर बहस में हिस्सा लेते हुए कहा, “कुछ लोग दावा करते हैं कि सरकार मस्जिद और दरगाह छीन लेगी – ये वही लोग थे जिन्होंने दावा किया था कि सीएए से मुसलमानों की नागरिकता छिन जाएगी? क्या ऐसा हुआ है? क्या आप लोगों को गुमराह करने के लिए माफी मांगेंगे? जब हम नियम या अधीनस्थ कानून बनाएंगे तो हम आपके सुझावों का स्वागत करेंगे। हमने परिभाषा बदली है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मुसलमान वक्फ बोर्ड या ट्रस्ट के माध्यम से अपनी संपत्तियों को नियंत्रित कर सकें। हम धर्म के आधार पर सांसद नहीं बने हैं। हम अपने निर्वाचन क्षेत्र के सभी लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। फिर हम कैसे पूछ सकते हैं कि इसमें गैर-मुस्लिमों को कैसे शामिल किया जा रहा है? क्योंकि यह सिर्फ संपत्ति प्रबंधन है; यह धर्म के बारे में नहीं है। इसके तहत, कोई व्यक्ति केवल अपने पूर्ण स्वामित्व वाली संपत्ति पर ही वक्फ बना सकता है। कोई भी परिवार की महिलाओं और बच्चों को वक्फ बनाने के उनके अधिकार से वंचित नहीं कर सकता है।”
किरेन रिजिजू ने आगे कहा, “इस विधेयक में कुछ विसंगतियां थीं, इसलिए इसमें संशोधन करना जरूरी था। मैंने पहले भी कहा था कि कोई भी भारतीय वक्फ बना सकता है, लेकिन 1995 में ऐसा नहीं था। 2013 में आपने इसमें बदलाव किए और अब हमने 1995 के प्रावधान को बहाल कर दिया है, जिससे यह सुनिश्चित हो गया है कि केवल वही व्यक्ति वक्फ बना सकता है जिसने कम से कम पांच साल तक इस्लाम का पालन किया हो”
