विक्रम सेन
भोपाल : मप्र राज्य आजीविका मिशन में करीब आठ साल पहले हुए अवैध नियुक्तियों के आरोपों में घिरे मध्य प्रदेश के पूर्व आईएफएस अधिकारी और राज्य आजीविका मिशन के तत्कालीन सीईओ ललित मोहन बेलवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) भोपाल ने प्रारंभिक जॉच में उनके सहित तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस एफआईआर में विकास अवस्थी और श्रीमती सुषमा रानी शुक्ला का भी नाम शामिल है, जाँच में जुटी ईओडब्ल्यू को अंदेशा है कि भ्रष्टाचार की और परतें खुल सकती हैं।
विदित हो कि यह भर्ती घोटाला तीन साल पहले उजागर हुआ था, जिसकी जांच आईएएस नेहा मारव्या ढाई साल पहले सरकार को सौंप चुकी थीं। जिसमें उन्होंने बेलवाल पर नियमों को दरकिनार कर भर्ती करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद मंत्रालय स्तर पर जांच रिपोर्ट दबी रही।
पिछले महीने शिकायतकर्ता राजेश मिश्रा ने आजीविका मिशन में हुए भर्ती घोटाले की ईओडब्ल्यू में शिकायत की। जांच में आरोप सही पाए। इसके बाद मिशन के तत्कालीन सीईओ ललित मोहन बेलवाल, उपायुक्त विकास अवस्थी एवं सुषमा रानी शुक्ला को आरोपी बनाया गया है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार बेलवाल के कार्यकाल में वर्ष 2015 से 2018 के बीच राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर नियुक्तियां की गईं थीं। इसके लिए जो मापदंड तय किए गए थे, उन्हें शासन से बिना अनुमोदित कराए ही कई नियुक्तियां की गईं। सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा सुषमा रानी शुक्ला को राज्य परियोजना प्रबंधक की नियुक्ति देने में किया गया। 15 साल का अनुभव नहीं होने के बाद भी, उन्हें नियुक्ति दी गई और 4 महीने के भीतर ही उनका 70 हजार रुपए महीने मानदेय स्वीकृत किया गया।
ईओडब्ल्यू ने जांच में पाया कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी ललित मोहन बेलवाल ने मिशन की मानव संसाधन नीति को बेईमानीपूर्वक प्रस्तुत किया। नीति में कूटरचित करके एचआर मैन्यूअल जोड़ा गया था। जिसके आधार पर कई नियुक्तियोंं में मनमानी की गई।
सुषमा रानी शुक्ला के मानदेय में भी अवैध तरीके से 40% की वृद्धि
कई नियुक्तियाँ न्यूनतम योग्यता और अनुभव के बिना की गईं जैसे कि श्रीमती सुषमा रानी शुक्ला को आवश्यक अनुभव व योग्यता के बिना राज्य परियोजना प्रबंधक (सामुदायिक संस्थागत विकास) पद पर नियुक्त किया गया। जबकि अन्य संवर्गो में जीवन यापन लागत सूचकांक (CPI) के अनुसार ही वृद्धि हुई, स्पष्ट रूप से यह कृत्य सुषमा रानी शुक्ला व अन्य चहेतों को अवैध लाभ देने के लिए किया गया। नियुक्ति एवं वेतन निर्धारण में शासन की स्पष्ट नीतियों की अवहेलना कर निजी हितों की पूर्ति हेतु नियुक्तियाँ की गई।
ईओब्डल्यू ने माना कि बेलवाल, अवस्थी और सुषमा रानी शुक्ला ने भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया। शासन को भी गुमराह किया। आजीविका मिशन में अवैध नियुक्तियो में भी फर्जीवाड़ा उजागर होने की संभावना है।
मंत्रालय ने दबाए रखी थी भर्ती घोटाले की रिपोर्ट
दरअसल, तत्कालीन सरकार के समय आजीविका मिशन में हुए भर्ती घोटाला उजागर हो चुका था। शिकायतकर्ता भूपेन्द्र प्रजापति की शिकायत पर शासन ने मध्य प्रदेश की सबसे ईमानदार आईएएस कही जाने वाली नेहा मारव्या से जांच कराई। सुश्री नेहा ने जांच में बड़ा भर्ती घोटाला उजागर कर दिया। करीब 264 पेज की जांच रिपोर्ट में मिशन के सीईओ बेलवाल समेत अन्य पर आरोप तय किए। सुषमा रानी शुक्ला की जांच को नियम विरुद्ध बताया। नेहा ने जून 2022 में जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी। शासन ने रिपोर्ट पर कार्रवाई करने की बजाए नेहा मारव्या को लूप लाइन में भेज दिया। शिकायकर्ता के अनुसार ललित मोहन बेलवाल पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के करीबी हैं।
इस वजह से नेहा मारव्या की जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब मामला उच्च न्यायालय गया तो विभाग ने सही तथ्य नहीं रखे। इस बीच 2023 में सरकार बदली। जैसे ही नेहा मारव्या की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का मामला पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल के पास पहुंचा तो, उन्होंने संचालक पंचायत मनोज पुष्प की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी। करीब 15 महीने तक सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया तो पिछले महीने मामला ईओडब्ल्यू पहुंचा। और जांच एजेंसी ने प्रकरण दर्ज कर लिया है।
फर्जी बीमा, मशीन खरीदी घोटाला भी आएगा
ईओडब्ल्यू ने अभी नियुक्ति मामले में प्रकरण दर्ज किया है। जल्द ही महिला स्व सहायता समूहों की महिलाओं का फर्जी बीमा और अगरबत्ती मशीन खरीदी घोटाले में भी एफआईआर होगी। शिकायतकर्ता भूपेन्द्र प्रजापति के अनुसार बेलवाल के समय समूहों की महिलाओं ने बीमा के नाम पर करीब 70-80 करोड़ रुपए वसूले, इस राशि का कोई हिसाब नहीं है। करीब 367 अगरबत्ती मशीन खरीदी में भी घोटाला किया गया था।
जांच में ये तथ्य भी सामने आया कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी ललित मोहन बेलवाल द्वारा म.प्र. राज्य आजीविका मिशन की मानव संसाधन नीति (HR Policy) को बेईमानीपूर्वक HR Manual के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि ऐसे किसी ‘HR Manual को राज्य आजीविका फोरम द्वारा अनुमोदन प्राप्त नहीं था। दिनांक 27 मार्च 2015 को राज्य आजीविका फोरम की कार्यकारिणी समिति की बैठक में केवल मानव संसाधन नीति (Human Resource Policy) को मंजूरी दी गई थी, HR Manual का कोई उल्लेख नहीं था। इसके विपरीत बेलवाल द्वारा तैयार की गई नस्ती संख्या 40-01/MP-SRLM/HR/43 में नोटशीट पृष्ठ क्र. 5 में कूटरचित रूप से “HR Manual” शब्द जोड़ा गया।
सरकार में दबदबा
सरकार में एक समय ललित मोहन बेलवाल का सिक्का चलता था। वे 2018 में रिटायर्ड हुए। इसके बाद कांग्रेस की सरकार आई। सरकार जाते ही 2020 में बेलवाल को संविदा पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी का प्रभार सौंपा गया। 2023 में बेलवाल ने इस्तीफा दिया। जुलाई 2023 में दिग्विजय सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ़ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक करीब डेढ़ साल पहले बेलवाल के खिलाफ चुनाव आयोग में बीजेपी के पक्ष में प्रचार करने की दर्जनों शिकायतें पहुंची थीं। इसे लेकर चुनाव आयोग ने उनके संबंध में विभाग से जांच कर प्रतिवेदन मांगा था और यह निश्चित हो चुका था कि उनके ऊपर बड़ी कार्रवाई होने वाली है। बताया जा रहा है कि इस बात की भनक लगते ही बेलवाल ने इस्तीफा दे दिया था।
फिलहाल ईओडब्ल्यू की जांच के दौरान एकत्र साक्ष्यों और दस्तावेजों को परीक्षण से यह सिद्ध हुआ है कि ललित मोहन बेलवाल, विकास अवस्थी और श्रीमती सुषमा रानी शुक्ला ने मिलकर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया, फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग किया और शासन को गुमराह कर व्यक्तिगत लाभ प्राप्त किया। उक्त के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 468, 471, 120-बी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 (सी) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
सूत्रों के अनुसार राज्य आजीविका मिशन में की गईं अन्य अवैध गड़बड़ियों के खुलासे की संभावना है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक करीब डेढ़ साल पहले बेलवाल के खिलाफ चुनाव आयोग में बीजेपी के पक्ष में प्रचार करने की दर्जनों शिकायतें पहुंची थीं। इसे लेकर चुनाव आयोग ने उनके संबंध में विभाग से जांच कर प्रतिवेदन मांगा था और यह निश्चित हो चुका था कि उनके ऊपर बड़ी कार्रवाई होने वाली है। बताया जा रहा है कि इस बात की भनक लगते ही बेलवाल ने इस्तीफा दे दिया था।
फिलहाल ईओडब्ल्यू की जांच के दौरान एकत्र साक्ष्यों और दस्तावेजों को परीक्षण से यह सिद्ध हुआ है कि ललित मोहन बेलवाल, विकास अवस्थी और श्रीमती सुषमा रानी शुक्ला ने मिलकर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया, फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग किया और शासन को गुमराह कर व्यक्तिगत लाभ प्राप्त किया। उक्त के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 468, 471, 120-बी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 (सी) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
सूत्रों के अनुसार राज्य आजीविका मिशन में की गईं अन्य अवैध गड़बड़ियों के खुलासे की संभावना है।
