
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गत दिवस एक बार फिर दावा किया है कि उनकी पहल के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित सैन्य टकराव टल गया था। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों ने तनाव कम नहीं किया होता, तो अमेरिका कड़े आर्थिक कदम उठाता।
वॉशिंगटन में 2026 ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) की पहली बैठक के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को सबके सामने खड़े होने के लिए कहा। इस दौरान ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा, “मुझे लगता है कि आपको (शहबाज) खड़ा होना चाहिए”, जिस पर शहबाज शरीफ तुरंत अपनी सीट से उठकर खड़े हो गए।
शहबाज को खड़ा करना: ट्रंप ने सभा में शहबाज शरीफ को खड़े होने का आदेश दिया, जिसे कई मीडिया रिपोर्ट्स ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की “घोर बेइज्जती” और “स्कूल टीचर की तरह छात्र को खड़ा करना” बताया है।
पीएम मोदी की तारीफ: खड़े होने के बाद, ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी बातचीत का हवाला देते हुए उनकी तारीफ की और भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का दावा किया।
तनाव में मध्यस्थता का दावा: ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने के लिए टैरिफ का दबाव इस्तेमाल किया।
वीडियो वायरल: इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें शहबाज शरीफ असहज स्थिति में खड़े नजर आ रहे हैं।
अजीब स्थिति: रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने शहबाज को बैठने के लिए कभी नहीं कहा, जिससे वह कुछ समय के लिए अजीब मुद्रा में खड़े रहने पर मजबूर हो गए।
इस दौरान ट्रंप ने बताया कि उस समय दोनों देशों के बीच हालात अत्यंत गंभीर थे और सैन्य गतिविधियाँ तेज हो गई थीं। उन्होंने 75वी बार दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के नेतृत्व से सीधे बातचीत कर स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि संघर्ष जारी रहा तो अमेरिका व्यापारिक समझौतों और आर्थिक सहयोग पर रोक लगा सकता है।
ट्रंप के अनुसार, आर्थिक नुकसान की आशंका के बाद दोनों देश तनाव कम करने के लिए तैयार हुए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस अवधि में कुल 11 महंगे फाइटर जेट गिराए गए थे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये विमान किस देश के थे और इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऐतिहासिक संदर्भ और वास्तविक स्थिति
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का लंबा इतिहास रहा है। 1947 के विभाजन के बाद दोनों देशों के बीच 1947-48, 1965, 1971 और 1999 (कारगिल) जैसे बड़े सैन्य संघर्ष हो चुके हैं। विशेष रूप से कारगिल युद्ध (1999) के दौरान अमेरिका ने कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बनाया था, जिसे दक्षिण एशिया में अमेरिकी हस्तक्षेप के महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जाता है।
हाल के वर्षों में फरवरी 2019 के पुलवामा आतंकी हमले और बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भी दोनों देशों के बीच गंभीर तनाव की स्थिति बनी थी। उस दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम करने की अपीलें की गई थीं, लेकिन भारत ने हमेशा स्पष्ट किया कि वह अपने सुरक्षा और रणनीतिक निर्णय स्वतंत्र रूप से लेता है।
भारत का स्पष्ट रुख
भारत सरकार लगातार यह कहती रही है कि भारत-पाकिस्तान से जुड़े सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इनमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी। कश्मीर सहित सभी विषयों पर भारत का यही आधिकारिक और स्थायी रुख रहा है।
“दक्षिण एशिया की स्थिरता” पर बयान
ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि उस समय टकराव नहीं रुकता तो करोड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। उनके अनुसार, उनकी पहल से हालात नियंत्रण में आए और बड़े पैमाने पर संभावित नुकसान टल गया।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया की स्थिति कई जटिल कूटनीतिक, सैन्य और राजनीतिक कारकों से प्रभावित होती है, और किसी एक देश या नेता की भूमिका का आकलन तथ्यात्मक आधार पर ही किया जाना चाहिए।
बता दें कि ट्रंप के दावे हर बार राजनीतिक बयान के रूप में सामने आए हैं, लेकिन भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट है, दक्षिण एशिया के संवेदनशील मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय वार्ता और कूटनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है।