
तेहरान / वॉशिंगटन (अंतरराष्ट्रीय डेस्क)।
मध्य पूर्व में चल रहे अमेरिका–ईरान संघर्ष को दस दिन पूरे हो चुके हैं और इसी बीच ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। देश की सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य तनाव का सामना कर रहा है। नए नेता के चयन के साथ ही ईरान के राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक संस्थान तेजी से उनके समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का फैसला, एकजुट रहने की अपील
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने सोमवार को औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि यह निर्णय देश की संवैधानिक और धार्मिक प्रक्रिया के तहत लिया गया है। परिषद ने ईरानी जनता से नए सुप्रीम लीडर के प्रति निष्ठा जताने और बाहरी दबावों के बावजूद राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील की। परिषद का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में मजबूत नेतृत्व देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए आवश्यक है।
ईरान के वरिष्ठ राजनेता अली लारिजानी ने भी इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद विरोधी देशों को उम्मीद थी कि ईरान राजनीतिक संकट में फंस जाएगा, लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नए सुप्रीम लीडर का चयन कर देश ने स्थिरता का संदेश दिया है। उनके अनुसार मोजतबा खामेनेई इस “संवेदनशील दौर” में देश का नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं।
IRGC ने जताई पूर्ण निष्ठा
ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी नए सुप्रीम लीडर के प्रति पूर्ण समर्थन जताया है। संगठन ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वह मोजतबा खामेनेई के आदेशों का पूरी तरह पालन करेगा और जरूरत पड़ने पर देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार है।
विश्लेषकों के अनुसार IRGC का यह समर्थन सत्ता परिवर्तन को स्थिरता देने वाला बड़ा संकेत माना जा रहा है। वहीं ईरान की संसद के स्पीकर ने भी मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि नए नेता का अनुसरण करना हर ईरानी का धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है।
88 मौलवियों की संस्था चुनती है सुप्रीम लीडर
ईरान के नए सुप्रीम लीडर का चुनाव 88 वरिष्ठ धर्मगुरुओं की संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करती है। इस संस्था के सदस्य हर आठ साल में जनता की ओर से चुने जाते हैं, लेकिन उम्मीदवारों की जांच गार्जियन काउंसिल करती है। यही परिषद संसद के कानूनों की समीक्षा करती है और यह भी तय करती है कि कौन राष्ट्रपति, संसद या असेंबली के चुनाव लड़ सकता है। हाल के हमलों के बाद असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की बैठकें ऑनलाइन आयोजित की जा रही थीं, क्योंकि तेहरान और कुम में इसके परिसरों को अमेरिकी-इजरायली हमलों में निशाना बनाया गया था
युद्ध के बीच सत्ता परिवर्तन
मोजतबा खामेनेई का सुप्रीम लीडर बनना ऐसे समय में हुआ है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच सैन्य टकराव तेजी से बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार ईरान लगातार अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी ठिकानों को निशाना बना रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान अपेक्षा से अधिक आक्रामक और संगठित प्रतिक्रिया दे रहा है, जिससे युद्ध लंबा खिंच सकता है और अमेरिकी हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
पश्चिमी देशों में चिंता
पूर्व CIA प्रमुख डेविड पेट्रेयस ने कहा कि मोजतबा खामेनेई का सुप्रीम लीडर बनना पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। उनके अनुसार संभावना है कि वह अपने पिता की तरह कठोर विचारधारा वाले नेता साबित होंगे और ईरान की परमाणु और मिसाइल नीति में किसी प्रकार की नरमी नहीं दिखाएंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नियुक्ति से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि ईरान की सत्ता संरचना में कट्टर और कठोर रुख रखने वाला धड़ा अभी भी पूरी तरह प्रभावी है।
अमेरिका ने सऊदी अरब के लिए जारी किया सुरक्षा अलर्ट
युद्ध के बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब में तैनात गैर-जरूरी अमेरिकी राजनयिकों और कर्मचारियों को तत्काल देश छोड़ने का निर्देश दिया है। पिछले सप्ताह सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के आसपास ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई थीं।
इसके अलावा कतर, जॉर्डन, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और पाकिस्तान में भी गैर-जरूरी अमेरिकी कर्मचारियों को पहले ही वापस बुलाया जा चुका है। कुवैत में अमेरिकी दूतावास की कुछ गतिविधियों को भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
तेल बाजार में उथल-पुथल
मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में भी बड़ा असर देखने को मिल रहा है। तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड लगभग 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार इतना ऊंचा स्तर है।
तेल की कीमतों में इस तेजी का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर लगभग 3.45 डॉलर प्रति गैलन हो गई है, जो एक सप्ताह में करीब 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
नए सुप्रीम लीडर के बाद इजरायल पर मिसाइल हमला
नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के चुने जाने के कुछ ही समय बाद ईरान ने इजरायल की ओर मिसाइलें दागीं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार यह हमला अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में किया गया।
मिसाइल हमलों के बाद इजरायल के कई शहरों में सायरन बजने लगे और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। इससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव और अधिक बढ़ गया है।
वैश्विक संकट की ओर बढ़ता संघर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा चला तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के अगले कदमों और अमेरिका-इजरायल की रणनीति पर टिकी हुई है।