
इंदौर। शहर में बढ़ते चोरी एवं नकबजनी के मामलों पर लगाम कसने के लिए पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के निर्देश पर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस क्रम में पलासिया थाना पुलिस ने अंतर्राज्यीय कुख्यात नकबजन अब्दुल रशीद उर्फ तलवार सिंह को गिरफ्तार कर सोने-चांदी के लाखों के आभूषण और चोरी की स्प्लेंडर बाइक सहित करीब 7.5 लाख रुपए का माल बरामद किया। आरोपी मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में 100 से अधिक गंभीर अपराधों में वांछित है।
थाना प्रभारी सुरेंद्रसिंह रघुवंशी के नेतृत्व में गठित 4 टीमों ने चोरी की वारदातों के 800 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले। मुखबिरों की मदद से संदिग्ध आरोपी की पहचान हुई और उसे घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि वह वोटर कार्ड के लिए एसआईआर फॉर्म भरने इंदौर आया था।
तिलक नगर थाना क्षेत्र से उसने एक स्पेलेन्डर दुपहिया वाहन चुराया और 3 दिसंबर को उसी दुपहिया वाहन से गीता नगर क्षेत्र मे एक सुनसान फ्लेट में ताले के नकुचे को टॉमी की मदद से तोडकर फ्लेट के अन्दर से अलमारी मे रखे सोने चांदी के जेवर चुरा लिए जिसकी कीमत का आंकलन मुझे नहीं पता था। आरोपी नशे करने का भी आदी है एवं सूने घरो मे चोरी करने मे कुख्यात है।
आरोपी से विस्तृत पूछताछ करने पर आरोपी के विरूध्द थाना पलासिया क्षेत्र मे पूर्व के 4 अपराध पंजीबध्द होना पाया। शहर के अन्य थाने के दर्जनों अपराध घटित करना पाया गया है। आरोपी का विस्तृत आपराधिक रिकार्ड पता करते अभी तक आरोपी पर करीब 60 से ज्यादा अपराध मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्य के लगभग सभी जिलो मे होना पाया गया है एवं शेष 40 से भी अधिक आपराधिक रिकार्ड की भी जानकारी ली जा रहीं है।
19 साल की उम्र से शुरू किया अपराध करना, ऐसे पड़ा ‘तलवार सिंह’ नाम
अब्दुल रशीद बचपन से ही इंदौर में पला-बढ़ा और 19 वर्ष की आयु में चोरी की दुनिया में उतर गया। बाद में महाराष्ट्र के अकोला जिले में जाकर निकाह किया और वहीं अपनी खतरनाक छवि बनाता रहा। बताया जाता है कि अकोला के वर्धा क्षेत्र में उसने एक व्यक्ति की तलवार से गर्दन काटकर हत्या कर दी थी और हत्या के बाद खुद ही गर्दन लेकर थाने में पेश हो गया था। इस भयावह वारदात के चलते उसे ‘तलवारसिंह’ नाम मिला और वह महाराष्ट्र में दहशत का पर्याय बन गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस कार्रवाई में थाना पलासिया की टीम और साइबर सेल के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।