



विक्रम सेन
भोपाल : प्रदेश में शिक्षा के नाम पर आवंटित धनराशि के बंदरबांट की धांधली को शहडोल जिले के दो स्कूलों में ऑयल पेंट के नाम पर लाखों रुपए के संदिग्ध और हास्यास्पद बिल बयां करते हैं।
इन दोनों बिलों को गलत तरीके से बनाकर ठेकेदार को भुगतान करने की पुष्टि भी शहडोल कलेक्टर केदार सिंह द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में हो गई हैं।
एक प्रशासनिक जानकार के अनुसार यह संगठित घोटाला प्रदेश में सरकारी धन के दुरुपयोग और शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार का गंभीर उदाहरण पेश करता है। यहीं कारण हैं कि प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने भी इस मामले पर जरूरी एक्शन लिया हैं और प्रभारी प्राचार्य को तत्काल निलंबित कर दिया है।
प्राप्त जानकारी अनुसार परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा हैं कि “शहडोल जिले के सरकारी स्कूलो में मरम्मत के दौरान अनियमितता का मामला उनके संज्ञान में आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और आयुक्त लोक शिक्षण को प्रकरण की तत्काल जाँच करने के निर्देश दिये हैं। जाँच के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी।”
स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि “सुशासन वाली सरकार में किसी भी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।”
सोशल मीडिया पर यह ख़बर वायरल हुई तो शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने तत्काल इन स्कूलों की जॉच एसडीएम ब्यौहारी से कराई और उन्होंने पाया कि भुगतान किए गए बिल अनुसार स्कूलों में रंगाई पुताई न की जाकर मात्र लीपापोती की गई हैं।
रंगाई पुताई से संबंधीत कोई भी दस्तावेज और बिल स्कूलों में उपलब्ध नहीं थे। जबकि निपानिया स्कूल के प्राचार्य द्वारा बताया गया कि स्कूल में अन्य निर्माण कार्य खिड़की दरवाजे का कराया गया था, यह सफाई भी प्रारंभिक जांच में संदिग्ध पाई गई।
प्राप्त जानकारी अनुसार स्कूलों की भौतिक जॉच रिपोर्ट के बाद कलेक्टर डॉ. केदार सिंह द्वारा ऑयल पेंट बिल के मामले में दोषी सकंदी स्कूल के प्राचार्य सुग्रीव शुक्ला व निपानिया स्कूल प्राचार्य राधिका तिवारी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने के साथ उक्त दोनों बिल के भुगतान जिन अधिकारीयो ने किए हैं उनसे इन बिलों की वसूली की प्रक्रिया जारी करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर डॉ. केदार सिंह द्वारा फर्जी बिल की धांधली में शामिल दोनों स्कूलों के प्राचार्य सहित जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मारपाची को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।
वहीं कलेक्टर ने शहडोल जिले के स्कूलों में हो रहे निर्माण कार्य एवं बिलों की जांच के आदेश भी दिए हैं।
बता दें कि शहडोल जिले में शिक्षा विभाग से जुड़े चौंकाने वाले घोटाले सामने आए है, जिसमें स्कूलों की रंगाई-पुताई और मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर दिए गए। सोशल मीडिया पर वायरल हुए दो बिल ने इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया।
पहला मामला ब्यौहारी विकासखंड के शासकीय हाईस्कूल सकंदी और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निपानिया का है। वायरल बिल में दावा किया गया है कि सिर्फ चार लीटर ऑयल पेंट की पुताई के लिए 168 मजदूरों और 65 मिस्त्रियों को लगाया गया, जिनकी मजदूरी में कुल 1,06,984 रुपये खर्च किए गए। पेंट की कीमत सिर्फ 784 रुपये थी।
इसी तरह निपानिया स्कूल में 20 लीटर पेंट से रंगाई के लिए 275 मजदूरों और 150 मिस्त्रियों को काम पर लगाया गया, जिनकी मजदूरी 2,31,650 रुपये बताई गई है। इन बिलों के ऊपर स्कूल प्रिंसिपल और जिला शिक्षा अधिकारी के सरकारी सील भी लगी हुई है।
यह दोनों भुगतान 5 मई 2025 के बिलों के आधार पर किए गए थे, जिन पर संबंधित प्राचार्यों और जिला शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर व सरकारी मुहरें भी लगी हुई हैं। खास बात यह है कि दोनों स्कूलों में यह काम एक ही ठेकेदार सुधाकर कंस्ट्रक्शन के जरिए कराया गया। इन दोनों विद्यालयों में लगाए गए बिल क्रमांक 240 और 241 है।
बहरहाल जानकार सूत्रों के अनुसार इस मामले में ट्रेज़री अधिकारियों की भूमिका काफी संदिग्ध हैं जिन्होंने इसका भुगतान सरलता से निपटा दिया। विदित हो कि अनुरक्षण मद से कराए गए कार्यों का कार्य के पूर्व फोटोग्राफ्स एवं कार्य होने के बाद फोटोग्राफ्स देयक के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। जबकि कार्य कराने के पूर्व और कार्य समाप्त के बाद देयक के साथ फोटोग्राफ्स संलग्न नहीं किया गया, ट्रेजरी ऑफिसर द्वारा बिना फोटोग्राफ्स के ही देयक पारित कर भुगतान कर दिया गया है।
इस मामले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी पी.एस. मरपाची का बेतुका बयान सामने आया है। उनका कहना है कि विद्यालय भवन में पुताई के अलावा अन्य कार्य भी कराए गए हैं। जिसके लिए 3 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई है। सिर्फ एक बिल ही सोशल मिडिया में वायरल किया गया है जो कि मिस्त्री व मजदूरों के भुगतान का है। अन्य जो कार्य कराया गया है उसका एक और बिल है। मामले की जांच कराई जा सकती है।
प्राप्त ख़बरों के अनुसार प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी का रवैया भ्रष्टाचार को लेकर संदिग्ध रहा हैं। ऐसी ही एक घटना जो काफी वायरल थी उसे देखें;
प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा त्रैमासिक परीक्षा सत्र 2024-25 में कक्षा दसवीं का अंग्रेजी विषय प्रश्न पत्र शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रघुराज क्रमांक 2 में बना था। जिसे सोहागपुर विकासखंड अंतर्गत आने वाले समस्त शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी विद्यालय में प्राचार्यों को वितरित करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन प्रश्न पत्र निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर का था।
जिस पर 21 सितंबर 2024 को जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा कार्यालय से जांच हेतु जांच समिति का गठन किया गया। जिसमें जेपी गुप्ता सहायक संचालक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, संजय पांडे प्राचार्य शासकीय स्कूल कोटमा विकासखंड सोहागपुर एवं उमेश कुमार श्रीवास्तव शासकीय एमएलबी के प्राचार्य शामिल थे।
इस समिति ने कक्षा दसवीं के त्रैमासिक परीक्षा के अंग्रेजी विषय के पेपर की जांच कर जिला शिक्षा अधिकारी को जांच प्रतिवेदन सौंप दिया।
जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत होने के बाद प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा कक्षा दसवीं के अंग्रेजी विषय का पेपर बनाने वाले पर लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि उक्त पेपर को निरस्त कर दिया गया एवं 30 सितंबर 2024 कि तिथि निर्धारित कर अंग्रेजी विषय का पेपर दोबारा कराया गया था।
इस पूरे मामले में भी जिला शिक्षा अधिकारी के ऊपर संदिग्धता की सुई लटकी थी।
बता दें कि लंबे अरसे से प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मारपाची जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय शहडोल में प्रभार में है।
जिनका मूल पद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालक बुड़वा प्राचार्य का है।
हैरानी की बात यह है कि मूल पद जहां का है जहां से साहब की वेतन निकलती है। वहां पर उन्हें स्थाई करने की बजाय उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार दिया है, जिले के कई शिक्षक जानना चाहते हैं आख़िर क्यों?
वैसे कलेक्टर डॉ केदार सिंह द्वारा शहडोल जिले के सभी सरकारी स्कूलों में भुगतान हुए बिलों की भौतिक जॉच कराने से काफी आश्चर्य जनक रिपोर्ट सामने आने की संभावना जिले के नागरिक व्यक्त कर रहे हैं।