
भोपाल। मध्य प्रदेश के चर्चित शराब के फर्जी चालान घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 28 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया। इन संपत्तियों में इंदौर, मंदसौर और खरगोन जिले में स्थित कीमती जमीनें,आलीशान फ्लैट और व्यावसायिक प्लॉट शामिल हैं,जो कथित रूप से शराब ठेकेदारों के नाम पर दर्ज हैं।
ED ने यह कार्रवाई इंदौर के रावजी बाजार थाने में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। आरोप है कि देसी और विदेशी शराब के कई ठेकेदारों ने संगठित तरीके से सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुँचाने के लिए फर्जी ट्रेजरी चालान तैयार किए। वे वास्तविक कर, लाइसेंस फीस और न्यूनतम गारंटी राशि का केवल एक हिस्सा जमा करते थे, जबकि दस्तावेजों में बड़ी रकम दिखाकर शराब का भारी स्टॉक उठाया जाता था।
इंदौर में आबकारी फर्जी चालान घोटाले का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले यह घोटाला 49 करोड़ रुपए का सामने आया था, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में यह बढ़कर 71 करोड़ तक पहुंच गया है। घोटाले की शुरुआत करीब 8 साल पहले हुई थी, जब रावजी बाजार थाने में आबकारी विभाग ने 14 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई थी। उस समय कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया था, जिनकी विभागीय जांच धीमी गति से चलती रही और कई बाद में बहाल भी हो गए।
ऐसे खेला गया था फर्जी चालान का खेल
जांच में खुलासा हुआ कि ठेकेदार पहले बहुत कम राशि वाले ट्रेजरी चालान तैयार करते थे और उसमें ‘रुपयों में शब्दों में’ वाला कॉलम जानबूझकर खाली छोड़ देते थे। बैंक में कम राशि जमा करने के बाद वे दस्तावेज़ में छेड़छाड़ कर उसी कॉलम में बड़ी राशि शब्दों में दर्ज कर देते थे। इसके बाद यही फर्जी चालान जिला आबकारी कार्यालय व वेयरहाउस में जमा कर भारी मात्रा में शराब उठाई जाती थी।
मुख्य आरोपी न्यायिक हिरासत में
जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी राजू दशवंत और अंश त्रिवेदी सहित कई ठेकेदारों ने संयुक्त रूप से लगभग 49 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। दोनों को ED पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
ED की आगे कार्रवाई की तैयारी
ED के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, घोटाले से जुड़ी और संपत्तियों की पहचान की जा रही है। आने वाले दिनों में और कुर्की तथा संभावित गिरफ्तारियों की कार्रवाई होने की संभावना है। कुर्क की गई संपत्तियों का प्रस्ताव पुष्टि के लिए एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी को भेजा जा चुका है,जबकि एजेंसी धनशोधन की पूरी श्रृंखला को ट्रेस करने में जुटी हुई है।