

नई दिल्ली। भारत ने सोमवार 23 जून को इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की आलोचना करते हुए कहा कि वह पाकिस्तान के प्रभाव में आकर कश्मीर को लेकर उसके बारे में अनुचित और तथ्यात्मक रूप से गलत बयान दे रहा है।
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘पाकिस्तान किस तरह झूठा प्रोपेगेंडा फैलाने और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए ओआईसी का इस्तेमाल करता है।’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओआईसी देशों को भारत के आंतरिक मामलों पर कुछ भी कहने का हक नहीं है। मंत्रालय ने कहा, ‘जम्मू और कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है। यह एक ऐसा तथ्य है, जो हमारे संविधान में निहित है।
भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया तुर्किए में रविवार को ओआईसी के विदेश मंत्री स्तरीय सम्मेलन के बाद आई है, जिसमें भारतीय मुसलमानों को सामाजिक रूप से हाशिए पर धकेलने जैसे आरोप लगाते हुए भारत के खिलाफ बयान दिए गए हैं।
तुर्किए के इस्तांबुल में आयोजित इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की दो दिवसीय बैठक एक बार फिर पाकिस्तान की पक्षपातपूर्ण कूटनीति का मंच बन गई थी। 57 मुस्लिम देशों के संगठन OIC की विदेश मंत्रियों की परिषद (CFM) ने अपने साझा बयान में जहां एक ओर भारत-पाक के बीच हुए सिंधु जल समझौते (IWT) को जारी रखने की बात कही थी, वहीं दूसरी ओर भारत की सैन्य कार्रवाई और कश्मीर नीति को लेकर भी एकतरफा टिप्पणी की। OIC ने अपने साझा बयान में बताया था कि वह पाकिस्तान के रुख का पूरी तरह समर्थन करता है और भारत से अधिकतम संयम बरतने की उम्मीद करता है।
इस बैठक में ओआईसी ने भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय समझौतों का सख्ती से पालन करने का आह्वान किया था और सभी लंबित विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए व्यापक आधार वाली बातचीत की आवश्यकता पर बल दिया।
ओआईसी का यह बयान भारत की उस नीति के खिलाफ है जिसमें कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा माना गया है और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को अस्वीकार किया जाता है।
इसी बयान पर विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘भारत ओआईसी के विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक में भारत के बारे में अनुचित और तथ्यात्मक रूप से गलत संदर्भों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।’
बयान में कहा गया, ‘आतंकवाद को राजकीय कौशल में तब्दील करने वाले पाकिस्तान के इशारे पर ये बयान संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्यों के लिए ओआईसी मंच के निरंतर दुरुपयोग को दर्शाते हैं।’
विदेश मंत्रालय ने कड़ी टिप्पणी करते कहा ‘कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के वास्तविक खतरे को स्वीकार करने में ओआईसी बार-बार विफल रहा है जिसका सबसे हालिया सबूत पहलगाम हमले में देखने को मिला, यह तथ्यों के प्रति जानबूझकर की गई उपेक्षा को दर्शाता है।’
उल्लेखनीय हैं कि OIC के सीएफएम ने बयान में कहा,“हमें दक्षिण एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर गहरी चिंता है। भारत द्वारा पाकिस्तान में कई स्थानों पर किए गए सैन्य हमले क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा सकते हैं।” OIC ने दोनों पक्षों से उत्तेजक कार्रवाईयों से बचने और अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया है।
ओआईसी की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु संधि को लेकर अपना रुख सख्त कर लिया था और पाकिस्तान का पानी रोकने का इशारा किया था। पाकिस्तान ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी और युद्ध जैसी धमकी दी थी। तीन महीने से इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच टकराव बना हुआ है।
ओआईसी का यह बयान स्पष्ट रूप से भारत को लक्ष्य कर दिया गया संकेत है, क्योंकि पाकिस्तान OIC का स्थायी सदस्य है और लंबे समय से इसे भारत के खिलाफ राजनयिक हथियार की तरह प्रयोग करता रहा है।
विदेश मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा, “आतंकवाद को राजकौशल में बदल देने वाले पाकिस्तान द्वारा दिए गए ये बयान संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्यों के लिए ओआईसी मंच के निरंतर दुरुपयोग को दर्शाते हैं।”
ओआईसी को पाकिस्तान के दुष्प्रचार को अपने एजेंडे को हाईजैक करने और उसका राजनीतिकरण करने की अनुमति देने के खतरों पर गहराई से विचार करने की सलाह देते हुए, विदेश मंत्रालय ने कहा कि कोई भी अन्य रास्ता ओआईसी की विश्वसनीयता और प्रासंगिकता को कमज़ोर कर सकता है। इसमें कहा गया है, “ओआईसी की बैठक में पाकिस्तान द्वारा की गई टिप्पणियाँ शासन की विफलता के अलावा राज्य प्रायोजित आतंकवाद, अल्पसंख्यक उत्पीड़न और सांप्रदायिक हिंसा के अपने स्वयं के भयावह रिकॉर्ड से अंतरराष्ट्रीय ध्यान हटाने के लिए एक हताश प्रयास से ज़्यादा कुछ नहीं हैं।”
इसमें कहा गया है कि भारत पाकिस्तान के “अकारण और अनुचित सैन्य आक्रमण” के निराधार आरोप को भी पूरी तरह से खारिज करता है।
इसमें कहा गया है, “पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में भारत का ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तानी क्षेत्र से संचालित आतंकवादी शिविरों के खिलाफ आत्मरक्षा का एक सटीक और वैध कार्य था।” इसमें यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान द्वारा केवल भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की बात करना बेतुका है, जबकि उसके जवाबी प्रयास न केवल विफल रहे, बल्कि उसने लापरवाही से नागरिकों के जीवन और संपत्ति को खतरे में डाला और कई नागरिक मारे गए तथा घायल हुए।
विदेश मंत्रालय ने कहा, “यह भी विडंबना है कि पाकिस्तान, एक ऐसा देश जिसका मानवाधिकारों का रिकॉर्ड बहुत खराब है और जिसका आतंकवादियों को पनाह देने, पालने और सशक्त बनाने का इतिहास रहा है, वह दूसरों को आतंकवाद-विरोध और मानवाधिकारों पर उपदेश दे रहा है।”
इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) को जाने
इसकी स्थापना 25 सितम्बर 1969 को हुई थी। ओआईसी के 57 सदस्य देश हैं।
अफगानिस्तान, अल्बानिया, अजरबैजान, बहरीन, बांग्लादेश, बेनिन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ब्रुनेई दारुस्सलाम, बुर्किना फासो, अल्जीरिया, जिबूती, चाड, इंडोनेशिया, मोरक्को, कोटे डी आइवर, फिलिस्तीन, गैबॉन, गाम्बिया, गिनी, गिनी बिसाऊ, गुयाना, इराक, ईरान, कैमरून, कतर, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, कोमोरोस, कुवैत, लीबिया, लेबनान, मालदीव, मलेशिया, माली, मिस्र, मॉरिटानिया, मोजाम्बिक, नाइजर, नाइजीरिया, उज्बेकिस्तान, पाकिस्तान, सेनेगल, सिएरा लियोन, सोमाली, सूडान, सूरीनाम, सीरिया*, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान, टोगो, ट्यूनीशिया, तुर्किये, तुर्कमेनिस्तान, युगांडा, ओमान, जॉर्डन, यमन।
उपरोक्त 57 सदस्य देश में (51 मुस्लिम और 6 गैर-मुस्लिम) देश हैं। इनमें गणराज्य 47 और राजतंत्र वाले 10 देश हैं।
इन सबकी कुल आबादी 2.04 अरब है।
इनमें 5 पर्यवेक्षक राज्य (3 गैर-मुस्लिम और 2 मुस्लिम) सदस्य हैं।
कई गैर-मुस्लिम देश ओईसी के पर्यवेक्षक के रूप में उम्मीदवार बनना चाहते हैं।
2025 तक OIC सदस्य देशों की सामूहिक जनसंख्या 2.04 बिलियन से अधिक होगी।
इसका मुख्यालय जेद्दा में हैं।
सदस्य देशों के बीच सहयोग और एकजुटता को मजबूत करना तथा इस्लामी दुनिया के अधिकारों और हितों की रक्षा करना हैं।
बता दें कि इस्लामिक सहयोग संगठन की यह बैठक इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि इसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के साथ पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर भी तुर्किए पहुंचे थे । मुनीर ने वहां तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन से मुलाकात की, जो कि बैठक के आधिकारिक एजेंडे से इतर एक सामरिक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात का असर OIC के अंतिम बयान की भाषा पर भी पड़ा, जिसमें भारत के खिलाफ तीखा रुख अपनाया गया।
एक ओर भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को वैश्विक विकास साझेदार के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर OIC जैसे संगठनों में लगातार पाकिस्तान की पक्षपातपूर्ण पैरवी के चलते उसे विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कश्मीर के साथ ही सिंधु जल समझौते जैसे पुराने और स्थिर समझौतों को भी अब भू-राजनीतिक टकराव के केंद्र में लाया जा रहा है, जिससे दक्षिण एशिया में अशांति और अधिक गहराने की आशंका बन रही है।
भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां उसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा, ओआईसी के साथ मजबूत कूटनीति, अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी और रूस के साथ पारंपरिक संबंधों के बीच संतुलन साधना होगा। इसके लिए संभव है कि भारत अपनी पुरातन विदेश नीति नियामक प्रतिक्रिया को अपनाने की और बढ़ रहा है।
विदित हो कि ओआईसी दुनिया भर में मुसलमानों के मुद्दे उठाता रहा है, लेकिन कभी भी उसने भारत के खिलाफ कोई सख्त रुख नहीं दिखाया।
इसी कड़ी में भारत ने ईरान पर अमेरिकी और इजरायली सैन्य हमलों को लेकर BRICS समूह के साथ मिलकर सख्त चिंता व्यक्त की है। BRICS देशों ने 13 जून से ईरान पर जारी हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का गंभीर उल्लंघन करार दिया है। इस बयान में भारत ने स्पष्ट रूप से हमलों की निंदा की है। हालांकि ब्रिक्स के बयान में इजरायल या अमेरिका का नाम नहीं लिया गया है। भारत का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब 10 दिन पहले SCO (शंघाई सहयोग संगठन) के एक बयान से खुद को अलग कर लिया था, जिसमें इजरायल की आलोचना की गई थी।
यह बयान एक बेहतरीन निर्णय है भारत का अपनी पुरातन भूमिका निभाने के लिए।
उदाहरण के लिए OIC के कई सदस्य देशों के अमेरिका और यूरोप के साथ गहरे संबंध हैं। यूएई, बहरीन और तुर्किये जैसे देशों के इजरायल के साथ संबंध बेहतर करने में जुटे हैं। ऐसे में गाजा पर इजरायली आक्रमण के बाद भी मुस्लिम देश इजरायल के साथ खुलकर शत्रुता नहीं दिखा सकते। यही कारण है कि समूह ने 2023 से, इजरायल के खिलाफ़ 31 से अधिक प्रस्ताव पारित किए हैं लेकिन ये सभी प्रस्ताव अप्रभावी बने हुए हैं। वहीं चीन पर आर्थिक निर्भरता होने की वजह से OIC उइगर समुदाय पर हो रहे अत्याचार पर भी चुप्पी साधे हुए है। ऐसे में भारत को अपना रुख साहस के साथ विश्व शांति के लिए बनाए रखना ही जरूरी होगा।
विश्व शांति और विकास की स्पष्ट अवधारणा के साथ (बिना विश्व की सर्वोच्च शक्ति बनने की चाहत के) भारत अपने शिखर पर था, हैं और सदैव रहेगा।