
संपादकीय विशेष विक्रम सेन
नई दिल्ली । भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में पिछले दो वर्ष (2023-2025) वास्तव में ऐतिहासिक रहे हैं। एक ओर सत्ता पक्ष ने आर्थिक प्रगति, बुनियादी ढांचे के विकास और वैश्विक कद में वृद्धि के माध्यम से ‘विकसित भारत’ की नींव मजबूत की, तो दूसरी ओर विपक्ष ने संस्थाओं की स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक अधिकारों और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर सशक्त आवाज उठाई। ये दो वर्ष ‘बेमिसाल’ इसलिए हैं क्योंकि इन्होंने भारत को विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बनाए रखा, साथ ही लोकतंत्र की जीवंतता को भी प्रदर्शित किया। निष्पक्ष दृष्टि से दोनों पक्षों की प्रमुख उपलब्धियों और चुनौतियों पर विचार करें।
सत्ता पक्ष की बेमिसाल उपलब्धियाँ
मोदी सरकार के नेतृत्व में 2023-2025 के वर्षों में भारत ने कई मोर्चों पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की:
आर्थिक विकास: 2023-24 में जीडीपी वृद्धि दर 8.2% रही, जबकि 2024-25 में यह 6.5% अनुमानित है। नाममात्र जीडीपी 330 लाख करोड़ रुपये के पार पहुँच गई। भारत विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहा और 2025 में जापान को पीछे छोड़ चौथे स्थान पर पहुँच गया। डिजिटल अर्थव्यवस्था का योगदान जीडीपी में 13% तक बढ़ा, यूपीआई लेन-देन विश्व में अग्रणी बने।
बुनियादी ढांचा और कल्याण: हाईवे निर्माण की गति 34 किमी/दिन तक पहुँची। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करोड़ों घर बने। उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं से गरीबों तक सुविधाएँ पहुँचीं। नए आपराधिक कानून (2024 से लागू) और महिला आरक्षण विधेयक पारित होना महत्वपूर्ण कदम रहे।
वैश्विक एवं रक्षा क्षेत्र: चंद्रयान-3 की सफलता (2023), जी20 अध्यक्षता में सफलता और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता (ब्रह्मोस निर्यात आदि) ने भारत का कद बढ़ाया। 2025 में पाकिस्तान के साथ तनाव के बावजूद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे कदमों से रक्षा नीति मजबूत हुई।
सांस्कृतिक एवं सामाजिक: राम मंदिर उद्घाटन (2024) और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण ने राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा दिया।
ये उपलब्धियाँ ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को साकार करती हैं, जिससे भारत वैश्विक मंच पर मजबूत हुआ।
विपक्ष की बेमिसाल भूमिका एवं चुनौतियाँ
विपक्ष ने इन वर्षों में लोकतंत्र के प्रहरी की भूमिका निभाई, सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की और जनहित के मुद्दे उठाए:
संस्थाओं की रक्षा: विपक्ष ने चुनाव आयोग, ईडी जैसी संस्थाओं के कथित दुरुपयोग पर आवाज उठाई। 2024 लोकसभा चुनाव में INDIA गठबंधन ने 232 सीटें जीतकर सत्ता पक्ष की बहुमत को चुनौती दी, जिससे संसद में बहस जीवंत हुई।
सामाजिक न्याय एवं असमानता: मणिपुर हिंसा (2023-2025), अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमले और आर्थिक असमानता (शीर्ष 1% के पास 40% संपत्ति) पर विपक्ष ने सरकार को घेरा। बेरोजगारी, महंगाई और क्रोनी कैपिटलिज्म की आलोचना प्रमुख रही।
महिला एवं सामाजिक मुद्दे: महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत करते हुए भी विपक्ष ने तत्काल लागू न होने पर सवाल उठाए। किसान आंदोलनों और पर्यावरण मुद्दों पर सक्रियता दिखाई।
चुनौतियाँ: विपक्ष को एकजुट रहने में कठिनाई हुई, कई नेता जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे। फिर भी, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और गठबंधन की रणनीति ने विपक्ष को मजबूत किया।
विपक्ष की यह भूमिका लोकतंत्र को मजबूत बनाती है, क्योंकि यह सरकार को जवाबदेह ठहराती है और वैकल्पिक नीतियाँ प्रस्तुत करती है।
संतुलित लोकतंत्र की ओर
ये दो वर्ष बेमिसाल इसलिए हैं क्योंकि सत्ता पक्ष ने विकास की रफ्तार बनाए रखी, जबकि विपक्ष ने लोकतांत्रिक संतुलन सुनिश्चित किया। आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सामाजिक समरसता और संस्थागत स्वतंत्रता आवश्यक है। भारत का भविष्य इसी संतुलन में निहित है, जहाँ सत्ता विकास करे और विपक्ष उसकी रक्षा। आइए, हम सब मिलकर ‘विकसित भारत’ का सपना साकार करें, जहाँ हर आवाज सुनी जाए और हर नागरिक समृद्ध हो।