
इस मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है, पूर्व नेता मनोहर धाकड़ ने पुलिस को हाईवे कर्मचारियों द्वारा पैसे मांगने वाली बात बताई थी। इसके बाद एनएचएआई ने तीन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है।
बता दें कि 13 मई की रात दिल्ली-मुंबई 8-लेन एक्सप्रेसवे पर हाई-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरों में कैद हुआ यह वीडियो 21 मई को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में मनोहर धाकड़ और एक अज्ञात महिला आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दिए, जिसके बाद देशभर में हंगामा मच गया। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, वीडियो में दिख रही सफेद रंग की कार (MP 14 CC 4782) मनोहर धाकड़ के नाम पर रजिस्टर्ड है।
बताया जा रहा है कि बर्खास्त किये गये ये कर्मचारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नहीं हैं, बल्कि NHAI के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर कार्य कर रही रोड मेंटेनेंस और मॉनिटरिंग एजेंसी–एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े थे। जो 13 मई की रात को नाइट शिफ्ट में कार्यरत थे।
प्रशासन की सख्ती और संवेदनशील फुटेज की गोपनीयता को लेकर अब निगरानी और नियंत्रण के स्तर को और पुख्ता किये जाने की बात कही जा रही है।
प्राप्त जानकारी अनुसार मनोहर धाकड़ ने बताया है कि कि वीडियो वायरल न करने को लेकर वे लोग 1 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। मेरे पास 20 हजार नगद था, मैंने वो उन्हे दे दिया। वे लगभग आधा दर्जन लोग थे। बात 80 हजार पर आकर अटकी तो उनमे से किसी एक ने वीडियो सोशल मीडिया पर डालकर वायरल कर दिया।
वहीं एक जानकारी के अनुसार मनोहर लाल धाकड़ एनएचआई के सर्वर से वीडियो डिलीट करवाने की बात पर अड़ा हुआ था। लेकिन कंट्रोल रूम में बैठे कर्मचारियों के लिए यह संभव नहीं था। संभावना जताई जा रही है कि ब्लैकमेल पर उतारू कर्मचारियों को जब धाकड़ से बाकी के 80 हजार रुपए तय समय पर नहीं मिले तो 7 मिनट का वीडियो तीन टुकड़ों में वायरल कर दिया गया।
उधर मनोहर धाकड़ के वकील संजय सोनी ने दावा किया कि यह मामला केवल वायरल वीडियो के आधार पर दर्ज किया गया, जबकि वीडियो की फॉरेनसिक जांच नहीं की गई और न ही इसकी प्रामाणिकता साबित हुई है। सोनी ने कहा, “AI के जमाने में वीडियो के साथ काट-छांट और एडिटिंग करना कोई बड़ी बात नहीं है। वीडियो की गहन जांच होनी चाहिए।
विदित हो 23 मई को मंदसौर के भानपुरा थाने में धाकड़ और एक अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने उन्हें 25 मई को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, इसके एक दिन बाद उन्हें जमानत मिल गई है।
मनोहर धाकड़ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 (सार्वजनिक अश्लीलता), 285 (जान-माल को खतरे में डालना) और 3(5) (सामूहिक अपराध) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा है, जबकि बीजेपी ने बताया है कि मनोहर धाकड़ पार्टी के प्राथमिक सदस्य नहीं है, उनकी पत्नी जिला पंचायत सदस्य है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, महिला की पहचान हो चुकी है। वो धाकड़ की नजदीकी दोस्त बताई जा रही है और मंदसौर की ही रहने वाली है, हालांकि पुलिस ने अभी तक नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन जांच में पाया गया है कि धाकड़ मंदसौर स्थित बनी गांव की वह बहु हैं जबकि धाकड़ भी इसी गाँव के बस स्टैंड पर स्थित निवास में रहते है।
सूत्रों के मुताबिक, इस महिला ने खुद यह स्वीकार किया है कि वह एक सरकारी विभाग में कार्यरत है और काफी समय से धाकड़ के संपर्क में थी। महिला का दावा है कि धाकड़ ने उसके प्रमोशन, तबादले और करियर में मदद करने का वादा किया था।
हाईवे क्यों चुना गया?
यह प्रश्न भी सबके मन में है कि धाकड़ ने आखिरकार सार्वजनिक जगह यानी एक्सप्रेसवे जैसी जगह क्यों चुनी? सूत्र बताते हैं कि महिला ने धाकड़ से कई बार निजी जगह पर मिलने से इनकार कर दिया था। धाकड़ ने फिर ऐसी जगह पर मिलने के लिए दबाव डाला जहां ‘कोई रोक-टोक न हो’ और CCTV जैसी चीज़ों का खतरा न हो। कार में उन्हें बाधा आ रही थी और एक्सप्रेसवे उन्हें एक ऐसा स्थान लगा जहां वे जल्दी-से-जल्दी रुककर मिल सकते थे और किसी को शक भी नहीं होगा।
लेकिन इनकी किस्मत खराब थी, सड़क से दूर अंधेरे में लगे खंभे पर इन दोनों ने गौर नहीं किया, जिस पर सीसीटीवी कैमरे लगे थे, और इसे कंट्रोल रूम में बैठे कर्मचारी लाइव देख रहे थे।
पुलिस ने पैसे मांगने वाले कर्मचारीयो को कंपनी से निकाले जाने की कार्रवाई के बाद वीडियो वायरल मामले में जांच तेज कर दी है और पुलिस ब्लैकमेलिंग के पहलू की भी पड़ताल कर रही है।