
विस्तृत समाचार रिपोर्ट विक्रम सेन
मुंबई । वैश्विक भू-राजनीति एक बार फिर उस दिशा में मुड़ती दिख रही है, जहां दुनिया तीन दशक पहले खड़ी थी — परमाणु हथियारों की नई होड़ के द्वार पर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक चौंकाने वाली घोषणा करते हुए रक्षा विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) को आदेश दिया है कि अमेरिका तुरंत परमाणु हथियारों के परीक्षण फिर से शुरू करे।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा “दूसरे देशों के निरंतर परीक्षण कार्यक्रमों को देखते हुए मैंने युद्ध विभाग को हमारे परमाणु हथियारों के परीक्षण की अनुमति दी है। हम किसी भी देश से पीछे नहीं रहेंगे।”
यह घोषणा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा अपनी नई परमाणु-सक्षम बुरेवेस्टनिक क्रूज मिसाइल के सफल परीक्षण के ऐलान के कुछ ही दिनों बाद आई है।
33 साल बाद अमेरिकी परमाणु परीक्षण की वापसी
अमेरिका ने अंतिम बार 23 सितंबर 1992 को नेवादा में भूमिगत परमाणु परीक्षण किया था। उस समय राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने सभी परीक्षणों पर रोक की घोषणा की थी। अब ट्रंप के इस आदेश के साथ वह विराम समाप्त हो गया है।
ट्रंप का कहना है कि यह निर्णय “तत्काल प्रभाव से लागू होगा” और अमेरिका “अन्य देशों के समान स्तर” पर अपने परीक्षण करेगा।
रूस की नई चुनौती: ‘सुपर हथियारों’ से अमेरिकी चिंता
रूस ने हाल ही में दो ऐसे हथियारों का सफल परीक्षण किया जिनसे अमेरिकी खुफिया एजेंसियों में हलचल मच गई —
1. Poseidon (पोसाइडन) — एक परमाणु-संचालित अंडरवाटर ड्रोन जो महीनों तक समुद्र के नीचे छिपा रह सकता है।
2. Burevestnik (बुरेवेस्टनिक) — परमाणु-सक्षम क्रूज मिसाइल जिसकी रेंज लगभग असीमित बताई जा रही है।
ये दोनों हथियार अमेरिकी मिसाइल-रोधी प्रणालियों को अप्रभावी बना सकते हैं। विश्लेषकों के अनुसार, “रूस ने एक बार फिर परमाणु युग की घड़ी को पीछे कर दिया है।”
ट्रंप की प्रतिक्रिया: “रूस ने सीमा लांघी है”
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट रूप से रूस का नाम तो नहीं लिया, लेकिन संकेत साफ थे। उन्होंने कहा “हमारी परमाणु क्षमता दुनिया में सर्वोच्च है। परंतु हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी देश हमें चुनौती देने की स्थिति में न रहे।”
उनका यह संदेश स्पष्ट रूप से रूस के हालिया परीक्षणों पर प्रतिक्रिया है।
रूस की सफाई: “हमारे परीक्षण परमाणु नहीं”
अमेरिका की घोषणा के कुछ घंटे बाद रूस के सुर बदल गए।
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा “पोसाइडन और बुरेवेस्टनिक के हालिया परीक्षणों को परमाणु परीक्षण नहीं कहा जा सकता। हमें उम्मीद है कि राष्ट्रपति ट्रंप को इस संबंध में सही जानकारी दी गई होगी।”
हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा “अगर कोई देश प्रतिबंध हटाता है, तो रूस भी उसके अनुसार कार्रवाई करेगा।”
इस बयान ने स्पष्ट कर दिया कि दोनों महाशक्तियों के बीच नया परमाणु तनाव औपचारिक रूप से शुरू हो चुका है।
परमाणु दौड़ का नया अध्याय
जहां एक ओर रूस अपने सुपर हथियारों की तकनीक को “राष्ट्र की सुरक्षा के लिए आवश्यक” बता रहा है, वहीं ट्रंप इसे “राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और संतुलन की रक्षा” के रूप में देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय आने वाले महीनों में चीन को भी अपने परीक्षण कार्यक्रम तेज करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
परमाणु विशेषज्ञों के मुताबिक “शीत युद्ध का अध्याय कभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ था, लेकिन अब वह फिर से सक्रिय हो गया है — और पहले से अधिक जटिल रूप में।”
अंतिम विश्लेषण:
ट्रंप का यह फैसला केवल सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी है अमेरिका अब रक्षा नीति में ‘संयम’ के बजाय ‘प्रतिघात’ की रणनीति अपना रहा है।
रूस ने चुनौती दी, और ट्रंप ने उसे स्वीकार कर लिया।
दुनिया अब फिर उस बिंदु पर खड़ी है जहां एक गलती, एक आदेश और पूरी पृथ्वी की सुरक्षा संतुलन खतरे में पड़ सकता है।