
सागर/दमोह। संभाग आयुक्त अनिल सुचारी के आदेश पर कलेक्टर दमोह ने डिप्टी कलेक्टर एवं तत्कालीन प्रभारी जिला संयोजक, जनजातीय कार्य विभाग बृजेश सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इस संबंध में जारी आदेश में उल्लेख किया गया कि वर्ष 2024-25 में संचालित अनुसूचित जाति छात्रावासों के लिए अधीक्षकों से प्राप्त मांग पत्रों के आधार पर खरीदी गई 40 लाख की सामग्री गुणवत्ता-विहीन थी।
इस खरीद में मप्र भंडार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 (संशोधित 2022) के नियम 17.4 का पालन नहीं किया गया। सामग्री की गुणवत्ता संबंधी जानकारी सात दिवस के भीतर उपार्जनकर्ता अभिकरण को ई-मेल/ई-पोर्टल के माध्यम से नहीं भेजी गई।
इसके साथ ही जैम पोर्टल पर तीनों रोल संबंधित सहायक ग्रेड-3 को सौंपे जाने एवं क्रय प्रक्रिया के समुचित पर्यवेक्षण में भी लापरवाही पाई गई। बिना आवश्यक निरीक्षण एवं नियमों के विपरीत की गई यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आती है। डिप्टी कलेक्टर का उक्त कृत्य मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम का उल्लंघन है। अतः बृजेश सिंह को मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 09 के अंतर्गत निलंबित किया गया।

ऐसे हुआ 40 लाख खरीदी का घोटाला
जनजातीय विभाग द्वारा अनुसूचित जाति छात्रावासों में रहने वाले छात्रों के लिए खेल सामग्री, गद्दा, तकिया, पलंग, टेबल, कुर्सी, गिलास, बाल्टी आदि सामग्री जैम पोर्टल से खरीदी गई थी। यह सामग्री न सिर्फ घटिया गुणवत्ता की थी, बल्कि खरीद मूल्य भी चौंकाने वाला था। विभाग ने 2 रुपये की सामग्री को 200 रुपये में खरीदा। मामले की शिकायत कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर से की गई। उन्होंने जांच के आदेश दिए, जिसके बाद 2 महीने चली जांच में अपर कलेक्टर मीना मसराम ने 40 लाख रुपए के घोटाले की पुष्टि की और दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की।
एसपी ने इसलिए रिपोर्ट दर्ज नहीं की
जांच रिपोर्ट और फाइल एसपी को भेजी गई। लेकिन, एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने यह कहते हुए फाइल वापस लौटा दी, कि जांच प्रतिवेदन में दोषियों के नाम, पद और स्थान का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। सिर्फ एक साधारण जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस एफआईआर दर्ज कैसे कर सकती है। बाद में 40 लाख रुपए के इस घोटाले पर कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने डिप्टी कलेक्टर बृजेश सिंह के निलंबन की पुष्टि की।