
गोंडा। एक फर्जी कंपनी खोलकर रूस में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब डेढ़ करोड़ के फ्रॉड के कहानी सामने आई। यहां करीब 200 से अधिक युवाओं से लाखों रुपए लिए। उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर बुलाया गया, जहां कई जिलों के युवा पहुंचे, तब उनको अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला।
विदेश में नौकरी का सपना पाले युवाओं के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। गोंडा में मल्टी इंटरनेशनल इमीग्रेशन काउंसलिंग नाम की एक कथित कंपनी ने कई जिलों के करीब 200 युवाओं से ठगी की। बाकायदा इंटरव्यू में सेलेक्ट कर युवाओं से एक-दो लाख रुपए लेकर ऑफर लेटर दिया। दिल्ली एयरपोर्ट पर वीजा-पासपोर्ट, फ्लाइट का टिकट देने का आश्वासन देकर बुलाया गया। काफी युवा जब दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे, तो उन्हें वहां कोई नहीं मिला. इसके बाद वापस गोंडा आए और कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई।
नौकरी का फर्जी वादा
ठगी का शिकार हुए युवाओं ने कहा कि गोंडा के उतरौला रोड नवीन सब्जी मंडी के पास एक बिल्डिंग में मल्टी इंटरनेशनल इमीग्रेशन काउंसलिंग कंपनी ने उन्हें रूस में ड्राइवर, हेल्पर, कारपेंटर और अन्य ट्रेडों में 80 हजार रूबल पर नौकरी का वादा किया था। मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों से ताल्लुक रखने वाले युवाओं ने किसी तरह कंपनी को 1 लाख से 2 लाख रुपये तक दिए। जालसाजों की साजिश इतनी शातिर थी कि उन्होंने बाकायदा युवाओं को इंटरव्यू में सेलेक्शन के बाद ऑफर लेटर भी दिया। 24 फरवरी को दिल्ली बुलाया।
सभी को दिल्ली बुलाया, पर वहां कोई नहीं मिला
कंपनी के मैनेजर ने सभी को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने को कहा और दावा किया कि वीजा-पासपोर्ट, फ्लाइट का टिकट एयरपोर्ट पर हैंडओवर किया जाएगा। जब बाराबंकी, गोंडा. बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती समेत अन्य जिलों के डेढ़ दो सौ युवक दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे, तो वहां न कोई वीजा मिला और न कंपनी का कोई प्रतिनिधि था। मैनेजर ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया, जिसके बाद युवाओं के पैरों तले जमीन खिसक गई। हताश युवक वापस गोंडा लौटे और कंपनी के दफ्तर पहुंचे, तो वहां ताला लटका मिला।
पीड़ित ने शिकायत में बताई पूरी कहानी
शिकायत में एक पीड़ित ने कहा कि मैंने फेसबुक पर मल्टी इंटरनेशनल इमिग्रेशन काउंसिल का एड देखा था। गोंडा में उस ऑफिस में जाकर मिला तो एक व्यक्ति ने खुद को कंपनी का मालिक बताया. उसने बोला कि मैं लोगों को रोजगार दिलाने के लिए मॉस्को रूस भेजने के लिए वीजा बनवाता हूं. उसने मुझे भी रूस भेजने के लिए वीजा बनवाने का झांसा दिया।
उसका नाम विवेक कुमार था, उसके ऑफिस में उस समय उसके एजेंट जल्फिकार, मनीषा, सारिका, आर्यन, दीपक नाम के लोग भी मौजूद थे। इन लोगों ने विवेक की बात का समर्थन करते हुए मुझे भरोसा दिलाया। औपचारिकताओं के बाद पैसे 30,000 रुपये ट्रांसफर किए, 6 दिन बाद एक लाख रुपये कैश विवेक कुमार को दिए।
विवेक ने ऑफिस में बुलाकर फर्जी ऑफर लेटर दिया और कहा कि आपको इसके आधार पर मॉस्को में नौकरी मिल जाएगी। इसके बाद उनके कर्मचारियों ने दिल्ली एयरपोर्ट आने को कहा. वहां पहुंचा तो देखा कि मेरे जैसे करीब 200 लोग और भी मौजूद थे। पासपोर्ट और सीवी भी अपने पास रख लिया था. बाद में मोबाइल बंद कर दिया। हम लोगों में से प्रत्येक व्यक्ति का कुल मिलाकर करीब डेढ़ करोड़ रुपये हड़प लिया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है।