
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में बुधवार को प्रश्नोत्तरकाल में सहारा समूह से जुड़े मामलों और निवेशकों की धनवापसी का मुद्दा कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने जोरदार ढंग से उठाया। प्रश्न के उत्तर में मंत्री शिवाजी पटेल ने कहा कि यह गंभीर और चिंताजनक विषय है। क्योंकि, बड़ी संख्या में छोटे निवेशकों की राशि इसमें अटकी है। उन्होंने बताया कि विधानसभा सचिवालय द्वारा 1 जनवरी 2024 तक की स्थिति मांगी गई थी, जिसके अनुसार चार नई एफआईआर दर्ज हुई हैं।
सदन में मंत्री ने जवाब दिया
मंत्री ने स्पष्ट किया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। मुख्य प्रकरण कोतवाली मुरैना में दर्ज है और अन्य संबंधित प्रकरण उसी में संलग्न कर जांच की जा रही है। पुलिस नियमानुसार सभी मामलों की जांच कर रही है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार इस प्रकरण में अब तक 9 लाख 6 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से लगभग 7.30 लाख आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। राशि के संदर्भ में मंत्री ने बताया कि कुल 6679 करोड़ रुपये में से अब तक 355 करोड़ रुपये निवेशकों को वितरित किए गए हैं।
₹6300 करोड़ अभी भी निवेशकों को मिलना बाकी
इस पर जयवर्धन सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह कुल राशि का मात्र लगभग 5 प्रतिशत है। उनके अनुसार करीब 6300 करोड़ रुपये अभी भी निवेशकों को मिलना बाकी है, जो सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए। इससे पूर्व जयवर्धन सिंह ने सरकार से सहारा इंडिया कंपनी के विरुद्ध दर्ज प्रकरणों और निवेशकों की राशि वापसी पर विस्तृत जानकारी मांगी, जबकि मंत्री शिवाजी पटेल ने विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट की। प्रश्नकाल के दौरान जयवर्धन सिंह ने वर्ष 2020 से अब तक सहारा इंडिया के खिलाफ दर्ज एफआईआर की संख्या और की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी।
सरकार के पास अधूरी जानकारी का आरोप
उनका कहना था कि सरकार द्वारा दी गई जानकारी अपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग ने केवल भोपाल से संबंधित प्रकरणों की जानकारी दी है, जबकि उनके पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले छह वर्षों में 123 एफआईआर दर्ज हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे निवेशकों की गाढ़ी कमाई इस मामले में फंसी हुई है, इसलिए सरकार को पूरी पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए।
