
मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी और राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा पवार को राज्यपाल ने महाराष्ट्र की नई उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी। महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री के पद पर काबिज़ होने वाली वे पहली महिला हैं। उन्होंने शाम 5 बजे लोक भवन में शपथ ली। उन्हें राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने पद की शपथ दिलाई। अजित पवार के निधन के तीसरे दिन ही सुनेत्रा पवार के शपथ लेने पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह जल्दबाजी क्यों की गई।
सुनेत्रा पवार के पति अजित पवार का 28 जनवरी को बारामती में एक विमान हादसे में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद ये पद ख़ाली हुआ था। एसीपी नेताओं ने सुनेत्रा पवार को यह पद संभालने के लिए जिसे उन्होंने स्वीकार लिया और आज शपथ ली। 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव बीजेपी ने एनसीपी और शिवसेना (शिंदे गुट) के साथ मिलकर लड़ा था। उसी फार्मूले के तहत अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद दिया गया था और उनके निधन के बाद उनकी पत्नी को उस कुर्सी पर बैठाया गया है।
बीजेपी की मजबूरी है सुनेत्रा को साधना
सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के साथ अच्छा ख़ासा बहुमत होने के बावजूद बीजेपी ने सुनेत्रा पवार को यह पद देने में जल्दबाजी क्यों की। महाराष्ट्र विधानसभा में 288 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 145 की ज़रूरत होती है। गठबंधन में चुनाव लड़ने के बावजूद बीजेपी अकेले दम पर बहुमत हासिल करने के क़रीब पहुंच गई थी। बीजेपी को 132 सीटों पर जीत मिली। इसके बावजूद बीजेपी ने 57 सीट वाली शिवसेना और 41 सीट वाली एनसीपी को सरकार का हिस्सा बनाया।
शपथ की जल्दबाजी के पीछे की अंतर्कथा
सुनेत्रा पवार को इतनी जल्दी उपमुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने महाराष्ट्र की राजनीति में कई पहलुओं को एक साथ साधने की कोशिश की है। बीजेपी बहुमत के क़रीब तो है, लेकिन उनके पास अकेले बहुमत नहीं है। महाराष्ट्र की राजनीति में दो बड़े गुट शिवसेना और एनसीपी हैं। शिवसेना की विचारधारा बीजेपी जैसी है और उनसे उन्हें ख़तरा नहीं है।
नगर निगम चुनाव के नतीजों से यह भी पता चल गया कि शिवसेना की ताक़त मुंबई तक ही सीमित है और शिंदे गुट बीजेपी के कंट्रोल में है। इसके अलावा महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी बड़ी ताक़त है। यह ताकत कोऑपरेटिव, शुगर फैक्ट्री और मराठा बहुल इलाक़ों से आती है। वो एनसीपी के साथ बने रहने वाली ताक़त है और सत्ता पर ज़्यादा निर्भर नहीं है। उस ताक़त में सेंधमारी करना हमेशा ही बीजेपी का मक़सद रहा है।
आज भी बीजेपी घबराती है शरद पवार से
शरद पवार नाम का जादू अभी भी चलता है। उसी के असर को कम करने के लिए बीजेपी ने पहले अजित पवार को और अब सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया है। महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ समय से एनसीपी के दोनों गुटों के साथ आने की चर्चा भी हो रही है। अजित पवार के निधन के बाद इन चर्चाओं में तेज़ी देखने को मिली है। बीजेपी इस खतरे से बचना चाहती है, इसीलिए उसने अजित पवार की विरासत को साथ रखने में कोई समय नहीं लगाया और सुनेत्रा पवार को तीन दिन में शपथ दिलाना उसी रणनीति का हिस्सा है।
