
इंदौर। शहर के जेवरात के सराफा व्यापारी लंबे समय से यहां बढ़ती चाट और खानपान कीअन्य दुकानों की संख्या, हो-हल्ले, दुर्व्यवहार, नियमों का पालन न करने और सराफा दुकानें बंद होने से पहले अपनी दुकान लगाने जैसी शिकायतें कर रहे थे। इसके बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पहले घोषणा की थी कि चौपाटी का पुराना और परंपरागत रूप कायम रखा जाएगा। इसके बाद 150 में से सिर्फ 69 दुकानों को अनुमति देकर बाकी दुकानें हटा दी गई।
इस वजह से पिछले कुछ महीनों से सराफा की चाट चौपाटी विवादों का केंद्र बन गई है। इससे करीब 80 दुकानदारों की रोजी रोटी पर संकट आ गया जब नगर निगम ने 69 दुकानों की एक लिस्ट जारी की। इसमें कहा गया कि अब चौपाटी पर केवल यही दुकान लग सकेगी जिनका नाम इस लिस्ट में है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पहले घोषणा की थी कि चौपाटी का पुराना और परंपरागत रूप कायम रखा जाएगा और केवल पुरातन दुकानों को ही रखा जाएगा। क्योंकि, नगर निगम का उद्देश्य चौपाटी को उसकी धरोहर के रूप में संरक्षित करना है।
75 साल पुरानी दुकान पर भी खतरा
सराफा रात्रि चौपाटी संगठन के अध्यक्ष राम गुप्ता ने बताया की 15 से 75 सालों से जो पारंपरिक रूप से दुकान लग रही है, ऐसी दुकानों का इस सूची में नाम शामिल किया गया है। इस सूची को बनाने में 11 लोगों का चौपाटी का पैनल, सर्राफा व्यापारी संगठन, महापौर और नगर निगम शामिल है किसी एक की मर्जी से सूची को नहीं बनाया गया। फिलहाल यह सूची भी स्थाई नहीं है। अभी इन चीजों पर विचार विमर्श होना बाकी है हमारे सभी साथियों को भी थोड़ा धीरे रखने की जरूरत है।
जिन दुकानदारों की दुकानें हटाई गई हैं उनका आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई के हटाया जा रहा है कई दुकानदारों का कहना था कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से यहां दुकानें लगा रहे हैं और उनका नाम सूची से हटा दिया गया है। जबकि, कुछ नए या विवादित नाम शामिल हैं। दुकानदारों का यह भी कहना है कि इसके लिए उनकी राय नहीं ली गई और मनमाने ढंग से यह लिस्ट तैयार की गई।
इस मामले पर नगर निगम का पक्ष बताया गया कि निगम का उद्देश्य चौपाटी के स्वरूप को व्यवस्थित, सुरक्षित और अनुशासित करना है। फिलहाल जो सूची में नाम शामिल किए गए हैं, उनको दुकान लगाने की अनुमति दी गई है। बाकी जिन लोगों की शिकायत है जिनका लिस्ट में नाम नहीं है, उनसे लिखित जानकारी मांगी गई है। आगे महापौर, विधायक, और व्यापारी एसोसिएशन के लोग जो भी मिलकर निर्णय लेंगे उसके उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
