

बड़वानी। शनिवार को जिले के पुलिस अधीक्षक जगदीश डावर की सेवानिवृत्ति केवल एक सरकारी अफसर की विदाई तक सीमित नहीं रही। शहर का नजारा देखकर ऐसा लग रहा था मानो किसी कद्दावर जननेता का शक्ति प्रदर्शन हो। जिला मुख्यालय से लेकर गलियों तक झंडे, बैनर और पोस्टर पटे हुए थे। आदिवासी वाद्य यंत्रों की थाप और समर्थकों के हुजूम ने इस फेयरवेल को एक राजनीतिक रैली का रंग दे दिया। अब आम जनता के बीच चर्चा है कि वर्दी उतरने के बाद क्या डावर खादी पहनने की तैयारी में हैं?
गृह जिले में ‘अपनों’ के बीच पारी
निवाली क्षेत्र के मूल निवासी जगदीश डावर का अपने ही गृह जिले में एसपी रहना शुरुआत से ही सुर्खियों में रहा। सेंधवा से शिक्षा पाने वाले डावर की यहाँ तैनाती पर पहले भी सवाल उठे थे। प्रशासनिक गलियारों में उनकी पारी को ‘औसत’ माना गया, जहाँ पुनीत गहलोत के जाने के बाद थाना प्रभारियों का दबदबा बढ़ गया और कई क्षेत्रों में पुलिसिया कार्यप्रणाली को लेकर उंगलियां भी उठीं। बावजूद इसके, उन्होंने अपनी ‘जन्मभूमि’ पर सेवा की अंतिम पारी पूरी की।
विदाई समारोह में उमड़ा ‘जनसैलाब’
डावर ने अपने कार्यकाल में जनसंवाद और सरल व्यवहार के जरिए जनता के एक वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत की। रिटायरमेंट से ठीक पहले एसपी से सीनियर एसपी (एसएसपी) के पद पर उनकी पदोन्नति ने समर्थकों के उत्साह को दोगुना कर दिया। शनिवार को शहर के एक निजी गार्डन में आयोजित समारोह में जिस तरह व्यापारी, प्रशासनिक अधिकारी और समाज के प्रमुख चेहरे जुटे, उसने कई सियासी संकेत दे दिए।
भाजपा-कांग्रेस के दिग्गजों की मौजूदगी
रिटायरमेंट के दिन भाजपा जिलाध्यक्ष अजय यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष ओम सोनी और कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई की मौजूदगी ने चर्चाओं को हवा दे दी है। जिले के राजनीतिक पंडितों का मानना है कि वर्दी भले ही उतर गई हो, लेकिन राजनीति की नई स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है। हालांकि, डावर खुद इसे जनता का स्नेह बताते हुए कहते हैं कि वे आगे भी लोगों की समस्याओं के लिए उपलब्ध रहेंगे।
क्या कहता है पारिवारिक समीकरण?
इस जश्न की तैयारियां हफ़्तों पहले से जारी थीं। राजनीतिक संकेतों को इस बात से भी बल मिलता है कि उनके भतीजे विकास डावर क्षेत्र के सक्रिय चेहरे हैं, जो कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम चुके हैं। चर्चा यह भी है कि डावर के पास विभिन्न दलों से चुनावी मैदान में उतरने के प्रस्ताव आ रहे हैं।
