
इंदौर। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में न तो अलग ओपीडी ब्लॉक है और कई विभागों में प्रोफेसर के पद भी खाली पड़े हैं। इसके बावजूद प्रबंधन 1 अप्रैल से 600 रु. फीस वाली पेड ओपीडी शुरू करने की तैयारी में है। यह फैसला सवालों के घेरे में है।
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थिति यह है कि कई विभाग एक या दो डॉक्टरों के भरोसे चल रहे हैं। जबकि, कुछ में तो विभाग अध्यक्ष तक नहीं हैं। हर विभाग में डॉक्टरों के बैठने के लिए सिर्फ दो चैंबर हैं। नियमित ओपीडी व्यवस्था ही पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है। अस्पताल की क्षमता 400 बेड की बताई जाती है। लेकिन, 11 मार्च को रिकॉर्ड में केवल 143 मरीज भर्ती मिले।
43 मरीज आईसीयू में
इनमें 43 मरीज आईसीयू में थे और उसी दिन 17 नए मरीज भर्ती हुए। अस्पताल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस संख्या में डायलिसिस के लिए आने वाले मरीज भी शामिल हैं। उन्हें अलग कर दिया जाए तो वास्तविक भर्ती मरीजों की संख्या इससे भी कम है। आयुष्मान योजना के तहत भी सिर्फ 13 मरीज दर्ज थे, जिनमें से 7 बच्चे पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में भर्ती थे।
नियम बने, लागू नहीं
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 2018 में सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के संचालन के संशोधित नियम जारी किए थे। इनमें नियमित ओपीडी समय के बाद पेड ओपीडी का प्रावधान रखा गया था। लेकिन इंदौर में यह व्यवस्था करीब 8 साल तक लागू ही नहीं हो सकी। 5 विभाग में प्रोफेसर, दो में असिस्टेंट प्रोफेसर तक नहीं हैं। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, प्लास्टिक रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी और हेड एंड नेक सर्जरी में प्रोफेसर नहीं हैं। कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी में असि. प्रोफेसर नहीं हैं। 11 सर्जिकल विभागों के लिए एनेस्थीसिया में सिर्फ 5 डॉक्टर हैं। अधिकांश विभागों में एक-दो विशेषज्ञों के भरोसे इलाज चल रहा है।
संचालन स्पष्ट नहीं
2018 में बने नियमों के अनुसार पेड ओपीडी से मिलने वाली राशि का 50% डॉक्टरों को प्रोत्साहन के रूप में दिया जा सकता है। जबकि, सर्जरी से होने वाले राजस्व का 20% हिस्सा भी डॉक्टरों को मिलने की बात कही गई। लेकिन, इस आदेश में यह स्पष्ट नहीं कि ओपीडी किस भवन में चलेगी, पंजीयन प्रक्रिया क्या होगी और अपॉइंटमेंट सिस्टम कैसे लागू होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले नियमित ओपीडी और स्टाफ व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है।