
नई दिल्ली। रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह ने ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में देर रात अंतिम सांस ली। वे चार दिन से अस्पताल में भर्ती थे। खानचंद सिंह स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। रिंकू की कामयाबी के पीछे उनके पिता का लंबा संघर्ष रहा। उन्हें गंभीर हालत में करीब तीन दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिता की गंभीर हालत की सूचना मिलते ही रिंकू सिंह टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच से अपने पिता से मिलने आए थे। लेकिन, जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से पहले दोबारा टीम के साथ जुड़ गए थे। उस मैच में वे टीम में नहीं थे, पर फील्डिंग करते दिखाई दिए थे।
क्रिकेटर रिंकू सिंह का जीवन
अलीगढ़ के गोविला गैस एजेंसी पर काम करने वाले खानचंद सिंह के यहां हुआ। रिंकू के पिता गैस एजेंसी में हॉकर का काम करते थे। रिंकू पांच भाई और एक बहन में तीसरे नंबर के हैं। रिंकू के पिता खानचंद ने गैस एजेंसी के दिए हुए दो कमरों के मकान में अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर गुजर बसर किया। रिंकू को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था। पिता खानचंद पूरे दिन कंधों पर सिलिंडर ढोकर जो कमाते थे, उसमें से ही रिंकू के लिए गेंद, बल्ला आदि सामान लाकर देते थे।
कोच मसूद जफर अमीनी ने बताया कि पिता रिंकू सिंह के क्रिकेट में शौक को देखते हुए अलीगढ़ के अहिल्याबाई होल्कर स्टेडियम में लेकर आए। जहां तैयारी करते हुए रिंकू सिंह ने अंडर 16 खेला। डीपीएस के वर्ल्ड कप में रिंकू को बतौर आमंत्रित खिलाड़ी खिलाया गया, जहां रिंकू ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए मैन ऑफ द सीरिज हासिल की। इसके बाद रिंकू अंडर 19 यूपी खेला, फिर रणजी और फिर आईपीएल में अपना जलवा दिखाया।
रिंकू पर नहीं आने दिया जिम्मेदारी का बोझ
रिंकू सिंह के जन्म से कामयाब होने के बाद तक उनके पिता खानचंद कंधों पर सिलिंडर ढोते रहे, पर रिंकू हमेशा क्रिकेट में रहे। रिंकू को कभी भी पिता ने सिलिंडर ढोने की नौबत नहीं आने दी।
आईपीएल में लकी रही 35 नंबर जर्सी
2012 में स्कूल क्रिकेट वर्ल्ड कप में डीपीएस की ओर खेलते हुए 35 नंबर की जर्सी पहनी थी। वर्ल्ड कप में रिंकू का बल्ला खूब गरजा था। आईपीएल-11 में रिंकू तीन नंबर की जर्सी में खेले थे। मगर, उनकी बल्लेबाजी फीकी नजर आयी थी। आईपीएल-12 में केकेआर के रिंकू ने 35 नंबर जर्सी पहनी। इस मौके को रिंकू ने भुनाने की कोशिश की, जिसमें 25 गेंद में एक चौका और दो छक्कों के सहयोग से 30 रन जड़ दिए। रिंकू को केकेआर ने 80 लाख रुपये में रिटेन किया था। आईपीएल-11 में केकेआर ने रिंकू को 80 लाख रुपये में खरीदा था।
जिस मैच ने रिंकू को रातोंरात स्टार बनाया
आखिरी ओवर में केकेआर को जीत के लिए 29 रन की जरूरत थी और क्रीज पर रिंकू सिंह थे। उनके घरवालों ने भी जीत की उम्मीद छोड़ दी थी। फिर भी आखिरी गेंद फेंके जाने तक सभी टीवी स्क्रीन के सामने बैठे रहे। रिंकू के पिता खानचंद, मां बीना देवी सहित पूरा परिवार रिंकू सिंह का मैच देख रहा था। रिंकू के छोटे भाई जीतू ने बताया था कि आईपीएल में पहली बार भैया ने अच्छा खेला। आखिरी ओवर में जब 29 रन बनाने थे, तो सभी ने मान लिया था कि मैच जीतना मुश्किल होगा, लेकिन कहते हैं कि जब तक क्रिकेट में आखिरी गेंद न फेंक दी जाए किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होती है। ऐसा ही इस मैच में भी देखने को मिला, जब एक गेंद पर जीत के लिए चार बनाने थे, जिसे भैया ने छक्का मारकर हारी बाजी पलट दी। भैया की बल्लेबाजी और केकेआर की जीत पर मम्मी, पापा और घर वाले सभी खुश हुए। जश्न मनाने लगे। इसके बाद लोगों के फोन बधाई देने के लिए आने लगे।
लगातार पांच छक्कों पर झूम उठा था अलीगढ़
जैसे ही इस मैच में रिंकू सिंह ने आखिरी गेंद को सीमा पार भेजा था, वैसे ही शहर और अलीगढ़ स्पोर्ट्स एसोसिएशन के मैदान पर जश्न मनाया जाने लगा। मिठाई बांटी गई थी। रिंकू को शानदार बल्लेबाजी करने के लिए दुआएं दी गईं। रिंकू के पांच छक्के पर क्रिकेट प्रेमी रीझ गए। रिंकू सिंह महुआ खेड़ा स्थित अलीगढ़ स्पोर्ट्स एसोसिएशन के मैदान पर अभ्यास करते थे।
रिंकू की सफलता में इन लोगों का हाथ
गुजरात टाइटंस के खिलाफ इस जीत के बाद रिंकू सिंह को आगे बढ़ाने वाले अर्जुन सिंह फकीरा ने कहा कि उन्हें रिंकू की क्षमता पर पूरा भरोसा था, जिसे उन्होंने दुनिया को अपनी बल्लेबाजी से बता दिया। रिंकू के कोच मसूदुज्जफर अमीनी ने कहा था कि रिंकू की बल्लेबाजी में रोजाना निखार आ रहा है। हर मैच में स्वयं को परिपक्व बना रहा है। रिंकू ने जिस तरह से मैच छीना है, वह काबिले तारीफ है।
