
देहरादून। सरसंघचालक मोहन भागवत का आरक्षण को लेकर एक बार फिर बयान दिया। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चुनावी माहौल के बीच मोहन भागवत के बयान ने हलचल तेज कर दी। पहले भी संघ प्रमुख की ओर से आरक्षण को लेकर ऐसा बयान दिया, जिस पर राजनीति गरमाती रही। इस बार मोहन भागवत आरक्षण के पक्ष में बयान देते दिखे। संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि लोगों को गलतफहमी है, संघ भाजपा को नियंत्रित करता है। संघ को सत्ता नहीं चाहिए। भले ही स्वयंसेवक सत्ता में रहें। वहां जाने वाले स्वयंसेवक संघ से त्यागपत्र देकर जाते हैं। वे बिना संघ के चल सकते हैं।
रविवार को गढ़ी कैंट स्थित कल्चरल सेंटर में संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की कड़ी में सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि जब तक समाज में भेदभाव है, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। भाजपा पर संघ के नियंत्रण पर भी उन्होंने बड़ी बात कही। आरएसएस प्रमुख के आरक्षण को लेकर इस बयान को वर्तमान राजनीतिक परिपेक्ष्य में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोहन भागवत ने कहा कि संविधान में आरक्षण के तय प्रावधानों का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक चेतना का असर दिख रहा है। जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर संपन्न हो चुके हैं, वे अब खुद इसका लाभ छोड़ने लगे हैं।
जब तक सामाजिक विषमता, तब तक भेदभाव
संघ प्रमुख ने कहा कि जब तक सामाजिक विषमता है, तब तक भेदभाव है। शहरों में अलग तरीके से अस्पृश्यता के मामले देखे जाते हैं। गांवों में अलग तरीके से भेदभाव की बात सामने आती है। स्वतंत्रता, समानता का सभी को अधिकार है। इस भेदभाव को सामाजिक समरसता से ही समाप्त किया जा सकता है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की कार्यप्रणाली का जिक्र किया। उन्होंने संघ में जातीय भेदभाव न होने की बात कही। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के की दिशा में संघ लगातार सक्रिय है। संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती। उन्होंने कहा, हिंदू शास्त्रों में भी सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव की कोई जगह नहीं है।
टैरिफ के डर को लेकर हमला
आरएसएस सरसंघचालक ने कहा कि हमें राष्ट्र को इतना मजबूत बनाना होगा कि कोई भी हमें टैरिफ का डर न दिखा पाए। जब राष्ट्र सुरक्षित और प्रतिष्ठित होता है, तो विश्व में भी हम सुरक्षित होते हैं। उन्होंने कहा कि अपने स्वदेशी सिस्टम को हमें मजबूत बनाना होगा। तभी हम विकसित राष्ट्र, विश्व गुरु बनेंगे। मोहन भागवत ने कहा कि आने वाले समय में विश्व का हर रास्ता भारत से ही होकर निकलेगा।
सबको एक सूत्र में जोड़ना ही हिंदुत्व
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत के सभी लोगों का डीएनए एक ही है। ये बात वैज्ञानिक प्रमाणित है। उन्होंने कहा कि खानपान, पूजा, रीति रिवाज भले ही अलग-अलग हो, लेकिन इन सबसे ऊपर सभी को आपस में एक सूत्र में जोड़ना ही हिंदुत्व है। उन्होंने कहा कि अखंड भारत के क्षेत्र से जुड़े सभी लोग, भले ही वे किसी भी धर्म के हों, वे आज भी वंशावली देखते हैं। संघ प्रमुख ने आरएसएस की आजादी की लड़ाई में भूमिका की भी चर्चा की।
आरएसएस चीफ ने कहा कि संघ का देश की आजादी में अहम योगदान है। आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार कभी भी अंग्रेजों के आगे नहीं झुके। वे पश्चिम भारत में क्रांतिकारी समिति के कोर कमेटी सदस्य रहे। राजद्रोह का केस उन पर लगा। रासबिहारी बोस, वीर सावरकर, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, अरविंद बोस के साथ मुहिम में रहे। बाद में उन्होंने गुलामी जैसे हालात पैदा ही न हों, इसके लिए संघ की स्थापना की।
उनका बयान चुनाव से जुड़ रहा
संघ प्रमुख के आरक्षण को लेकर आए बयान को चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी बहुजन समाज में अपनी पकड़ को और मजबूत करने की कोशिश में है। आरएसएस की ओर से भी विस्तार योजनाएं चल रही हैं। ऐसे में आरक्षण के समर्थन में बयान इस वर्ग को संघ के प्रति आकर्षित करने वाला माना जा सकता है। साथ ही, भाजपा पर संघ का नियंत्रण न होने की बात कहकर संघ प्रमुख ने सत्ता से आरएसएस के दूर रहने की बात कही।