
भोपाल। नरेंद्र मोदी सरकार के ‘चीता प्रोजेक्ट’ ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान को वैश्विक मानचित्र पर ला दिया। जब से चीतों को यहां लाया गया सबकी निगाहें कुनो के जंगलों पर टिक गई। कूनो में लाए गए चीतों के बाद उनका कुनबा बढ़ने लगा है। अब चीतों की संख्या 38 पहुंच गई। चीतों के आने पहले ये जंगल खाली नहीं था। यहां तेंदुए, भेड़िये, लकड़बग्घे ही नहीं गिद्ध भी मिलते थे।
भेड़िया
भारतीय भेड़िया उपमहाद्वीप के सबसे मायावी मांसाहारी जीवों में से एक है। कुनो के घास भरे मैदान और झाड़ीदार जंगल इन दुबले-पतले और लंबे पैरों वाले शिकारियों के लिए अच्छा आवास प्रदान करता है। छोटे झुंडों में रहकर भेड़िये शाकाहारी जीवों, विशेष रूप से छोटे खुर वाले जानवरों को निशाना बनाते हैं। यहां इनकी संख्या अच्छी मानी जा रही।
तेंदुआ
कूनो में सिर्फ चीते ही नहीं, इस क्षेत्र में ‘बाहुबली’ नाम का सबसे साहसी तेंदुआ भी रहता है। कुनो के सबसे खूबसूरत इलाकों पर इसका दबदबा है। भले ही चीतों की तुलना में ये कम चर्चित है। लेकिन, ये भारतीय तेंदुआ हमेशा से कुनो का छिपा हुआ शिकारी रहा है। तेंदुए अपने अनुकूल और एकांत वाली जगहें पसंद करते हैं। ऐसे में कुनो के जंगल उनके लिए बेहद खास हैं। तेंदुओं के होने की वजह से यहां चीतल, सांभर और लंगूर भी जैसे कई शिकारों की मौजूदगी भी संकेत देती है।
गिद्ध
यहां केवल जमीनी शिकारी जीव ही नहीं मिलते हैं। यहां लुप्तप्राय प्रजातियों में कई गिद्ध भी देखे गए हैं। हालांकि, 1990 के दशक में पशु मेडिकल दवाओं के प्रदूषण के कारण भारत में गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट आई थी। फिर भी यहां उनकी आबादी है। कुनो जैसे संरक्षित वन क्षेत्र उनके लिए एक महत्वपूर्ण आवास हैं।
लकड़बग्घा
कूनो में अगर किसी एक जीव को गलत समझा जाता है, तो वह है धारीदार लकड़बग्घा है। अक्सर इसे महज़ मृत जानवरों का मांस खाने वाला जानवर मान लिया जाता है। हालांकि, यह निशाचर मांसाहारी जीव पारिस्थितिकी तंत्र में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लकड़बग्घे मृत जानवरों के शवों को साफ करते हैं, जिससे बीमारियों का प्रसार रुकता है और पोषक तत्व मिट्टी में वापस मिल जाते हैं।
चिंकारा
कूनो के खुले झाड़ीदार और घास के मैदानों में फुर्तीले और आकर्षक चिंकारा खुलकर रहते हैं। अन्य हिरण प्रजातियों की तुलना में ये छोटे होते हैं। गज़ेल शुष्क परिस्थितियों के अनुकूल ढल जाते हैं और उन्हें बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। यह ध्यान देने योग्य है कि वे न केवल चीतों बल्कि तेंदुओं और भेड़ियों के लिए भी शिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
