
इंदौर। शहर में चल रहे मेट्रो प्रोजेक्ट, फ्लायओवर निर्माण और सड़कों की खुदाई का असर अब हवा की गुणवत्ता पर साफ दिखाई देने लगा है। लगातार निर्माण गतिविधियों और धूल के कारण कई इलाकों की हवा प्रदूषित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो लोगों की सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
हाल के दिनों में रीगल चौराहा, एयरपोर्ट क्षेत्र और विजय नगर इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 100 से ऊपर दर्ज किया गया है, जो सामान्य स्तर से अधिक माना जाता है। हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों का स्वरूप भी बदल रहा है। पहले जहां मुख्य रूप से पीएम-10, कार्बन और सल्फर की मात्रा अधिक रहती थी, वहीं अब पीएम-2.5 जैसे सूक्ष्म कणों के साथ नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसों का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है।
महीन कणों का स्तर अधिक
हवा में मौजूद सूक्ष्म कण पीएम-2.5 की मात्रा कई स्थानों पर तय सीमा से काफी ऊपर पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इसका सुरक्षित स्तर 25 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर माना जाता है, लेकिन एयरपोर्ट क्षेत्र में यह 350 से 480 तक दर्ज किया गया। इसी तरह नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा भी कई स्थानों पर तय सीमा से दोगुनी तक पाई गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक दिन के कुछ समय में प्रदूषण का स्तर दो से तीन घंटे के लिए रेड और ऑरेंज जोन में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति लंबे समय तक रहने पर सांस से जुड़ी बीमारियां, आंखों में जलन और रक्त से संबंधित समस्याएं बढ़ सकती हैं।
छोटी ग्वालटोली क्षेत्र गंभीर
शहर में हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए आठ स्थानों पर मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं। हालांकि इनमें से चार स्टेशन पिछले दो महीनों से तकनीकी जांच में होने के कारण नियमित आंकड़े उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। फिलहाल मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुख्य रूप से रीगल क्षेत्र से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर ही शहर की हवा की स्थिति का अनुमान लगा रहा है। जहां डेटा उपलब्ध है, वहां पिछले सप्ताह के दौरान कई दिनों में एक्यूआई खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। इन दिनों मुख्य प्रदूषक के रूप में नाइट्रोजन ऑक्साइड या पीएम-2.5 सामने आया।
ऑनलाइन सिस्टम से संकेत
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ऑनलाइन मॉनिटरिंग नेटवर्क से शहर के छह केंद्र जुड़े हुए हैं, लेकिन वेबसाइट पर नियमित रूप से केवल तीन केंद्रों का डेटा ही दिखाई देता है। उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से यह संकेत मिला है कि शहर में प्रदूषण के स्वरूप में बदलाव आ रहा है और सूक्ष्म कणों का प्रभाव पहले की तुलना में अधिक हो गया है।
एयरपोर्ट क्षेत्र में बढ़ा प्रदूषण
एयरपोर्ट क्षेत्र के आंकड़े हाल के दिनों में सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाले रहे हैं। 5 से 7 मार्च के बीच यहां एक्यूआई 100 से नीचे था, लेकिन 8 मार्च से इसमें लगातार बढ़ोतरी देखी गई। 8 मार्च को एक्यूआई 148 दर्ज किया गया, 9 मार्च को 146 और 10 मार्च को यह बढ़कर 170 तक पहुंच गया। इस क्षेत्र में मेट्रो के अंडरग्राउंड निर्माण का काम लगातार चल रहा है, जिसे बढ़ते प्रदूषण का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
कई घंटे रेड जोन
रीगल और छोटी ग्वालटोली क्षेत्र में लगे मॉनिटरिंग सिस्टम के अनुसार दिन में तीन से चार घंटे तक पीएम-10 का स्तर रेड जोन में पहुंच जाता है। यहां इसका अधिकतम स्तर 265 से भी ऊपर दर्ज किया गया, जबकि नाइट्रोजन ऑक्साइड का स्तर करीब 180 तक पहुंच गया। दूसरी ओर मेघदूत पार्क क्षेत्र में औसत एक्यूआई 100 या उससे कम बना हुआ है, हालांकि यहां भी कुछ समय के लिए पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर 200 से 300 तक पहुंच जाता है। फिलहाल इस इलाके में नाइट्रोजन ऑक्साइड की स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रित बताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में निर्माण कार्यों के दौरान धूल नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए तो प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।