
तिलक राज सेन
मुंबई । अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के भारत पर टैरिफ लगाने के बाद आज भारतीय शेयर बाजार धड़ाम हो गया। सेंसेक्स 3500 अंक तक गिर गया, आज इसे ब्लेक मंडे भी कहा जा रहा है.
शेयर बाजार में हफ्ते के पहले दिन भारी गिरावट दिख रही है। इस गिरावट से बीएसई में लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैप करीब 20 लाख करोड़ रुपये घट गया हैं। लगभग सभी सेक्टर में गिरावट देखने को मिली है।
ख़बर लिखते समय सेंसेक्स क़रीब 2972 पॉइंट नीचे है और 72387 अंक पर काम कर रहा है जबकि निफ्टी 947 अंक नीचे आकर 21954 अंक पर पहुंच गया हैं।
लगभग सभी क्षेत्रीय सूचकांक लाल रंग में हैं। छोटे और मिडकैप सूचकांकों में कटौती और भी अधिक गंभीर है। टेक और मेटल स्टॉक बिकवाली का खामियाजा भुगत रहे हैं, निफ्टी मेटल 8% और निफ्टी IT 7%
से ज्यादा गिर गया। निफ्टी ऑटो, रियल्टी और ऑयल एंड गैस में भी 5% से ज्यादा की गिरावट आई। छोटे और मझोले आकार की कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट हुई। स्मॉल-कैप इंडेक्स 10% और मिड-कैप इंडेक्स 7.3% तक गिर गया।
शुक्रवार को भी बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 9.47 लाख करोड़ रुपये घटकर 403.86 लाख करोड़ रुपये रह गया था।
अमेरिका के दुनियाभर के 180 देशों पर टैरिफ लगाए जाने का असर अब साफ दिखना शुरु हो गया है।
एशिया के अन्य शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट आई है। हॉन्ग कॉन्ग के हेंग सेंग में 2008 के वित्तीय संकट के बाद एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट आई है। चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया में भी भारी गिरावट आई है।
भारतीय शेयर बाजार भी दुनिया के बाकी बाजारों की तरह ही गिर गया। एशिया के ज्यादातर बाजारों में गिरावट देखने को मिली. जापान का निक्केई 7%, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5% और चीन का ब्लू-चिप इंडेक्स लगभग 7% गिर गया। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स तो 10.5% से भी ज्यादा गिर गया। अमेरिका के शेयर बाजार में भी गिरावट का डर है। नैस्डैक वायदा 4% और एस&पी 500 वायदा 3.1% नीचे कारोबार कर रहा था। यूरोप के बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली।
अमेरिकी स्टॉक वायदा सप्ताह की कठिन शुरुआत की ओर इशारा कर रहा है। डाउ फ्यूचर्स 1,200 अंक से अधिक गिर गया है, जो आने वाले समय में भारी नुकसान का संकेत है। S&P 500 से जुड़ा वायदा लगभग 240 अंक नीचे है, जबकि टेक-हैवी नैस्डैक वायदा 1,000 अंक के करीब गिर गया है।
अमेरिका में मार्च महीने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े आने वाले हैं। अनुमान है कि इसमें 0.3% की बढ़ोतरी होगी। लेकिन लोगों को डर है कि टैक्स की वजह से खाने-पीने की चीजों से लेकर कारों तक, हर चीज महंगी हो जाएगी। कंपनियों को भी डर है कि उनकी कमाई कम हो जाएगी। लगभग 87% अमेरिकी कंपनियां 11 अप्रैल से 9 मई के बीच अपने नतीजे घोषित करने वाली हैं। सबसे पहले बड़े बैंक अपने नतीजे बताएंगे।
अमेरिका के जवाबी शुल्क और फिर चीन के जवाबी कदम से शुरू हुए वैश्विक व्यापार युद्ध की तपिश का सामना करते हुए सोमवार को रुपया शुरुआती कारोबार में 19 पैसे फिसलकर 85.63 प्रति डॉलर पर आ गया।