
भोपाल। नेशनल हेल्थ मिशन की रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ कि प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा स्ट्रीट डॉग्स हैं। अकेले इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में ही इनकी संख्या 6 लाख से अधिक है। इन्हीं शहरों में आवारा कुत्तों के हमले भी सबसे ज्यादा हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आवारा पशुओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। इसमें आवारा कुत्तों से जुड़े एक मामले में कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला पूरे देश में लागू होगा। सभी स्टेट और नेशनल हाईवे से आवारा पशु हटाए जाएं। आवारा कुत्तों से निपटने के लिए अस्पतालों, स्कूलों और कॉलेज कैंपस में बाड़ लगाएं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश में स्ट्रीट डॉग्स को लेकर पड़ताल की गई। जिसमें कई बातें सामने आईं।
साल 2022 में एमपी में स्ट्रीट डॉग्स की संख्या 10 लाख 9 हजार आंकी गई थी। भोपाल में डेढ़ लाख से ज्यादा डॉग्स हैं। साल 2024 में यहां 19 हजार 285 लोगों को कुत्तों ने काटा था। वहीं, इस साल जनवरी से जून के बीच 10 हजार 795 लोग कुत्तों का शिकार बने।
इंदौर में 30 हजार 304, ग्वालियर में 11 हजार 902, जबलपुर में 13 हजार 619, उज्जैन में 10 हजार 296 और उज्जैन में 1131 लोग शिकार हुए थे। नेशनल हेल्थ मिशन ने राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मध्यप्रदेश के 6 शहरों को शामिल किया है। वहीं, वर्ष 2030 तक रैबीज फ्री शहर बनाने के लिए विस्तृत कार्य योजना मांगी गई थी। इसमें डॉग बाइट के मामले सामने आए थे।