
नई दिल्ली । दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (IGIA) के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सर्वर में आई तकनीकी खराबी ने शुक्रवार को पूरे हवाई संचालन को अस्त-व्यस्त कर दिया।
करीब 200 से अधिक उड़ानों में देरी दर्ज की गई, जबकि कई विमानों को लैंडिंग और टेकऑफ क्लियरेंस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
एटीसी की तकनीकी टीम डायल (DIAL) और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर सर्वर फॉल्ट को दूर करने में लगी हुई है, लेकिन देर शाम तक समस्या पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाई।
पिछले दिनों से जारी संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
इससे पहले मंगलवार को भी दिल्ली एयरपोर्ट पर “एयर ट्रैफिक कंजेशन” की गंभीर स्थिति बनी थी।
उस दिन ईस्टरली विंड्स, वीवीआईपी मूवमेंट और जीपीएस स्पूफिंग (GPS Spoofing) की वजह से हालात इतने बिगड़ गए थे कि चारों रनवे ऑपरेशनल होने के बावजूद सात फ्लाइट्स को जयपुर एयरपोर्ट पर डायवर्ट करना पड़ा।
Flightradar24 की ग्लोबल डिसरप्शन रिपोर्ट में उस दिन काठमांडू एयरपोर्ट को पहला और दिल्ली एयरपोर्ट को दूसरा सबसे प्रभावित एयरपोर्ट बताया गया था।
हवा के रुख में बदलाव से घटी रनवे क्षमता
एयरपोर्ट ऑपरेशन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को हवा का रुख पश्चिम से पूर्व दिशा (ईस्टरली विंड) में बदलने के कारण रनवे की क्षमता घटकर 85 से 80 उड़ानें प्रति घंटा रह गई।
ईस्टरली दिशा में विमानों को द्वारका-गुड़गांव साइड से लैंडिंग और वसंत कुंज की ओर टेकऑफ करना पड़ता है।
इस रुख में रनवे इंटरडिपेंडेंट होने से उड़ान गति धीमी हो जाती है और एयरस्पेस में भीड़ बढ़ जाती है।
जीपीएस स्पूफिंग से पायलट्स को नेविगेशन भ्रम
एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, जीपीएस स्पूफिंग एक गंभीर खतरा है, जिसमें विमान के नेविगेशन सिस्टम को झूठा सिग्नल मिलता है।
एक सीनियर पायलट ने बताया “मान लीजिए विमान बगदाद के ऊपर उड़ रहा है, लेकिन स्पूफिंग की वजह से सिस्टम उसे अंकारा के ऊपर दिखा सकता है। ऐसी स्थिति में पूरा कंट्रोल एटीसी पर निर्भर हो जाता है।”
इस तकनीकी गड़बड़ी से एयरक्राफ्ट की वास्तविक स्थिति का गलत अनुमान लगने का खतरा होता है, जिससे एटीसी और पायलट दोनों पर तनाव और कार्यभार बढ़ जाता है।
वीवीआईपी मूवमेंट बना देरी का दूसरा बड़ा कारण
वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए सभी रनवे पर ऑपरेशन रोक दिए जाते हैं।
यह सिर्फ आधे घंटे की क्लोजर भी हो तो तीन से चार घंटे तक बैकलॉग बना रहता है।
इस सप्ताह लगातार वीवीआईपी मूवमेंट्स के चलते एयरपोर्ट पर फ्लाइट संचालन की लय पूरी तरह बिगड़ गई।
एयरलाइनों ने यात्रियों से धैर्य की अपील की
इंडिगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर कहा “एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सिस्टम में तकनीकी समस्या के कारण दिल्ली हवाई अड्डे पर उड़ान संचालन में देरी हो रही है। कृपया अपने फ्लाइट अपडेट वेबसाइट या एप पर जांचते रहें।”
वहीं एयर इंडिया ने भी यात्रियों से शांत और धैर्यपूर्ण बने रहने की अपील करते हुए कहा की “तकनीकी टीमों के प्रयासों से जल्द ही परिचालन सामान्य होने की उम्मीद है।”
टर्मिनल पर यात्रियों की भीड़ और असुविधा
एटीसी सर्वर की खराबी के चलते आगमन और प्रस्थान दोनों संचालन प्रभावित हुए।
बोर्डिंग गेट्स पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ आई, जबकि कई फ्लाइट्स को लास्ट-मिनट गेट शिफ्ट या होल्ड पर रखा गया।
यात्रियों ने सोशल मीडिया पर लंबे इंतजार, कम सूचना और अव्यवस्था की शिकायतें भी साझा कीं।
तकनीकी पुनर्स्थापन जारी, एटीसी की निगरानी बढ़ाई गई
एटीसी सूत्रों के अनुसार, सर्वर रिकवरी की प्रक्रिया को मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम के तहत किया जा रहा है।
सिविल एविएशन मंत्रालय ने DGCA और AAI (Airport Authority of India) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यह खराबी संभवतः कम्युनिकेशन-नेविगेशन-सरवेलांस (CNS) नेटवर्क की अस्थायी ओवरलोडिंग से जुड़ी हो सकती है।
फैक्ट फ़ाइल: दिल्ली IGI एयरपोर्ट का संचालनिक भार
प्रतिदिन औसतन 1,526–1,550 उड़ानों का संचालन
चार ऑपरेशनल रनवे: 09/27, 10/28, 11R/29L, 11L/29R
सामान्य स्थिति में 85–86 फ्लाइट्स/घंटा की क्षमता
ईस्टरली विंड में यह घटकर 80–81 फ्लाइट्स/घंटा
वर्तमान में एटीसी सर्वर फॉल्ट से 200+ उड़ानों पर असर
विदित हो कि एशिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक IGI के लिए यह चेतावनी
यह घटना न केवल भारत की हवाई यातायात प्रणाली की तकनीकी नाजुकता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि
सिर्फ प्राकृतिक परिस्थितियों या वीआईपी मूवमेंट ही नहीं, बल्कि डिजिटल नेटवर्क सुरक्षा भी अब राष्ट्रीय एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ बन चुकी है।
सरकार और डीजीसीए के लिए यह एक चेतावनी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए रेडंडेंट (backup) एटीसी सर्वर और साइबरसिक्योरिटी मॉड्यूल को सशक्त बनाना अत्यावश्यक है।