
संपादक : विक्रम सेन की रिपोर्ट
नई दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वर्ष 2025 में एक विशेष पहल के रूप में “अनक्लेम्ड बैंक डिपॉजिट्स रिटर्न अभियान” की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य उन बैंक खातों में जमा करोड़ों रुपये की राशि को rightful धारकों या उनके वारिसों तक पहुंचाना है, जो पिछले 10 वर्षों से निष्क्रिय हैं।
एक जानकारी के अनुसार अगर आपका भूला हुआ सैलरी अकाउंट या FD अभी भी बैंक में पड़ा है – सालों से बिना किसी बदलाव के? भारतीय बैंकों में ₹67,000 करोड़ से ज़्यादा की बिना दावे वाली जमा राशि बेकार पड़ी है। RBI का UDGAM पोर्टल अब आपको यह पता लगाने में मदद करेगा कि क्या आपका या आपके परिवार का पैसा SBI, PNB, HDFC, ICICI आदि के निष्क्रिय खातों में फंसा है।
आरबीआई के अनुसार, अब बैंकों को ऐसे खातों की पहचान कर, तीन महीनों के भीतर क्लेम प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम देश में वित्तीय पारदर्शिता, जागरूकता और समावेशन को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
आसान KYC प्रक्रिया से बढ़ेगी पारदर्शिता
आरबीआई ने KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया को सरल बनाते हुए ग्राहकों को कई माध्यमों से अपनी पहचान सत्यापित करने की सुविधा दी है;
बैंक शाखा में व्यक्तिगत रूप से जाकर,
वीडियो कॉल के माध्यम से ऑनलाइन सत्यापन कर, या
स्थानीय बिजनेस कॉरस्पोंडेंट (BC) की सहायता से।
इससे ग्राहकों को अब लंबी प्रक्रियाओं से गुज़रने की आवश्यकता नहीं होगी। बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी दावे तय समयसीमा में निपटाए जाएं।
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम निष्क्रिय खातों के पिथराव को समाप्त करेगा और प्रणाली में विश्वसनीयता व पारदर्शिता बढ़ाएगा। इससे उन लाखों परिवारों को राहत मिलेगी जो अपने स्वजनों के पुराने खातों या जमा राशि की जानकारी से अनभिज्ञ हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ग्रामीण एवं अर्द्धशहरी क्षेत्रों में जागरूकता की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में जनजागरूकता अभियानों और स्थानीय बैंक शाखाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होगी।
कैसे करें अपना पैसा क्लेम
यदि आपके नाम पर या आपके किसी परिजन के नाम पर बैंक में अनक्लेम्ड डिपॉजिट पड़ा हुआ है, तो अब उसे पाने की प्रक्रिया आसान हो गई है
1. अपने बैंक या शाखा से संपर्क करें।
2. KYC अपडेट कर सही दस्तावेज़ प्रस्तुत करें।
3. बैंक अधिकारी द्वारा सत्यापन के बाद राशि आपके खाते में पुनः सक्रिय हो जाएगी।
सबसे अहम बात, इस पूरी प्रक्रिया में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
आरबीआई की यह पहल न केवल निष्क्रिय खातों को पुनर्जीवित करेगी, बल्कि आम नागरिकों के आर्थिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।
नोट: ख़बर विभिन्न स्रोतों से साभार प्राप्त की गई हैं।