
विशेष रिपोर्ट विक्रम सेन
पटना । बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी जमीन एक बार फिर गर्म हो गई है।
पटना पुलिस ने मोकामा के बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह सहित उनके दो सहयोगियों मणिकांत ठाकुर और रणजीत राम को को बहुचर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार देर रात इस कार्रवाई की पुष्टि पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा और डीएम त्याग राजन ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में की।
यह गिरफ्तारी ठीक चुनावी माहौल के बीच हुई है, और यही इसे राजनीतिक रूप से विस्फोटक बनाती है।
कार्रवाई का तरीका भी बना चर्चा का विषय
जानकारी के अनुसार, रात करीब 11 बजे के आसपास पुलिस के कई वाहनों का काफिला मोकामा के कारगिल स्थित अनंत सिंह के आवास पर पहुंचा। मौके पर पहले से ही सुरक्षा बलों की बड़ी संख्या तैनात थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस ने आवास को चारों ओर से घेर लिया और लगभग आधे घंटे तक भीतर पूछताछ चलती रही। इसके बाद अनंत सिंह को हिरासत में लेकर पुलिस टीम वहां से निकल गई।
क्षेत्र में उबाल की आशंका और प्रचार अभियान को देखते हुए पुलिस व प्रशासन ने देर रात तक चुप्पी साधे रखी और
रात में आधिकारिक घोषणा की, जो अपने आप में एक रणनीतिक कदम था।
दुलारचंद हत्याकांड क्या है?
यह मामला कुछ तीस अक्टूबर का है जब मोकामा में जन सुराज पार्टी प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार के दौरान चर्चित व्यापारी और राजनेता दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी।
हत्या के बाद से ही पुलिस कई संदिग्धों से पूछताछ कर रही थी। इसी आधार पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
घटना में अनंत सिंह समर्थकों पर हत्या का आरोप लगा और इसके तुरंत बाद चुनाव आयोग ने SDO, SDPO और SP ग्रामीण सहित कई अधिकारियों का तबादला व निलंबन कर दिया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि दुलारचंद की मौत गोली से नहीं बल्कि कुचलने से हुई।
पसलियाँ टूटीं, फेफड़ा फटा, हृदयाघात से मौत हुई।
अब सवाल यह है कि राजनीतिक दलों की रैली के दौरान हुई झड़प के दौरान हुई भागदौड़ में उन्हें गाड़ी से कुचला गया या साजिश के तहत हमला हुआ?
‘बाहुबली बनाम सुशासन’ का चुनावी समीकरण
अनंत सिंह का नाम बिहार की राजनीति में बाहुबली प्रतीक के रूप में दर्ज है।
वे कभी मोकामा के छोटे सरकार कहलाए, तो कभी जनता के रॉबिन हुड।
अपराध, जनाधार और सत्ता का यह त्रिकोणीय रिश्ता अब NDA के लिए राजनीतिक बोझ बन चुका था।
अब चुनाव के ठीक पहले उनकी गिरफ्तारी ने यह संदेश देने की कोशिश की है “कानून से ऊपर कोई नहीं, चाहे बाहुबली ही क्यों न हो।”
विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम सुशासन के प्रतीकात्मक प्रदर्शन का हिस्सा है, बिहार की राजनीति का इतिहास रहा हैं कि वहां बाहुबली हमेशा सत्ता की सीढ़ी रहे हैं।
आज यदि वही सीढ़ी ‘सुशासन’ के नाम पर तोड़ी जा रही है, तो यह कानून से अधिक सत्ता की रणनीति का परिचायक है। जहाँ सरकार यह दिखाना चाहती है कि सत्ता अपराध पर सख्त है,
लेकिन चयनात्मक कार्रवाई के राजनीतिक अर्थ भी उतने ही स्पष्ट हैं।
उधर जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी ने कहा “यह अच्छा कदम है, लेकिन बहुत देर से। जब एफआईआर दर्ज हुई थी तभी गिरफ्तारी होनी चाहिए थी।
देर आए दुरुस्त आए, अब देखना है कि जांच निष्पक्ष होती है या नहीं।”
‘सुशासन’ की आड़ में राजनीति?
राजनीतिक पंडितों के मुताबिक “NDA चाहती है कि बाहुबली छवि पर वार कर खुद को सख्त शासक के रूप में स्थापित करे।”
संभावना है कि अनंत सिंह की गिरफ्तारी को विपक्ष ‘राजनीतिक बलि’ बताकर जनभावना से जोड़ने की कोशिश करेगा।
पुलिस की तत्परता और चुनाव आयोग की कार्रवाइयाँ इस बात की गवाही हैं कि मामला सिर्फ कानून नहीं, सत्ता संतुलन का है।
बहरहाल अनंत सिंह की गिरफ्तारी केवल एक कानूनी कार्रवाई नहीं,
यह बिहार के राजनीतिक रंगमंच की पुरानी पटकथा का नया दृश्य है।
हर चुनाव से पहले एक बाहुबली गिरता है,
और सरकार यह संदेश देती है कि “कानून का शासन कायम है।”
डीएम त्याग राजन ने बताया कि इस घटना में कानून व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि “जितने भी लीगल हथियार हैं, उन्हें भी जमा कराया जा रहा है।” डीएम ने साफ किया कि प्रशासन हर कोण से मामले की जांच कर रहा है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “दोनों पक्षों की ओर से मामला दर्ज कराया गया है” और इस घटना में आचार संहिता का उल्लंघन भी हुआ है। उन्होंने बताया कि अनंत सिंह उस समय घटनास्थल पर मौजूद थे, और जांच के बाद उनकी गिरफ्तारी की गई है।
इस गिरफ्तारी से बिहार की जनता अब यह भी समझ रही है कि सचमुच अपराध पर प्रहार हो रहा है, और यह ‘सुशासन’ का ट्रेलर हैं।