





विशाखापट्टनम । अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में हैं. वे यहां पर योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किए गए कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे हैं. पीएम मोदी ने कार्यक्रम में बोलते हुए पिछले एक दशक में योग की वैश्विक यात्रा का जिक्र किया. उन्होंने उस ऐतिहासिक लम्हे को याद किया, जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव रखा था. बहुत कम वक्त में 175 देश भारत के साथ खड़े हो गए.
प्रधानमंत्री ने कहा, “आज की दुनिया में ऐसा समर्थन सामान्य घटना नहीं है. ये सिर्फ एक प्रस्ताव का समर्थन भर नहीं था, ये मानवता के भले के लिए दुनिया का सामूहिक प्रयास था.”
नरेंद्र मोदी ने कहा, “दुर्भाग्य से आज पूरी दुनिया किसी न किसी तनाव से गुजर रही है. कितने ही क्षेत्रों में अशांति और अस्थिरता बढ़ रही है. ऐसे में योग से हमें शांति की दिशा मिलती है. योग एक ऐसा पॉज बटन है, जिसकी मानवता को संतुलन की सांस लेने और फिर से नियंत्रण पाने की जरूरत है. आइए इस योग दिवस को मानवता के लिए ओम को खोजने के लिए योग की शुरुआत के रूप में चिह्नित करें, जहां आंतरिक शांति समग्र शांति का मार्ग बन जाती है.”
‘तनाव से गुजर रही पूरी दुनिया के लिए योग एक पॉज बटन…’,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज 11 साल बाद हम देख रहे हैं कि योग दुनिया भर में करोड़ों लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है. मुझे गर्व होता है, जब मैं देखता हूं कि हमारे दिव्यांग साथी योग शास्त्र पढ़ते हैं. वैज्ञानिक अंतरिक्ष में योग करते हैं.”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “योग हमें सिखाता है कि हम अलग-थलग व्यक्ति नहीं हैं, हम प्रकृति का अभिन्न अंग हैं. शुरुआत में, यह हमें अपने स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती का ख्याल रखने में मदद करता है. लेकिन धीरे-धीरे, यह जागरूकता बढ़ती है, और हम न केवल अपने लिए बल्कि अपने पर्यावरण, अपने समाज और अपने ग्रह के लिए भी देखभाल करना शुरू कर देते हैं. योग एक ऐसी प्रणाली है, जो हमें ‘मैं’ से ‘हम’ की ओर ले जाती है.
नरेंद्र मोदी ने कहा, “जब व्यक्ति अपने हित से ऊपर उठकर समाज की सोचता है, तभी पूरी मानवता का हित होता है. भारत की संस्कृति हमें सिखाती है- सर्वे भवंतु सुखिनः यानी सभी का कल्याण ही मेरा कर्तव्य है. मैं से हम की यात्रा ही सेवा, समर्पण और सह-अस्तित्व का आधार है.”