

विक्रम सेन
गुजरात के अहमदाबाद में गुरुवार को दोपहर डेढ़ बजे के करीब एक प्लेन क्रैश हो गया. अहमदाबाद प्लेन क्रैश में गुजरात के पूर्व सीएम विजय रुपाणी समेत 265 यात्रियों की मौत हुई है.
टेक ऑफ के 2 मिनट बाद मेघानी नगर (अहमदाबाद का रिहायशी इलाका) में यह विमान गिर पड़ा.
इससे पहले यह विमान सिर्फ 625 फीट ऊंचाई तक पहुंच पाया और उसकी रफ्तार 174 नॉट (320 किमी/घंटा) थी, जबकि 787 को इस वजन पर कम से कम 200-250 नॉट की रफ्तार चाहिए होती है.
क्रैश वीडियो में विमान का लैंडिंग गियर (पहिए) नीचे दिखाई दे रहा था, जो टेक ऑफ में नहीं होना चाहिए. हादसे के वीडियो में इंजन की आवाज नहीं सुनाई दी और MAYDAY कॉल से लगता है कि विमान में ताकत (थ्रस्ट) की कमी थी. अहमदाबाद में बर्ड स्ट्राइक का खतरा भी रहता है या इंजन में कोई तकनीकी खराबी हो सकती थी. लेकिन दोनों इंजनों का एक साथ फेल होना बहुत ही दुर्लभ घटना है (10 लाख में 1 बार). 787 के GEnx इंजन काफी भरोसेमंद हैं.
हादसे वाला बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर, एक अत्याधुनिक, लंबी दूरी वाला विमान था जिसमें GE GEnx इंजन लगा हुआ था.
अहमदाबाद से लंदन गैटविक, करीब 4,200 किमी की दूरी पर है इसलिए विमान पूरी तरह ईंधन से भरा हुआ था जो करीब 1,26000 लीटर यानी 70 टन के करीब होता हैं.
आइए जानते समझते हैं कि यह दर्दनाक हादसा किस तरह से हुआ होगा..
हादसे का समय दिन में 1.40 बजे का था, इस समय बिल्कुल साफ मौसम था, 43°C तापमान था. अहमदाबाद एयर पोर्ट का यह रनवे समुद्र तल से सिर्फ 180 फीट ऊपर है. हादसे के वक्त गर्मी के कारण हवा पतली थी, जिससे लिफ्ट और थ्रस्ट कम हो जाता है.
43°C की गर्मी ने हालात को और खराब कर दिया, जिससे पायलट की गलती और भारी पड़ गई. इंजन फेल (10–15%) या गर्मी से जुड़ी समस्याएं (5–10%) दूसरे संभावित कारण हो सकते हैं, लेकिन मुख्य वजह टेकऑफ में गलती ही लगती है.
टेक ऑफ उड़ान का सबसे जोखिम भरा हिस्सा होता है. सही फ्लैप्स, थ्रस्ट और रोटेशन स्पीड (Vr) बेहद जरूरी होते हैं. गर्म मौसम में गलती की गुंजाइश और भी कम हो जाती है।
टेकऑफ के समय कॉन्फिगरेशन एरर का मतलब होता है विमान की उन सेटिंग्स में गलती, जो उसे सही ढंग से उड़ान भरने से रोक देती हैं. इसमें फ्लैप्स की गलत सेटिंग, कम थ्रस्ट, समय से पहले टेकऑफ (रोटेशन), या लैंडिंग गियर न उठाना जैसी गलतियां शामिल होती हैं. ये सभी चीजें विमान के उठने और ऊंचाई पकड़ने की क्षमता पर असर डालती हैं, जिससे विमान स्टॉल कर सकता है या नियंत्रण खो सकता है।
यह 787 विमान लंबी दूरी की उड़ान पर जा रहा था और इसका वजन लगभग पूरी सीमा (227 टन) तक था. फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम (FMS) में कोई गड़बड़ हुई होगी या पायलट्स ने थ्रस्ट (इंजन की ताकत) सेट करने में गलती कर दी होगी, जिससे विमान को उड़ान भरने के लिए जरूरी ताकत नहीं मिल पाई. इसी वजह से विमान की गति (174 नॉट्स) और ऊंचाई कम रह गई होगी.
अगर विमान ने रनवे के पूरे 3,600 मीटर हिस्से की बजाय बीच से टेकऑफ किया हो (इंटरसेक्शन टेकऑफ), तो यह स्थिति और बिगड़ सकती थी, क्योंकि फिर गलती की गुंजाइश और कम हो जाती है.
गर्मी के कारण इंजन की ताकत कम हो जाती है, इसलिए टेकऑफ के लिए सही थ्रस्ट सेट करना बेहद जरूरी होता है. अगर पायलट्स ने गलती से कम थ्रस्ट (Derated Thrust) चुनी हो या वजन का गलत हिसाब डाला हो, तो विमान तेजी से ऊपर नहीं जा पाया होगा. भारी ईंधन भरे होने के कारण भी विमान को अतिरिक्त ताकत चाहिए थी.
हो सकता है पायलट्स किसी अलर्ट या एटीसी के संदेश में उलझ गए हों या आपस में सही से क्रॉसचेक न कर पाए हों. भले ही बोइंग 787 में इलेक्ट्रॉनिक चेकलिस्ट होती है, मगर जल्दबाजी या दबाव में उसे भी नजरअंदाज किया जा सकता है.
पायलट आमतौर पर FMS में दर्ज किए गए आंकड़ों पर ही भरोसा करते हैं ताकि इंजन की ताकत तय कर सकें. लेकिन अगर वजन, तापमान या रनवे की लंबाई जैसी जानकारी गलत दर्ज हो जाए, तो इंजन से कम ताकत मिलती है. थकान या जल्दी उड़ान भरने का दबाव (जैसे उड़ान का समय निकला जा रहा हो) भी इसकी वजह बन सकता है- भले ही पायलट सबरवाल और कुंदर जैसे अनुभवी क्यों न हों.
विमान की जो गति दर्ज हुई (174 नॉट्स), उससे लगता है कि पायलट्स ने शायद तय रफ्तार से पहले ही विमान उठाने की कोशिश की, जिस वजह से वह जरूरी रफ्तार (200-250 नॉट्स) तक नहीं पहुंच सका.
अहमदाबाद की गर्मी ने भी विमान की लिफ्ट कम कर दी थी, जिस वजह से उसे जमीन पर ज्यादा दूरी तय करनी थी. अगर पायलट्स ने जल्दी रोटेशन कर दी, तो इसी वजह से विमान ऊंचाई (केवल 825 फीट) लेने में संघर्ष कर रहा था. लैंडिंग गियर (पहिए) नीचे ही थे, जिससे लगता है कि पायलट्स ने विमान को चढ़ाई (क्लाइंब) पर ले जाने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की थी- शायद किसी अचानक आई आपात स्थिति की वजह से.
रोटेशन का मतलब होता है उड़ान भरते वक्त विमान के आगे वाले हिस्से (नोज) को ऊपर उठाना ताकि विमान जमीन से ऊपर उठ सके. यह काम तय की गई रफ्तार (Vr) पर किया जाता है, जो 787 जैसे विमान के लिए आमतौर पर 140-160 नॉट्स होती है (वजन पर निर्भर करता है). अगर विमान इस रफ्तार से पहले ही ऊपर उठने की कोशिश करता है, तो विमान को ठीक से लिफ्ट (ऊपर उठने की ताकत) नहीं मिलती. इससे विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकरा सकता है या विमान हवा में अस्थिर होकर गिर भी सकता है, खासकर अगर टेक ऑफ के बाद भी स्पीड कम रहे.
किसी ध्यान भटकाने वाली चीज (जैसे स्टॉल अलर्ट या इंजन की गड़बड़ी) की वजह से पायलट्स लैंडिंग गियर (पहिए) ऊपर करना भूल सकते हैं. या फिर पायलट्स ने जानबूझकर गियर नीचे ही रखा होगा ताकि अगर जरूरत पड़े तो जल्दी से वापस रनवे पर उतर सकें. लेकिन MAYDAY कॉल और हादसे से लगता है कि उनके पास समय खत्म हो गया था.
सही CRM का मतलब है कि दोनों पायलट्स के बीच साफ-साफ बातचीत हो और एक-दूसरे की बातें जांच-परख कर आगे बढ़ें. अगर कैप्टन सबरवाल ने फ्लैप्स या थ्रस्ट जैसी कोई सेटिंग गलत कर दी और फर्स्ट ऑफिसर कुंदर ने उसे ठीक से चेक नहीं किया, तो गलती नजर में नहीं आ सकती थी. कई बार कुछ एयरलाइनों में सीनियर पायलट का ज्यादा सम्मान करने की वजह से जूनियर कुछ कहने से हिचकिचाते हैं. हालांकि एयर इंडिया का ट्रेनिंग सिस्टम ICAO (अंतरराष्ट्रीय मानक) के हिसाब से है. इस मायने में पायलट की गलती इस हादसे के लिए जवाबदेह हो सकती हैं, पर पूरी तरह से इस हादसे की जाँच के बाद ही वास्तविक कारण सामने आएंगे.